30 दिन में जवाब नहीं तो टैक्स असेसमेंट पूरा, MP में पेट्रोल-डीजल-CNG पंपों को बड़ी राहत; 2024-25 के मामलों के लिए 90 दिन की मोहलत
मध्य प्रदेश में पेट्रोल, डीजल और CNG पंप संचालकों के वित्तीय वर्ष 2024-25 के लंबित टैक्स असेसमेंट मामलों को निपटाने के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है। पात्र व्यापारी स्व-घोषणा के जरिए प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे। आवेदन के बाद 30 दिन तक विभाग की ओर से आपत्ति नहीं आने पर असेसमेंट पूरा माना जाएगा। हालांकि टैक्स चोरी, लंबित नोटिस और रिफंड से जुड़े मामलों को इस सुविधा से बाहर रखा गया है।

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लंबे समय से टैक्स असेसमेंट में अटके पेट्रोल, डीजल और CNG पंप संचालकों के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने प्रक्रिया आसान कर दी है। अब पात्र कारोबारियों को हर मामले में लंबी विभागीय प्रक्रिया का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। वित्तीय वर्ष 2024-25 के कुछ लंबित मामलों को स्व-घोषणा के आधार पर निपटाने की व्यवस्था की गई है।
इस व्यवस्था की सबसे अहम बात आवेदन के बाद मिलने वाली 30 दिन की समयसीमा है। यदि विभाग इस अवधि में कोई आपत्ति या सूचना जारी नहीं करता है, तो आवेदन स्वत: स्वीकार माना जाएगा और संबंधित असेसमेंट पूरा हो जाएगा।
राहत की शुरुआत आवेदन से, लेकिन शर्तें भी तय
वाणिज्यिक कर विभाग की अधिसूचना के मुताबिक पात्र पंप संचालकों को निर्धारित फॉर्म में आवेदन करना होगा। विभाग व्यापारी की ओर से दी गई जानकारी और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर टैक्स निर्धारण की प्रक्रिया पूरी करेगा।
इस व्यवस्था के लिए 90 दिन की अवधि रखी गई है। यानी पात्र व्यापारी तय समय के भीतर स्व-घोषणा के जरिए अपने लंबित मामले को निपटाने की प्रक्रिया में जा सकते हैं।
किसे मिलेगा इस सुविधा का फायदा?
हर पेट्रोल पंप या CNG संचालक इस व्यवस्था में शामिल नहीं होगा। इसका लाभ उन्हीं पंजीकृत कारोबारियों को मिलेगा, जिन्होंने मध्य प्रदेश में अधिसूचित तेल कंपनियों या पंजीकृत व्यापारियों से टैक्स और उपकर चुकाकर पेट्रोल, डीजल या CNG खरीदा है।
इसके साथ संबंधित कारोबारी के खिलाफ वित्तीय वर्ष 2024-25 में टैक्स चोरी का मामला नहीं होना चाहिए। अतिरिक्त कर या ऑडिट से संबंधित कोई लंबित नोटिस है तो उसका अनुपालन भी पूरा होना जरूरी होगा।
आवेदन के साथ हिसाब-किताब का प्रमाण देना होगा
स्व-घोषणा का मतलब यह नहीं है कि बिना दस्तावेज के असेसमेंट पूरा हो जाएगा। आवेदन के साथ टैक्स और ब्याज जमा करने की चालान कॉपी देनी होगी।
जिन कारोबारियों का टर्नओवर 2 करोड़ रुपए से ज्यादा है, उनके लिए CA की ऑडिट रिपोर्ट भी जरूरी होगी।
अगर किसी कारोबारी ने CST में छूट या रियायती दर का लाभ लिया है तो उसे फॉर्म-C, F, E जैसे मूल दस्तावेज भी प्रस्तुत करने होंगे।
विभाग को गलती मिली तो तुरंत खारिज नहीं होगा आवेदन
आवेदन की जांच के दौरान अगर किसी दस्तावेज या जानकारी में कमी मिलती है तो संबंधित अधिकारी लिखित नोटिस जारी कर सकते हैं। कारोबारी को अपनी बात रखने और जरूरी सुधार करने का मौका दिया जाएगा।
निर्धारित समय में कमी दूर कर दी गई तो आवेदन को स्वीकार किया जा सकता है। लेकिन सुधार नहीं किया गया या सुनवाई के दौरान कारोबारी उपस्थित नहीं हुआ तो आवेदन खारिज भी हो सकता है।
30 दिन का नियम सबसे बड़ा बदलाव
नई व्यवस्था में विभागीय कार्रवाई के लिए स्पष्ट समयसीमा तय की गई है। आवेदन जमा होने के बाद 30 दिन तक यदि कोई आपत्ति या सूचना नहीं आती है, तो आवेदन को स्वत: स्वीकार माना जाएगा।
इससे ऐसे मामलों में कारोबारियों को लंबे समय तक विभागीय निर्णय का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। लंबित असेसमेंट के निपटारे में भी तेजी आने की उम्मीद है।
किन मामलों में राहत नहीं मिलेगी?
टैक्स चोरी से जुड़े मामलों को इस सुविधा से बाहर रखा गया है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में टैक्स चोरी पकड़े जाने या अतिरिक्त कर की मांग का नोटिस जारी होने के बाद उसका अनुपालन नहीं करने वाले कारोबारी इसका लाभ नहीं ले सकेंगे।
कर ऑडिट के बाद जारी नोटिस का पालन लंबित होने की स्थिति में भी आवेदन पात्र नहीं होगा।
इसके अलावा जिस कारोबारी ने संबंधित वर्ष के लिए कानून के तहत रिफंड का दावा किया है, उसे भी इस स्व-घोषणा व्यवस्था का लाभ नहीं मिलेगा।
किन कानूनों के तहत लागू होगी व्यवस्था?
यह व्यवस्था मध्यप्रदेश वैट अधिनियम 2002, केंद्रीय बिक्री कर अधिनियम 1956, मोटर स्पिरिट उपकर अधिनियम 2018 और हाई स्पीड डीजल उपकर अधिनियम 2018 के तहत लंबित मामलों पर लागू होगी।
सरकार की इस पहल का मकसद पात्र पंप संचालकों के पुराने टैक्स मामलों को तय प्रक्रिया और समयसीमा के भीतर निपटाना है। हालांकि जिन मामलों में टैक्स चोरी, नोटिस या रिफंड से जुड़े मुद्दे हैं, उनमें सामान्य कानूनी प्रक्रिया ही लागू रहेगी।

