इंदौर में अबॉर्शन किट का नेटवर्क 3 राज्यों तक फैला, कार्तिक केमिस्ट से शुरू हुई जांच ‘मोदी ब्रदर्स’ तक पहुंची; 20 हजार से ज्यादा किट जब्त
गर्भपात की दवाओं के बड़े स्टॉक की जांच अब सिर्फ एक मेडिकल स्टोर तक सीमित नहीं रही। दस्तावेजों और बिलों की पड़ताल में मध्य प्रदेश के साथ गुजरात और उत्तर प्रदेश की फर्मों के नाम सामने आए हैं, जिनका विभाग सत्यापन कर रहा है।

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इंदौर में दो महीने पहले सामने आए गर्भपात की दवाओं के बड़े स्टॉक ने अब लंबी सप्लाई चेन की जांच का रास्ता खोल दिया है। औषधि विभाग ने जब्त दस्तावेजों और बिलों को जोड़ते हुए पड़ताल आगे बढ़ाई तो जांच कार्तिक केमिस्ट से क्वॉलिटी फार्मा और फिर लसूड़िया मोरी स्थित मोदी ब्रदर्स तक पहुंच गई। दोनों जगहों से 20 हजार से अधिक अबॉर्शन किट जब्त होने के बाद अब अधिकारियों का फोकस इस बात पर है कि दवाएं किन फर्मों से खरीदी गईं और आगे कहां-कहां भेजी गईं।
कार्तिक केमिस्ट से खुली सप्लाई की पहली कड़ी
शुरुआती कार्रवाई इंदौर के मेडिकल स्टोर कार्तिक केमिस्ट से जुड़ी थी। यहां मिले दस्तावेजों और दवाओं की सप्लाई से संबंधित रिकॉर्ड की जांच के बाद विभाग ने उन फर्मों की जानकारी जुटानी शुरू की, जहां से स्टॉक आया था।
इसी दस्तावेजी पड़ताल में धार कोठी स्थित क्वॉलिटी फार्मा का नाम सामने आया। विभाग की टीम 25 सितंबर को वहां पहुंची। जांच में सामने आया कि फर्म के पास लाइसेंस मौजूद है, लेकिन रिकॉर्ड में दर्ज गोदाम से जुड़ी स्थिति और मौके पर मिले स्टॉक को लेकर सवाल खड़े हुए।
क्वॉलिटी फार्मा से 10 हजार से ज्यादा किट मिलीं
धार कोठी में की गई कार्रवाई के दौरान टीम ने करीब 10 हजार अबॉर्शन किट जब्त कीं। अधिकारियों ने दवाओं के साथ उपलब्ध बिल और अन्य रिकॉर्ड को भी जांच के दायरे में लिया।
इसके बाद क्वॉलिटी फार्मा के दस्तावेजों में मिली अगली कड़ी ने जांच को लसूड़िया मोरी स्थित मोदी ब्रदर्स तक पहुंचाया। विभाग ने 26 सितंबर को वहां भी दबिश दी।
मोदी ब्रदर्स में भी मिला बड़ा स्टॉक
मोदी ब्रदर्स के यहां जांच के दौरान करीब 10 हजार अबॉर्शन किट और बड़ी संख्या में ‘सेफ टी किट’ मिलने की जानकारी सामने आई। यहां स्टॉक लाइसेंस में दर्ज स्थान पर ही मिला, इसलिए विभाग की जांच का मुख्य फोकस अब खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड, बिलिंग और अधिकृत फर्मों को की गई सप्लाई पर है।
दोनों स्थानों से जब्त स्टॉक को मिलाकर संख्या 20 हजार से ज्यादा पहुंच गई है। अब अधिकारियों को यह पता करना है कि इतनी बड़ी मात्रा में दवाओं की खरीद किस स्तर पर हुई और इनकी आगे की सप्लाई किन माध्यमों से हुई।
तीन राज्यों की फर्में भी जांच के घेरे में
मोदी ब्रदर्स से मिले दस्तावेजों की जांच में मध्य प्रदेश के अलावा गुजरात और उत्तर प्रदेश की कुछ फर्मों के नाम सामने आने की जानकारी है। औषधि विभाग इन फर्मों से जुड़े रिकॉर्ड का सत्यापन कर रहा है।
जांच में यह देखा जा रहा है कि दस्तावेजों में दर्ज खरीद वास्तव में हुई थी या नहीं, भुगतान किस माध्यम से किया गया और संबंधित फर्मों ने आगे कितनी मात्रा में दवाएं भेजीं। जरूरत पड़ने पर इन फर्मों के रिकॉर्ड और स्टॉक का भी सत्यापन किया जा सकता है।
दो कंपनियों के उत्पाद, अलग-अलग बिलों की जांच
जांच के दौरान मिफेप्रिस्टोन और मिसोप्रोस्टोल के संयोजन वाली दवाएं सामने आई हैं। दोनों स्थानों पर मिली दवाओं के ब्रांड/निर्माता अलग बताए गए हैं।
क्वॉलिटी फार्मा में ग्लोबल इनिशिएटिव कंपनी का उत्पाद मिला, जिसकी बिलिंग दूसरे राज्य से हुई थी। वहीं मोदी ब्रदर्स से जननी कंपनी का उत्पाद मिला, जिसका रिकॉर्ड भी दूसरे राज्य से जुड़ा बताया गया है। अब विभाग इन बिलों और संबंधित कंपनियों के बीच हुए लेन-देन का मिलान कर रहा है।
रिकॉर्ड सही हैं या बिक्री छिपाई गई?
जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा खरीद और बिक्री के दस्तावेजों का मिलान करना है। विभाग यह देख रहा है कि रिकॉर्ड में दर्ज स्टॉक और वास्तविक रूप से मिले स्टॉक में कोई अंतर तो नहीं है।
इसके साथ यह भी जांची जा रही है कि खरीद की जितनी मात्रा दस्तावेजों में दर्ज है, उसकी बिक्री किसे और कितनी मात्रा में दिखाई गई। अगर रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में अंतर मिलता है तो संबंधित फर्म की भूमिका की अलग से जांच की जाएगी।
डॉक्टर की पर्ची वाली दवाओं की बिक्री पर नजर
मिफेप्रिस्टोन और मिसोप्रोस्टोल का संयोजन मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी में इस्तेमाल होता है। उपलब्ध नियामकीय जानकारी के अनुसार यह Schedule H के अंतर्गत आने वाली दवा है और इसे Registered Medical Practitioner के प्रिस्क्रिप्शन के आधार पर ही बेचा जाना चाहिए।
इसी वजह से विभाग यह भी पता लगा रहा है कि जब्त दवाएं अधिकृत सप्लाई चैन के जरिए किस तरह आगे पहुंचीं और क्या कहीं बिना निर्धारित प्रिस्क्रिप्शन के बिक्री हुई। जांच में मेडिकल स्टोर्स और अन्य संभावित खरीदारों से जुड़े रिकॉर्ड भी अहम हो सकते हैं।
अभी जांच जारी, आगे और नाम जुड़ सकते हैं
औषधि विभाग की पड़ताल फिलहाल दस्तावेजों और सप्लाई रिकॉर्ड के सत्यापन के चरण में है। अधिकारियों का फोकस पूरे नेटवर्क को जोड़ने पर है—दवा कहां से खरीदी गई, किस फर्म तक पहुंची और वहां से आगे किन दुकानों या लोगों को बेची गई।
जांच पूरी होने के बाद जिन फर्मों या व्यक्तियों की भूमिका सामने आएगी, उनके खिलाफ उपलब्ध रिकॉर्ड और नियमों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।