MP में हाईटेक सुगम बसों की एंट्री, ड्राइवर ने शराब पी तो बस स्टार्ट नहीं होगी; रूट बदला तो बजेगा अलार्म
मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा की नई बसों में यात्रियों की सुरक्षा के लिए कई तकनीकी इंतजाम किए गए हैं। ब्रीथ एनालाइजर, CCTV, झपकी डिटेक्शन, लेन अलर्ट और ऑनलाइन टिकटिंग जैसी सुविधाएं बसों में होंगी।

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इंदौर में अब बस यात्रा सिर्फ टिकट लेकर सीट तक पहुंचने तक सीमित नहीं रहने वाली है। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत आने वाली नई बसों में ऐसे सुरक्षा सिस्टम लगाए जा रहे हैं, जो ड्राइवर की हालत से लेकर बस की रफ्तार और रास्ते तक पर नजर रखेंगे।
सबसे खास व्यवस्था ड्राइवर की सीट से जुड़ी है। बस शुरू करने से पहले ड्राइवर को ब्रीथ एनालाइजर में फूंक मारनी होगी। अगर सिस्टम ने शराब की मौजूदगी पकड़ी, तो बस स्टार्ट ही नहीं होगी।
इसके अलावा ड्राइवर को झपकी आने पर सेंसर अलर्ट करेगा। बस अपनी लेन से हटकर लहराने लगे या तय रूट से अलग जाए, तब भी सुरक्षा सिस्टम चेतावनी देगा।
इन सुविधाओं वाली बस को गुरुवार को ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित यात्री परिवहन विजन समिट-2026 में प्रदर्शित किया गया। पुणे की एरो ईगल कंपनी ने यह बस तैयार की है और संचालन के लिए इसे रीवा को दिया गया है।
शराब पीकर ड्राइविंग पर बस ही नहीं होगी स्टार्ट
नई बसों में ड्राइवर की सुरक्षा के साथ-साथ यात्रियों की जान बचाने पर खास जोर दिया गया है। बस स्टार्ट करने से पहले ड्राइवर को ब्रीथ एनालाइजर टेस्ट देना होगा।
अगर जांच में शराब का पता चलता है तो वाहन का सिस्टम उसे स्टार्ट नहीं होने देगा। यानी नशे की हालत में बस चलाने की संभावना को तकनीक के स्तर पर ही रोकने की कोशिश की गई है।
बस की अधिकतम गति भी 80 किलोमीटर प्रति घंटा तय रहेगी। ड्राइवर इससे ज्यादा रफ्तार पर वाहन नहीं चला सकेगा।
झपकी आई या बस लहराई तो मिलेगा अलर्ट
लंबे रूट पर बस ड्राइवर को नींद आने की स्थिति को भी सुरक्षा सिस्टम पकड़ सकेगा। सेंसर ड्राइवर को अलर्ट करेगा।
अगर बस अपनी लेन में सीधी चलने के बजाय लहराने लगे तो भी सिस्टम सक्रिय होगा। इसका उद्देश्य वाहन को समय रहते नियंत्रित करने में ड्राइवर की मदद करना है।
आगे या पीछे करीब 1.5 मीटर की दूरी पर कोई दूसरा वाहन आने पर भी ड्राइवर को चेतावनी मिलेगी। रिवर्स पार्किंग के दौरान मदद के लिए सेंसर लगाए गए हैं।
बस के अंदर CCTV, सिस्टम की साइबर सुरक्षा भी
यात्रियों की निगरानी के लिए बस के अंदर CCTV कैमरे लगाए गए हैं। वहीं बस के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को साइबर हमलों से बचाने के लिए गेटवे सॉफ्टवेयर आधारित सुरक्षा व्यवस्था की गई है।
आग से बचाव के लिए बस में अग्निरोधी प्लाइवुड का इस्तेमाल किया गया है। बैटरी के लिए नीचे अलग कंपार्टमेंट बनाया गया है और उसके ऊपर फायर एक्टिंग्विशर लगाया गया है। आग बुझाने के लिए केमिकल और पानी, दोनों की व्यवस्था रहेगी।
यात्रियों के लिए टिकट भी डिजिटल तरीके से उपलब्ध होंगे। इससे टिकटिंग व्यवस्था को आसान और अधिक पारदर्शी बनाने की योजना है।
इंदौर में पहुंच चुकी हैं 7 बसें
मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत इंदौर में फिलहाल सात बसें पहुंच चुकी हैं। ये 45 सीटर बसें हैं और डिपो में इनके रंगरोगन का काम चल रहा है।
योजना के मुताबिक 25 दिसंबर से इंदौर में 23 रूट पर सेवा शुरू की जानी है। एआईसीटीएसएल के माध्यम से इंदौर से सागर, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा, नरसिंहपुर, छतरपुर, बीना, नर्मदापुरम और बालाघाट जैसे शहरों के लिए बसें चलाने की योजना है।
