SIR विवाद पर कांग्रेस का बड़ा हमला, खरगे ने CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की; PM मोदी से भी इस्तीफा मांगा
कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर पार्टी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। मल्लिकार्जुन खरगे ने पांच मांगें रखते हुए मुद्दे को सड़क से संसद तक उठाने की बात कही।

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नई दिल्ली में मंगलवार को हुई कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक में चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR का मुद्दा प्रमुख रहा। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर CEC पर दबाव डालने का आरोप लगाया। खरगे ने इसी आधार पर प्रधानमंत्री से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग भी रखी। ये कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोप और राजनीतिक मांगें हैं।
CEC को हटाने की मांग पर CWC में मंथन
कांग्रेस का कहना है कि चुनाव आयोग जैसे संवैधानिक संस्थान की स्वतंत्रता पर किसी भी तरह का सवाल लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर विषय है। खरगे ने कहा कि पार्टी की लड़ाई किसी व्यक्ति या संस्था को कमजोर करने के लिए नहीं, बल्कि मतदाताओं के अधिकार और चुनाव प्रक्रिया में भरोसा बनाए रखने के लिए है।
SIR को लेकर सामने आए विवाद और निर्वाचन आयोग के भीतर कथित मतभेदों के बीच कांग्रेस पहले से ही ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही थी। मंगलवार की CWC बैठक में पार्टी ने इस मुद्दे पर आगे की रणनीति तय की।
मतदाता सूची में बदलाव पर कांग्रेस ने उठाए सवाल
खरगे ने SIR के तहत मतदाता सूचियों में होने वाले बदलावों को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी है और जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उन्हें इसकी जानकारी और अपील का अवसर किस तरह मिलेगा।
कांग्रेस अध्यक्ष ने निर्वाचन आयोग के भीतर दो चुनाव आयुक्तों की ओर से उठाए गए सवालों का भी उल्लेख किया। हालिया रिपोर्टों में SIR, Form-6 और मतदाता डेटा से जुड़े फैसलों पर आयोग के भीतर आपत्तियों की बात सामने आई थी। चुनाव आयोग ने इन आंतरिक मतभेदों को सामान्य संस्थागत विचार-विमर्श का हिस्सा बताया है।
कांग्रेस ने रखीं पांच प्रमुख मांगें
CWC बैठक के बाद कांग्रेस ने मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया को लेकर पांच प्रमुख मांगें सामने रखीं। इनमें मतदाता सूची में बड़े बदलावों का पूरा डेटा सार्वजनिक करना, हटाए गए मतदाताओं को सूचना और अपील का अवसर देना तथा राजनीतिक दलों को जरूरी चुनावी डेटा समय पर उपलब्ध कराना शामिल है।
पार्टी ने गंभीर विसंगतियों की स्वतंत्र और समयबद्ध जांच तथा चुनाव प्रक्रिया से जुड़े आंकड़ों और फैसलों में अधिक पारदर्शिता की भी मांग की है।
राहुल गांधी के उठाए सवालों का भी जिक्र
खरगे ने अपने संबोधन में राहुल गांधी की ओर से पहले उठाए गए मतदाता सूची संबंधी सवालों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कर्नाटक, हरियाणा और महाराष्ट्र में मतदाता डेटा से जुड़े दावों का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस ने डुप्लीकेट मतदाताओं, संदिग्ध पतों, एक ही पते पर बड़ी संख्या में नाम और Form-6 से जुड़ी प्रविष्टियों को लेकर सवाल उठाए हैं।
कांग्रेस का कहना है कि इन मुद्दों पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने अलग-अलग स्तरों पर अभियान और प्रदर्शन भी किए हैं।
चुनाव आयोग पर भरोसा बनाए रखने पर जोर
खरगे ने कहा कि चुनाव आयोग ऐसा संस्थान होना चाहिए जिसके फैसलों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को भरोसा हो। कांग्रेस अध्यक्ष के मुताबिक मतदाता को यह विश्वास होना जरूरी है कि उसका नाम मतदाता सूची में सुरक्षित है और उसके वोट की निष्पक्ष गणना होगी।
उन्होंने लोकतांत्रिक प्रक्रिया में आम मतदाता की भूमिका को सबसे महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि चुनाव आते-जाते रहते हैं, लेकिन लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता बनी रहनी चाहिए।
कांग्रेस बोली- सड़क से संसद तक जारी रहेगा मुद्दा
कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि SIR और चुनाव आयोग से जुड़े सवालों को वह आगे भी राजनीतिक और संसदीय मंचों पर उठाएगी। खरगे ने कहा कि पार्टी मतदाता अधिकार और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर सड़क से संसद तक लड़ाई जारी रखेगी।
अब इस विवाद में आगे की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि निर्वाचन आयोग और केंद्र सरकार कांग्रेस के आरोपों व मांगों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं। फिलहाल CEC को हटाने और प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग कांग्रेस का राजनीतिक रुख है।