भोपाल में इंटर्न डॉक्टरों का आंदोलन खत्म, स्टाइपेंड 50% बढ़ा; अब ₹21,500 महीना, 2 पुलिसकर्मी लाइन अटैच
भोपाल में तीन दिन से चल रहा इंटर्न डॉक्टरों का आंदोलन सरकार से सहमति के बाद खत्म हो गया। स्टाइपेंड 50% बढ़ाकर ₹21,500 प्रतिमाह करने पर फैसला हुआ है। लाठीचार्ज और वॉटर कैनन मामले में 2 पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच कर जांच के निर्देश दिए गए हैं।

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भोपाल में तीन दिन से चल रहे इंटर्न डॉक्टरों के आंदोलन का बुधवार को पटाक्षेप हो गया। सरकार ने स्टाइपेंड में 50 फीसदी बढ़ोतरी की मांग मान ली है। अब इंटर्न डॉक्टरों को हर महीने ₹21,500 स्टाइपेंड मिलेगा। इसके साथ ही प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज और वॉटर कैनन के इस्तेमाल को लेकर भी कार्रवाई की गई है।
दो पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच किया गया है और पूरे मामले की जांच के लिए टीम गठित की गई है। घायल छात्रों के इलाज की व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए गए हैं। सरकार के फैसले के बाद डॉक्टरों ने कमला पार्क के पास चल रहा प्रदर्शन समाप्त कर दिया और काम पर लौटने का ऐलान किया।
स्वास्थ्य मंत्री से बैठक के बाद बनी सहमति
बुधवार को इंटर्न डॉक्टरों, जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन और एमटीए के प्रतिनिधियों की डिप्टी सीएम एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल के साथ बैठक हुई। करीब एक घंटे तक चली चर्चा में स्टाइपेंड बढ़ाने के मुद्दे पर सहमति बनी।
बैठक के बाद आंदोलनकारी डॉक्टरों ने प्रदर्शन खत्म कर दिया। इसके बाद उन्होंने नारेबाजी की और स्टाइपेंड बढ़ोतरी को अपनी मांग की जीत बताया।
पुलिस कार्रवाई पर भी सरकार का फैसला
आंदोलन के दौरान लाठीचार्ज और वॉटर कैनन के इस्तेमाल का मुद्दा भी डॉक्टरों की प्रमुख मांगों में शामिल था। सरकार ने इस मामले में दो पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच कर दिया है।
घटना की जांच के लिए टीम बनाने के साथ घायल छात्रों के इलाज की व्यवस्था के निर्देश दिए गए हैं। डॉक्टरों की ओर से आंदोलन के दौरान जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई और घायल डॉक्टरों के लिए मुआवजे की मांग उठाई गई थी।
हड़ताल का सीधा असर मरीजों पर पड़ा
तीन दिन के आंदोलन के दौरान OPD और इलेक्टिव ऑपरेशन थिएटर का बहिष्कार किया गया था। इसका सबसे ज्यादा असर हमीदिया अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों पर दिखाई दिया।
बुधवार को अस्पताल में सामान्य दिनों की तुलना में OPD काफी कम रही। आमतौर पर करीब 3 हजार मरीजों की OPD होती है, लेकिन इस दिन 1609 पर्चे ही बन सके। सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक मरीजों को देखने के बाद OPD बंद हो गई।
इसके बाद करीब 1391 मरीज बिना डॉक्टर से परामर्श लिए लौट गए। इनमें भोपाल के अलावा आसपास के जिलों और इंदौर, सीधी व राजगढ़ से पहुंचे मरीज भी शामिल थे।
कई मरीज पर्चा बनवाने के बाद डॉक्टर का इंतजार करते रहे। कुछ जांच के लिए भटकते रहे तो कई इलाज कराए बिना ही वापस लौट गए। दूर-दराज से बस और ट्रेन के जरिए पहुंचे मरीजों की परेशानी और बढ़ गई।
20 ऑपरेशन भी टालने पड़े
हड़ताल का असर ऑपरेशन थिएटर पर भी रहा। दोपहर 2 बजे तक 20 सर्जरी की गईं, जबकि 20 ऑपरेशन टाल दिए गए। सामान्य दिनों में भोपाल में करीब 40 ऑपरेशन होने की बात सामने आई है।
हालांकि इमरजेंसी और ICU सेवाएं जारी रहीं। हमीदिया अस्पताल की लैब में भी सामान्य दिनों के मुकाबले मरीजों की संख्या कम रही।
इन मांगों को लेकर तीन दिन चला आंदोलन
इंटर्न डॉक्टरों का आंदोलन सिर्फ स्टाइपेंड बढ़ाने तक सीमित नहीं था। डॉक्टर वन नेशन-वन स्टाइपेंड लागू करने की मांग कर रहे थे। इसके अलावा प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज और वॉटर कैनन के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई, घायल डॉक्टरों को मुआवजा और आंदोलन में शामिल डॉक्टरों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं करने की मांग भी रखी गई थी।
आंदोलन में करीब 600 जूनियर रेजिडेंट और 250 इंटर्न डॉक्टरों के शामिल होने की बात सामने आई।
अब स्टाइपेंड बढ़ाने के फैसले और पुलिस कार्रवाई की घोषणा के बाद डॉक्टरों ने आंदोलन खत्म कर दिया है। अस्पतालों में नियमित सेवाएं बहाल होने से मरीजों को भी राहत मिलने की उम्मीद है।