इसके अलावा खंडवा-शाजापुर, धार-मंदसौर, धार-पचमढ़ी, झाबुआ-भोपाल, खरगोन-नीमच, बुरहानपुर-नीमच, बड़वानी-आगर मालवा, बड़वानी-शाजापुर और बुरहानपुर-रतलाम सहित कई अन्य रूट भी प्रस्तावित हैं।
समिट में आरामदायक सफर पर चर्चा, बाहर बसों में भीड़
ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में विशेषज्ञ सार्वजनिक परिवहन को बेहतर बनाने के लिए पहुंच, भरोसेमंद सेवा, आराम और किराए की वहनीयता जैसे मुद्दों पर चर्चा कर रहे थे।
इसी दौरान विजयनगर क्षेत्र में सार्वजनिक परिवहन की दूसरी तस्वीर भी दिखाई दी। एआईसीटीएसएल की अरविंदो से विजयनगर की ओर आने वाली बस यात्रियों से ठसाठस भरी थी। कई लोगों को बैठने की जगह तक नहीं मिली।
खिड़कियां खुली होने के कारण धूल से भी यात्रियों को परेशानी हो रही थी। ऐसे में हाईटेक बसों की योजना के साथ मौजूदा सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में क्षमता और सुविधा बढ़ाने की जरूरत भी सामने आई।
एक्सपर्ट्स ने दिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट सुधार के सुझाव
यात्री परिवहन विजन समिट में विशेषज्ञों ने सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने के लिए कई सुझाव दिए।
इलेक्ट्रिक बसों के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत किया जाए।
बस स्टेशनों को आधुनिक ‘बस पोर्ट’ के रूप में विकसित किया जाए।
कम यात्रियों वाले रूट पर छोटी बसें चलाई जाएं।
डिपो में रिटेल, लॉजिस्टिक्स और अन्य कमर्शियल गतिविधियों से गैर-किराया आय बढ़ाई जाए।
स्मार्ट टिकटिंग और पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम से बसों की रियल टाइम जानकारी दी जाए।
डिजिटल फीडबैक और शिकायतों के समाधान की पारदर्शी व्यवस्था बने।
आरक्षित, अनारक्षित और नियमित यात्रियों के पास डिजिटल किए जाएं।
MP में बढ़ेगा बसों का नेटवर्क
प्रदेश में फिलहाल 96 पीएम ई-बसें और 120 इंटरसिटी बसें संचालित हैं। अगले छह महीनों में 486 नई पीएम ई-बसें और 34 नई इंटरसिटी बसें जोड़ने की योजना है।
2027 तक प्रदेश में बसों की संख्या बढ़ाकर 1,100 करने का लक्ष्य बताया गया है। अभी सात डिपो हैं, जबकि अगले छह महीनों में 100-100 बसों की क्षमता वाले नौ नए अत्याधुनिक डिपो बनाए जाने की योजना है।
सरकार के अनुसार, इस विस्तार से हर साल करीब 70 हजार टन कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद मिलेगी।
इंदौर को चाहिए 3 हजार बसें
इंदौर में फिलहाल करीब 300 बसें चल रही हैं, जबकि शहर की जरूरत करीब 3 हजार बसों की बताई गई है।
प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन का बड़ा हिस्सा अभी निजी ऑपरेटरों के पास है। करीब 87 प्रतिशत बसों का संचालन निजी ऑपरेटर करते हैं। फिलहाल प्रदेश में करीब 11 हजार बसें निजी ऑपरेटर चला रहे हैं और अगले चार साल में यह संख्या बढ़ाकर 15 हजार करने की योजना है।
इंदौर के अलावा भोपाल, ग्वालियर, रीवा, जबलपुर, उज्जैन और सागर में भी अलग-अलग परिवहन कंपनियों के माध्यम से सेवा संचालित करने की योजना है।
2030 तक 169 शहरों तक विस्तार का लक्ष्य
सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट के हेड टेक्निकल सेक्रेटेरिएट शेखर एन. धोले के मुताबिक, प्रदेश में पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम को फिर से मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
उनके अनुसार, 2030 तक प्रदेश के 169 शहरों में 38 हजार बसें चलाने का लक्ष्य है। साथ ही शहरों के सार्वजनिक परिवहन में इलेक्ट्रिक बसों की हिस्सेदारी बढ़ाने की योजना है।
