SIR के विरोध में भोपाल में कांग्रेस का प्रदर्शन, बैरिकेड्स पर चढ़े कार्यकर्ता; पुलिस ने वाटर कैनन चलाई
भोपाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर कांग्रेस ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की हुई और हालात संभालने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया।

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भोपाल में SIR को लेकर कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन सोमवार को उस वक्त तेज हो गया, जब कार्यकर्ताओं ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय की ओर बढ़ने की कोशिश की। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी की अगुआई में पहुंचे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने बैरिकेडिंग कर रोकने की कोशिश की। कुछ कार्यकर्ता बैरिकेड्स पर चढ़ गए, जिसके बाद पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। बाद में प्रदर्शनकारियों को बसों में बैठाकर मौके से हटाया गया।
प्रदर्शन में CEC के खिलाफ अनोखा विरोध
प्रदर्शन के दौरान एक कार्यकर्ता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का मुखौटा लगाए नजर आया। उसने खुद को जंजीरों से बांध रखा था। जीतू पटवारी और उमंग सिंघार उस जंजीर को पकड़े दिखाई दिए।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इस दौरान ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ जैसे नारे लगाए। पार्टी नेताओं का आरोप है कि SIR की प्रक्रिया के कारण बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से बाहर हुए हैं। कांग्रेस इसी मुद्दे पर चुनाव आयोग से जवाब और पारदर्शिता की मांग कर रही है।
पुलिस से धक्का-मुक्की, बस में बैठाए गए कार्यकर्ता
CEO कार्यालय की ओर बढ़ने के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई। युवा कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष अभिषेक परमार भी बस की खिड़की के ऊपर चढ़ने की कोशिश करते दिखाई दिए।
पुलिस ने जीतू पटवारी को भी बस में बैठाया, लेकिन वे बाद में बाहर निकल आए। प्रदर्शन के दौरान पूर्व विधायक तरवर सिंह लोधी के जूते भीड़ में छूट गए और उन्हें कुछ देर नंगे पैर चलते देखा गया।
कांग्रेस नेताओं ने SIR और चुनाव प्रक्रिया पर उठाए सवाल
प्रदर्शन में कांग्रेस नेताओं ने SIR के साथ-साथ चुनाव प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए। कुछ नेताओं ने EVM के बजाय बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग भी दोहराई।
दिग्विजय सिंह ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए SIR के जरिए बड़े पैमाने पर मतदाता नाम हटाए जाने का दावा किया। जीतू पटवारी ने भी SIR को लेकर पारदर्शिता की मांग की और प्रदेश में मतदाता सूची से हटाए गए नामों का पूरा विवरण सार्वजनिक करने की मांग पहले ही रख चुके हैं।
14 आपत्तियों वाली रिपोर्ट के बाद बढ़ा विवाद
SIR को लेकर मौजूदा राजनीतिक विवाद उस रिपोर्ट के बाद और तेज हुआ, जिसमें दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के कुछ फैसलों पर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की थी। रिपोर्ट में मतदाता सूची, Form 6 और चुनावी डेटा से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख था।
हालांकि चुनाव आयोग ने इन रिपोर्टों के बाद स्पष्ट किया कि आंतरिक चर्चा के दौरान अलग-अलग राय होना सामान्य प्रक्रिया है और SIR समेत आयोग के अंतिम फैसले तीनों आयुक्तों की सहमति से लिए गए।
कांग्रेस नेताओं के अलग-अलग दावे
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने SIR के जरिए करीब 13 करोड़ नाम हटाए जाने का दावा किया। वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने 2023 के विधानसभा चुनाव और उसके बाद की चुनावी प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए।
कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी ने इसे संविधान और लोकतंत्र से जुड़ा मुद्दा बताया। पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने मध्य प्रदेश में SIR के दौरान 43 लाख वोट हटाए जाने का दावा किया। इन आंकड़ों और आरोपों को कांग्रेस नेताओं के दावों के रूप में देखा जाना चाहिए।
बैलेट पेपर और EVM पर भी बयान
पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल ने EVM की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग की। पूर्व केंद्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया ने भी EVM से चुनाव होने की स्थिति में बहिष्कार की बात कही।
वहीं विधायक आरिफ मसूद ने SIR के खिलाफ कांग्रेस के आंदोलन को जारी रखने की बात कही। सतना विधायक सिद्धार्थ कुशवाह ने भी मतदाता सूची में नाम हटाए जाने से जुड़े दावे किए और पुराने चुनावों का उदाहरण दिया।
इन नेताओं के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस खबर में नहीं की गई है।
अब SIR पर कांग्रेस का अगला कदम
भोपाल का प्रदर्शन कांग्रेस की उस व्यापक राजनीतिक मुहिम का हिस्सा है, जिसमें पार्टी SIR को लेकर चुनाव आयोग से पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रही है। दूसरी ओर चुनाव आयोग लगातार यह कह रहा है कि SIR समेत उसके फैसले निर्धारित संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया के तहत लिए गए हैं तथा अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से हुए हैं।
इसलिए विवाद का अगला बड़ा बिंदु अब मतदाता सूची में हुए बदलावों के आंकड़े, SIR की प्रक्रिया और उस पर उठ रहे कानूनी सवाल हैं।