एक छोटी चिप के पीछे दौड़ रही दुनिया, भारत में 1.64 लाख करोड़ का दांव; Gen Z के लिए खुल रही टेक्नोलॉजी की नई राह
SEMICON India 2026 में भारत के तेजी से बनते सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम की तस्वीर सामने आई है। 12 प्रोजेक्ट्स में 1.64 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के निवेश प्रस्तावित हैं, जबकि डिजाइन, AI, EV और चिप पैकेजिंग जैसे क्षेत्रों में भी नए अवसर तैयार हो रहे हैं।

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जिस चिप को हम आंखों से ठीक से देख भी नहीं सकते, वही आज मोबाइल से लेकर कार, AI सर्वर और इलेक्ट्रिक व्हीकल तक की तकनीक का आधार बन चुकी है। दुनिया भर में सेमीकंडक्टर की मांग बढ़ने के साथ भारत भी इस रणनीतिक सेक्टर में अपनी जगह मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
नई दिल्ली में शुरू हुए SEMICON India 2026 में इसी बदलाव की झलक दिखाई दी। यहां सिर्फ चिप बनाने वाली फैक्ट्रियों की बात नहीं हो रही, बल्कि डिजाइन से लेकर मैन्युफैक्चरिंग, पैकेजिंग, टेस्टिंग, मशीनरी, AI और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी तक एक पूरा इकोसिस्टम तैयार करने की दिशा दिखाई गई।
इसका असर निवेश के साथ रोजगार, स्टार्टअप और तकनीकी कौशल पर भी पड़ सकता है। खासकर युवाओं के लिए चिप डिजाइन, इलेक्ट्रॉनिक्स, AI और EV टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में नए अवसर विकसित होने की संभावना है।
यशोभूमि में जुटा सेमीकंडक्टर सेक्टर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को नई दिल्ली के यशोभूमि में SEMICON India 2026 का उद्घाटन किया। 17 से 19 सितंबर तक चलने वाले इस आयोजन में सेमीकंडक्टर कंपनियों के अलावा निवेशक, स्टार्टअप, रिसर्चर और छात्र भी हिस्सा ले रहे हैं।
आयोजन में 600 से ज्यादा कंपनियों और 50 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों की भागीदारी बताई गई है। इस बार कार्यक्रम की थीम ‘Silicon to Systems: Building the Ecosystem’ रखी गई है।
यानी फोकस केवल सिलिकॉन वेफर या चिप निर्माण तक सीमित नहीं है। भारत ऐसी सप्लाई चेन तैयार करना चाहता है जिसमें डिजाइन, उत्पादन, पैकेजिंग, उपकरण और प्रशिक्षित मानव संसाधन सभी शामिल हों।
1.64 लाख करोड़ से ज्यादा के प्रोजेक्ट
भारत के सेमीकंडक्टर मिशन का सबसे बड़ा संकेत निवेश के आंकड़ों में दिखाई देता है। Semicon India Programme के तहत अब तक 12 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिलने की जानकारी दी गई है।
इन परियोजनाओं में 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश का प्रस्ताव है। इनमें चिप निर्माण के साथ पैकेजिंग और टेस्टिंग जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं।
Micron, Kaynes और CG Semi से जुड़े प्रोजेक्ट्स में कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू होने की जानकारी भी सामने आई है। इसका मतलब है कि सेक्टर में कुछ योजनाएं अब केवल प्रस्ताव या निर्माण के चरण में नहीं हैं, बल्कि उत्पादन तक पहुंच चुकी हैं।
सरकार ने अगले चरण के लिए Semicon 2.0 के तहत 1.27 लाख करोड़ रुपये के प्रावधान की जानकारी दी है। इसका लक्ष्य सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन के अलग-अलग हिस्सों को मजबूत करना है।
मोबाइल से मिली जमीन, अब चिप की बारी
भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पिछले एक दशक में तेजी से बदला है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2014-15 में देश में इलेक्ट्रॉनिक्स का उत्पादन करीब 1.9 लाख करोड़ रुपये था, जो 2025-26 में बढ़कर 13.11 लाख करोड़ रुपये हो गया।
मोबाइल फोन इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। भारत में इस्तेमाल होने वाले 99 प्रतिशत से ज्यादा मोबाइल फोन देश में बनाए जाने की जानकारी सरकार की ओर से दी गई है।
