LIVE
होम
क्रिएटर बाहर, ‘स्कैमर’ अंदर कैसे? Meta के Copyright Tool पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, Rights Manager की चाबी किसके हाथ
दिल्ली हाईकोर्ट ने Meta से Rights Manager की eligibility और कथित फर्जी copyright claims पर स्पष्टीकरण मांगा है।लोकस्वामी ग्राफिक्स
Tech
ई-पेपर

क्रिएटर बाहर, ‘स्कैमर’ अंदर कैसे? Meta के Copyright Tool पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, Rights Manager की चाबी किसके हाथ

Digital News DeskDigital News Desk4 min read12/08/26

दिल्ली हाईकोर्ट ने Meta के Rights Manager सिस्टम पर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि असली क्रिएटर्स को टूल का एक्सेस नहीं मिला, जबकि फर्जी दावों के जरिए उन्हीं के कंटेंट पर स्ट्राइक लगाई गई।

Lokswami AI

नई दिल्ली। सोचिए, वीडियो आपने बनाया, मेहनत आपकी लगी, ऑडियंस आपकी बनी... लेकिन एक दिन कोई दूसरा उसी कंटेंट को अपना बताकर आपके अकाउंट पर कॉपीराइट स्ट्राइक लगवा दे। और जिस सिस्टम से आपको अपनी रचना बचानी थी, उसकी पहुंच आपके पास ही न हो। दिल्ली हाईकोर्ट के सामने Meta के Rights Manager को लेकर कुछ ऐसा ही सवाल उठा है। अदालत ने कंपनी से पूछा है कि अगर असली क्रिएटर इस टूल तक नहीं पहुंच पा रहे तो कथित फर्जी अकाउंट इसका इस्तेमाल कैसे कर रहे हैं।

‘घर मालिक बाहर, चाबी चोर के पास’ जैसा सवाल

मामला कंटेंट क्रिएटर और बिजनेस कोच मोहित कुमार की याचिका से जुड़ा है। उनका आरोप है कि दूसरे लोगों ने उनके वीडियो डाउनलोड किए, उMeta Rights Managerन्हें अपने नाम से Rights Manager में दर्ज कराया और फिर उन्हीं के मूल अकाउंट पर कॉपीराइट स्ट्राइक भेजनी शुरू कर दी। सुनवाई के दौरान जस्टिस अनूप जयराम भंभानी ने Meta की व्यवस्था पर तीखा सवाल उठाते हुए स्थिति की तुलना ऐसी व्यवस्था से की, जिसमें असली मालिक को चाबी न मिले लेकिन गलत व्यक्ति अंदर पहुंच जाए।

तीन बार आवेदन, फिर भी नहीं मिला Rights Manager

मोहित कुमार की ओर से अदालत को बताया गया कि उन्होंने Meta Rights Manager का एक्सेस पाने के लिए तीन बार आवेदन किया, लेकिन हर बार अनुरोध खारिज हो गया। दूसरी ओर उनका आरोप है कि कथित स्कैमर्स उसी सिस्टम का उपयोग उनके खिलाफ कर रहे थे। कोर्ट ने Meta से यह बताने को कहा है कि Rights Manager देने की उसकी वास्तविक पात्रता क्या है और मोहित कुमार का आवेदन क्यों स्वीकार नहीं किया गया।

8 करोड़ Views से 3 लाख तक पहुंचने का दावा

याचिकाकर्ता की ओर से दावा किया गया कि कॉपीराइट स्ट्राइक की समस्या शुरू होने से पहले उनके कंटेंट को महीने में करीब 7 से 8 करोड़ Views मिलते थे। बाद में यह संख्या घटकर लगभग 3 लाख तक रह गई। यह आंकड़ा याचिकाकर्ता का दावा है, लेकिन इससे अदालत के सामने यह सवाल जरूर आया कि गलत स्ट्राइक किसी डिजिटल क्रिएटर की पहुंच और कमाई पर कितना बड़ा असर डाल सकती है।

Rights Manager आखिर करता क्या है?

Meta का Rights Manager ऐसा टूल है, जिसके जरिए अधिकार रखने वाला व्यक्ति अपने मूल वीडियो या दूसरे कंटेंट का डिजिटल संदर्भ सिस्टम में दर्ज कर सकता है। यदि वही या मिलता-जुलता कंटेंट किसी दूसरे अकाउंट से अपलोड होता है तो सिस्टम उसे पहचान सकता है और अधिकार धारक को ब्लॉक, मॉनिटर या दूसरी कार्रवाई के विकल्प देता है। विवाद इसी बात पर है कि अगर शुरुआती ownership claim ही गलत व्यक्ति के हाथ लग जाए तो वही सुरक्षा प्रणाली असली क्रिएटर के खिलाफ हथियार बन सकती है।

पुरानी पोस्ट को ‘नया पुराना’ बनाने का भी आरोप

दिल्ली हाईकोर्ट में आए दूसरे मामलों में यह आरोप भी लगाया गया है कि Facebook के ‘Edit Post’ फीचर का इस्तेमाल कर पुरानी पोस्ट में बाद में चोरी किया गया वीडियो जोड़ा जाता है। इससे रिकॉर्ड ऐसा दिखाई दे सकता है मानो कॉपी करने वाले ने वीडियो पहले पोस्ट किया था। इसी कथित loophole के जरिए असली कंटेंट मालिकों पर गलत कॉपीराइट दावे करने की शिकायतें अदालत तक पहुंची हैं।

