स्मार्टफोन स्क्रीन प्रोटेक्टर अब BIS के दायरे में, अनिवार्य रजिस्ट्रेशन का नया नियम
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 21 सितंबर 2026 को अधिसूचना जारी कर स्मार्टफोन स्क्रीन प्रोटेक्टर को अनिवार्य पंजीकरण आदेश, 2021 की सूची में शामिल किया है। नया मानक IS 19348:2025 होगा और यह 1 अप्रैल 2027 से प्रभावी होगा, यानी अब बाज़ार में बिकने वाला हर ग्लास स्क्रीन प्रोटेक्टर तय गुणवत्ता मानक पर खरा उतरे बिना नहीं बिक पाएगा।

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सरकार की नई अधिसूचना क्या कहती है
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 21 सितंबर 2026 को नई दिल्ली से जारी अधिसूचना (सं. 5190(E)) में "इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी वस्तु (अनिवार्य पंजीकरण की आवश्यकता) आदेश, 2021" में संशोधन किया है। इस संशोधन के तहत आदेश की अनुसूची में क्रम संख्या 66 पर एक नई प्रविष्टि जोड़ी गई है, स्मार्टफोन के लिए स्क्रीन प्रोटेक्टर।
इसका सीधा मतलब है कि अब स्मार्टफोन स्क्रीन प्रोटेक्टर भी उन इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की श्रेणी में आ गए हैं जिन्हें बिना अनिवार्य पंजीकरण के भारत में बनाया, बेचा, आयात या वितरित नहीं किया जा सकता।
किस मानक पर होगा टेस्ट
नई अधिसूचना के मुताबिक स्क्रीन प्रोटेक्टर को भारतीय मानक IS 19348:2025 के अनुरूप होना होगा, जिसका शीर्षक है "Glass Screen Protector — Specification"। यह ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स का एक नया मानक है, इससे पहले किसी पुराने मानक को यह सुपरसीड नहीं कर रहा।
इस मानक के तहत आमतौर पर जिन तकनीकी पैमानों पर उत्पाद परखा जाता है, उनमें शामिल हैं:
मोटाई की एकरूपता
सतह की कठोरता (हार्डनेस)
प्रभाव प्रतिरोध (इम्पैक्ट रेजिस्टेंस)
खरोंच प्रतिरोध
ऑप्टिकल क्लैरिटी यानी पारदर्शिता
किनारों की फिनिशिंग
चिपकने की क्षमता (एडहेसिव परफॉर्मेंस)
कब से लागू होगा नियम
अधिसूचना में साफ लिखा है कि यह प्रावधान 1 अप्रैल 2027 से प्रभावी होगा। यानी निर्माताओं और आयातकों के पास करीब साढ़े छह महीने का समय है कि वे अपने उत्पादों को नए मानक के अनुरूप बना लें और BIS से रजिस्ट्रेशन नंबर (R-नंबर) हासिल कर लें।
किस कानून के तहत हुआ बदलाव
यह संशोधन भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम, 2016 (Bureau of Indian Standards Act, 2016) की धारा 16 की उप-धारा (1) और (2), साथ ही धारा 25 की उप-धारा (3) के तहत केंद्र सरकार की शक्तियों का उपयोग करते हुए किया गया है। अधिसूचना पर संयुक्त सचिव सुशील पाल के हस्ताक्षर हैं, फाइल नंबर W-47/8/2023-IPHW के तहत।
मूल आदेश 18 मार्च 2021 को राजपत्र में प्रकाशित हुआ था और तब से अब तक इसमें एक दर्जन से ज्यादा बार संशोधन हो चुके हैं, आखिरी बार 26 जुलाई 2026 को।
असर किस पर पड़ेगा
भारत में स्मार्टफोन स्क्रीन प्रोटेक्टर का बाज़ार बड़े पैमाने पर असंगठित क्षेत्र के हवाले है, सड़क किनारे मोबाइल एक्सेसरी दुकानों से लेकर ऑनलाइन मार्केटप्लेस तक। बिना क्वालिटी चेक के सस्ते टेम्पर्ड ग्लास बड़ी संख्या में बिकते हैं, जिनमें से कई महीनों के भीतर टूटने, स्क्रैच आने या टच सेंसिटिविटी खराब होने की शिकायतें लेकर आते हैं।
BIS की अनिवार्य पंजीकरण स्कीम (CRS) का मकसद ऐसे ही घटिया और नकली उत्पादों पर लगाम लगाना है। स्कीम के तहत निर्माता को खुद अनुरूपता की स्व-घोषणा (self-declaration of conformity) के आधार पर BIS से लाइसेंस और यूनीक R-नंबर लेना होता है, जिसे उत्पाद पर स्टैंडर्ड मार्क के साथ दिखाना अनिवार्य है।
1 अप्रैल 2027 के बाद बिना इस मार्क के बिकने वाला स्क्रीन प्रोटेक्टर तकनीकी रूप से गैरकानूनी माना जाएगा।