
रूस ने भारत के पूर्व CJI चंद्रचूड़ पर लगाया ‘कानूनी दांव’, यूक्रेन से अरबों के विवाद में सौंपी बड़ी जिम्मेदारी
रूस ने पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ को यूक्रेन के सरकारी ओशचाडबैंक से जुड़े अंतरराष्ट्रीय निवेश विवाद में अपना आर्बिट्रेटर नियुक्त किया है। मामला युद्ध प्रभावित चार क्षेत्रों में बैंक की संपत्तियों से जुड़ा है।

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नई दिल्ली/मॉस्को। रूस और यूक्रेन की लड़ाई अब सिर्फ मिसाइलों, ड्रोन और मोर्चों तक सीमित नहीं है। युद्ध से बर्बाद हुई संपत्तियों का हिसाब अंतरराष्ट्रीय कानूनी मंचों तक पहुंच चुका है और ऐसे ही एक बड़े विवाद में रूस ने भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ पर भरोसा जताया है। उन्हें यूक्रेन के सरकारी बैंक ओशचाडबैंक की ओर से रूस के खिलाफ शुरू की गई अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता में रूसी पक्ष द्वारा आर्बिट्रेटर नियुक्त किया गया है।
चार इलाकों की संपत्ति, रूस से मांगा जा रहा हिसाब
इस नए विवाद की जड़ यूक्रेन के डोनेत्स्क, लुहांस्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया क्षेत्रों में मौजूद ओशचाडबैंक की संपत्तियां और कारोबारी गतिविधियां हैं। बैंक का आरोप है कि रूस की सैन्य कार्रवाई के कारण इन इलाकों में उसे अपनी महत्वपूर्ण संपत्तियों और संचालन का नुकसान उठाना पड़ा। ओशचाडबैंक ने 24 जुलाई 2025 को रूस को विवाद का नोटिस भेजा था। जवाब नहीं मिलने के बाद 7 अप्रैल 2026 को बैंक ने औपचारिक रूप से नई अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता प्रक्रिया शुरू कर दी।
चंद्रचूड़ अकेले नहीं, तीन दिग्गज करेंगे फैसला
यह मामला तीन सदस्यीय आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल के सामने चलेगा। कोस्टा रिका की पूर्व विदेश व्यापार मंत्री और अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थ डियाला जिमेनेज को ट्रिब्यूनल की अध्यक्षता के लिए चुना गया है। यूक्रेनी बैंक ने नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर के प्रोफेसर स्टावरोस ब्रेकोलाकिस को अपना आर्बिट्रेटर बनाया है, जबकि रूस की पसंद पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ हैं।
यहां एक बात महत्वपूर्ण है—चंद्रचूड़ रूस के वकील नहीं हैं। आर्बिट्रेटर के रूप में उनकी भूमिका स्वतंत्र और निष्पक्ष न्यायनिर्णायक की होती है। इसलिए इसे रूस का कानूनी प्रतिनिधित्व करने की बजाय रूस द्वारा ट्रिब्यूनल के लिए उनका चयन कहना अधिक सटीक है।
पहले भी रूस से भिड़ चुका है यही यूक्रेनी बैंक
कहानी का एक पुराना अध्याय भी है। क्रीमिया में संपत्ति के नुकसान को लेकर ओशचाडबैंक पहले भी रूस के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता में जा चुका है। उस मामले में ट्रिब्यूनल ने बैंक के पक्ष में फैसला देते हुए लगभग 1.11 अरब डॉलर का मुआवजा दिया था। ब्याज के साथ बैंक ने फरवरी 2026 में इसकी वसूली योग्य रकम 1.3 अरब डॉलर से अधिक बताई थी।
हालांकि मौजूदा विवाद को उसी पुराने क्रीमिया केस का अगला चरण समझना गलत होगा। नया दावा उन चार यूक्रेनी क्षेत्रों की संपत्तियों से जुड़ा है, जिन पर 2022 के बाद युद्ध का असर पड़ा।
पहले रूस के प्रस्तावों से बनाई थी दूरी
इस नियुक्ति को दिलचस्प बनाने वाला एक और पहलू है। रिपोर्ट के मुताबिक जस्टिस चंद्रचूड़ इससे पहले रूस से जुड़े अन्य निवेश-संधि विवादों में मध्यस्थ बनने के प्रस्ताव स्वीकार नहीं कर चुके थे। ऐसे में इस बार ओशचाडबैंक मामले में रूस की ओर से उनकी नियुक्ति अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता जगत में खास ध्यान खींच रही है।
अब लड़ाई जमीन की नहीं, नुकसान की कीमत तय करने की
रूस-यूक्रेन युद्ध ने शहर, उद्योग, बैंकिंग नेटवर्क और कारोबारी संपत्तियों पर भारी असर डाला है। अब इन्हीं नुकसानों को लेकर अंतरराष्ट्रीय कानूनी लड़ाइयां आगे बढ़ रही हैं। ओशचाडबैंक का नया दावा भी इसी बड़ी तस्वीर का हिस्सा है।
भारत के लिए इस मामले की दिलचस्पी अलग है। देश की सर्वोच्च अदालत का नेतृत्व कर चुके जस्टिस चंद्रचूड़ अब उस अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल में बैठेंगे, जहां रूस और यूक्रेन से जुड़े एक बड़े निवेश विवाद पर कानूनी फैसला होना है। युद्ध यूरोप की जमीन पर है, लेकिन उसकी कानूनी गूंज में अब भारत के पूर्व CJI का नाम भी शामिल हो गया है।