Meta ने कहा—Verification के बाद ही मिलता है एक्सेस

Meta की ओर से अदालत में कहा गया कि Rights Manager हर व्यक्ति को अपने आप नहीं मिलता और इसके लिए verification प्रक्रिया होती है। कंपनी का तर्क है कि किसी विवाद में वास्तविक copyright owner कौन है, यह हमेशा तुरंत तय करना आसान नहीं होता। अब अदालत ने कंपनी से उसकी eligibility policy और access rules रिकॉर्ड पर रखने को कहा है।

पहले की स्ट्राइक हटाई गईं, लेकिन सवाल खत्म नहीं हुआ

Meta ने अदालत को बताया कि तकनीकी समीक्षा के बाद मोहित कुमार के खिलाफ लगी संबंधित strikes वापस ले ली गईं और उनका अकाउंट suspend नहीं किया गया था। लेकिन कोर्ट के सामने बड़ा सवाल सिर्फ एक अकाउंट का नहीं है। मुद्दा यह है कि सिस्टम में ऐसा रास्ता मौजूद है या नहीं, जिससे फर्जी दावेदार असली कंटेंट मालिक पर दबाव बना सके।

फर्जी Copyright Strike से वसूली का आरोप भी

दिल्ली हाईकोर्ट में Meta के copyright enforcement सिस्टम को लेकर अन्य क्रिएटर्स भी पहुंचे हैं। अलग-अलग याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि anonymous या fabricated identities के जरिए गलत copyright complaints डाली जाती हैं और अकाउंट प्रभावित होने के बाद पैसे मांगने की कोशिश होती है। एक मामले में अदालत ने Meta को संदिग्ध खातों की subscriber information और IP logs देने का निर्देश भी दिया था।

अब फैसला सिर्फ एक टूल का नहीं, Creator Economy के भरोसे का है

आज हजारों क्रिएटर्स की कमाई Facebook और Instagram की reach पर टिकी है। ऐसी स्थिति में गलत copyright strike केवल एक नोटिफिकेशन नहीं होती; उससे audience, revenue और वर्षों में बनाई गई डिजिटल पहचान प्रभावित हो सकती है। इसलिए अदालत में उठ रहा सवाल तकनीकी से ज्यादा बुनियादी है—कंटेंट की रक्षा के लिए बनाया गया सिस्टम असली मालिक की ढाल है या गलत हाथ में जाने पर उसी के खिलाफ हथियार बन सकता है?

संबंधित खबरें

आपकी स्क्रीन पर क्या दिखेगा, कौन तय करता है? सोशल मीडिया के ‘अदृश्य खेल’ पर सरकार सख्त, Meta से एल्गोरिदम का मांगा हिसाब
Tech

आपकी स्क्रीन पर क्या दिखेगा, कौन तय करता है? सोशल मीडिया के ‘अदृश्य खेल’ पर सरकार सख्त, Meta से एल्गोरिदम का मांगा हिसाब

फेसबुक और इंस्टाग्राम पर कौन-सी पोस्ट ज्यादा लोगों तक पहुंचेगी और कौन-सी पीछे रह जाएगी—सोशल मीडिया के इसी एल्गोरिदम को लेकर केंद्र सरकार की चिंता बढ़ी है। Meta की वैश्विक टीम से एल्गोरिदम और कंटेंट मॉडरेशन की कार्यप्रणाली समझी जा रही है। राजनीतिक और संवेदनशील कंटेंट, डीपफेक तथा बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री जैसे मामलों में सरकार ने केवल AI पर निर्भर रहने के बजाय मानव निगरानी बढ़ाने पर जोर दिया है।

पूरी खबर
फोन की बैटरी चुपचाप खाली कर रहे Google के ये ऐप्स! आज ही बदलें जरूरी सेटिंग्स
Tech

फोन की बैटरी चुपचाप खाली कर रहे Google के ये ऐप्स! आज ही बदलें जरूरी सेटिंग्स

स्मार्टफोन की बैटरी तेजी से खत्म होने की वजह हमेशा पुरानी बैटरी नहीं होती। Chrome, YouTube, Gmail, Google Maps और Google Home जैसे ऐप्स बैकग्राउंड सिंक, लोकेशन, वीडियो क्वालिटी और इंटरनेट के कारण अतिरिक्त पावर खर्च कर सकते हैं। कुछ सेटिंग्स बदलकर बैटरी बैकअप बेहतर किया जा सकता है।

पूरी खबर
भारत में AI का बूम 2026: स्टार्टअप्स को रिकॉर्ड फंडिंग, ग्लोबल टेक रेस में भारत आगे
Tech

भारत में AI का बूम 2026: स्टार्टअप्स को रिकॉर्ड फंडिंग, ग्लोबल टेक रेस में भारत आगे

भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेक्टर 2026 में तेज़ी से उभर रहा है। रिकॉर्ड निवेश, ग्लोबल पार्टनरशिप और विभिन्न इंडस्ट्री में बढ़ते उपयोग के कारण भारत अब दुनिया के प्रमुख AI हब बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

पूरी खबर
रसोई ने फिर बिगाड़ा बजट! जुलाई में महंगाई 4.45%, अदरक 83% और लहसुन 35% महंगा; आगे और बढ़ सकती है कीमत
Business

रसोई ने फिर बिगाड़ा बजट! जुलाई में महंगाई 4.45%, अदरक 83% और लहसुन 35% महंगा; आगे और बढ़ सकती है कीमत

जुलाई में देश की खुदरा महंगाई बढ़कर 4.45% पहुंच गई। सबसे ज्यादा दबाव खाने-पीने की चीजों से आया, जहां अदरक, लहसुन और प्याज की कीमतों ने आम घर का बजट बिगाड़ दिया।

पूरी खबर