यही बढ़ता इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन अब सेमीकंडक्टर सेक्टर के लिए घरेलू बाजार तैयार कर रहा है। मोबाइल, टीवी, कंप्यूटर, कार और औद्योगिक उपकरणों में चिप की जरूरत होती है। इसलिए तैयार इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के साथ उनके अहम कंपोनेंट की घरेलू क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
Gen Z के लिए सिर्फ नौकरी नहीं, टेक्नोलॉजी का पूरा मैदान
सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री का विस्तार केवल फैक्ट्री में काम करने वाले कर्मचारियों की मांग नहीं बढ़ाता। इसमें चिप डिजाइन, इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग, AI, सॉफ्टवेयर, टेस्टिंग, ऑटोमेशन और रिसर्च जैसे कई क्षेत्र जुड़े हैं।
सरकार के मुताबिक, 24 सेमीकंडक्टर डिजाइन प्रोजेक्ट्स को वित्तीय सहायता के लिए मंजूरी मिली है। इसके अलावा 105 स्टार्टअप और MSME को EDA यानी Electronic Design Automation टूल्स तक पहुंच उपलब्ध कराई गई है।
EDA टूल्स का इस्तेमाल चिप के डिजाइन और टेस्टिंग में किया जाता है। इसका मतलब है कि युवा इंजीनियरों और टेक स्टार्टअप्स के लिए अवसर केवल बड़े मैन्युफैक्चरिंग प्लांट तक सीमित नहीं रहेंगे।
AI और EV बढ़ाएंगे चिप की जरूरत
AI के विस्तार ने सेमीकंडक्टर की अहमियत को और बढ़ा दिया है। ज्यादा शक्तिशाली AI सिस्टम के लिए हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग और विशेष प्रकार के प्रोसेसर की जरूरत होती है।
इलेक्ट्रिक व्हीकल भी चिप आधारित तकनीक पर तेजी से निर्भर हो रहे हैं। बैटरी मैनेजमेंट, मोटर कंट्रोल, सेंसर, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और ड्राइविंग सिस्टम में सेमीकंडक्टर की भूमिका होती है।
SEMICON India 2026 में Synchronous Drives & Inverters Private Limited ने इसी दिशा में अपना काम प्रदर्शित किया। कंपनी के फाउंडर दर्शन कुमार पंडित के मुताबिक, कंपनी EV हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, सेमीकंडक्टर और AI तकनीक पर काम कर रही है।
कंपनी ने IIT दिल्ली और SVNIT सूरत में विकसित किए जा रहे इलेक्ट्रिक व्हीकल सेमीकंडक्टर चिप के प्रोटोटाइप को भी कार्यक्रम में प्रदर्शित किया।
विदेशी कंपनियां भी तलाश रहीं भारतीय बाजार
भारत में बन रहे इस इकोसिस्टम पर विदेशी कंपनियों की भी नजर है। जर्मनी की KoCoS Technologies की भारतीय सब्सिडियरी पहली बार भारत में सेमीकंडक्टर सेक्टर से जुड़े इस तरह के आयोजन में शामिल हुई।
कंपनी के Patrick Zube ने बताया कि कंपनी भारतीय बाजार में नए ग्राहकों के साथ जुड़ने और यहां बढ़ रहे सेमीकंडक्टर कारोबार में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने भारतीय बाजार की संभावनाओं को लेकर उम्मीद जताई और भारत को भविष्य में ‘नया ताइवान’ बनने की संभावना वाला बाजार बताया। यह कंपनी के प्रतिनिधि की राय है, न कि भारत के भविष्य को लेकर कोई स्थापित निष्कर्ष।
असली मुकाबला चिप से आगे का है
भारत की मौजूदा रणनीति से संकेत मिलता है कि लक्ष्य सिर्फ चिप फैक्ट्री लगाना नहीं है। डिजाइन, निर्माण, पैकेजिंग, टेस्टिंग, मशीनरी, AI, EV और इलेक्ट्रॉनिक्स को एक-दूसरे से जोड़कर घरेलू वैल्यू चेन तैयार करने पर जोर है।
अगर ये परियोजनाएं तय योजनाओं के मुताबिक आगे बढ़ती हैं, तो इसका असर केवल निवेश आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगा। टेक्निकल स्किल, स्टार्टअप, रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े क्षेत्रों में भी गतिविधियां बढ़ सकती हैं।
SEMICON India 2026 इसी बदलाव का एक मंच है—जहां एक छोटे से चिप के पीछे भारत की बड़ी टेक्नोलॉजी महत्वाकांक्षा दिखाई दे रही है।

