एक मां को बचाने की जंग क्यों हार गया अस्पताल? रीवा में गर्भवती महिला और अजन्मे बच्चे की मौत, 4 पर गिरी गाज
रीवा के गांधी मेमोरियल अस्पताल में गर्भवती महिला और उसके अजन्मे बच्चे की मौत के बाद अस्पताल की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। परिवार की शिकायत के बाद दो डॉक्टरों और दो नर्सिंग अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। अब जांच समिति इलाज से लेकर अस्पताल स्टाफ के व्यवहार तक पूरे मामले की पड़ताल करेगी।

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कल्पना मिश्रा को अस्पताल लाया गया था, कुछ ही घंटों बाद वही उम्मीद मातम में बदल गई। इलाज के दौरान कल्पना की मौत हो गई और उनके अजन्मे बच्चे को भी नहीं बचाया जा सका।
मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। मौत के बाद परिवार ने अस्पताल में इलाज और स्टाफ के व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल उठाए। शिकायत सरकार तक पहुंची तो मामले में तत्काल कार्रवाई की गई। दो डॉक्टरों और दो नर्सिंग अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। अब जांच यह तय करेगी कि आखिर इलाज के दौरान कहां चूक हुई और परिवार के आरोपों में कितनी सच्चाई है।
अस्पताल पहुंचते समय ही बेहद गंभीर थी हालत
कल्पना मिश्रा को उनके पति अमित मिश्रा 28 अगस्त की सुबह करीब 2:38 बजे गांधी मेमोरियल अस्पताल लेकर पहुंचे थे। वह हटवा गांव की रहने वाली थीं।
मेडिकल रिकॉर्ड के मुताबिक, अस्पताल पहुंचने के समय उनका प्लेटलेट काउंट करीब 30 हजार था। ब्लड प्रेशर काफी बढ़ा हुआ था और लिवर एंजाइम भी सामान्य से अधिक पाए गए थे।
डॉक्टरों के अनुसार उनकी स्थिति गंभीर प्री-एक्लेम्पसिया, थ्रोम्बोसाइटोपेनिया और HELLP सिंड्रोम से जुड़ी थी। यानी गर्भावस्था के दौरान मां के शरीर में ऐसी गंभीर जटिलताएं थीं, जिनमें तत्काल और बेहद सावधानी से इलाज की जरूरत होती है।
करीब 21 घंटे बाद घर में नहीं, गांव में पहुंचा मातम
कल्पना को भर्ती कराने के करीब 21 घंटे बाद रात 11:55 बजे उनकी मौत हो गई। उनके साथ उनका अजन्मा बच्चा भी नहीं बच सका।
एक तरफ परिवार अपने होने वाले बच्चे के आने की तैयारी कर रहा था, दूसरी तरफ कुछ ही घंटों में उसे मां और बच्चे दोनों की मौत की खबर मिल गई।
घटना के बाद परिजनों ने इलाज में लापरवाही और अस्पताल में उनके साथ किए गए व्यवहार को लेकर शिकायत की। इसी शिकायत ने अब पूरे मामले की जांच का रास्ता खोल दिया है।
चार लोगों पर हुई कार्रवाई, लेकिन असली जवाब जांच के बाद
सरकार ने प्रथम दृष्टया कार्रवाई करते हुए प्रसूति एवं स्त्रीरोग विभाग की डॉक्टर सोनल अग्रवाल और एनेस्थीसिया विभाग की डॉक्टर निधि पांडे को निलंबित कर दिया।
दो नर्सिंग अधिकारियों पर भी परिवार के साथ कथित दुर्व्यवहार के आरोपों के बाद कार्रवाई की गई है।
हालांकि, यह कार्रवाई अंतिम निष्कर्ष नहीं है। असली सवाल अब जांच समिति की रिपोर्ट से जुड़े हैं—क्या महिला की गंभीर हालत के मुताबिक हर जरूरी कदम समय पर उठाया गया था? क्या इलाज के दौरान मेडिकल प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन हुआ? और क्या परिवार के साथ अस्पताल में ऐसा व्यवहार हुआ, जिसकी शिकायत उन्होंने की?
सरकार ने कहा- इलाज में लापरवाही बर्दाश्त नहीं
मामले में उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने अधिकारियों को निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि मरीजों की सुरक्षा और निर्धारित चिकित्सा प्रोटोकॉल का पालन सरकार की प्राथमिकता है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जांच में अगर किसी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यानी चार लोगों का निलंबन फिलहाल इस मामले का आखिरी पड़ाव नहीं है। जांच रिपोर्ट के बाद कार्रवाई का दायरा बढ़ भी सकता है।
अब एक मेडिकल फाइल बताएगी पूरी कहानी
मामले की जांच के लिए वरिष्ठ डॉक्टरों की समिति बनाई गई है। समिति मेडिकल रिकॉर्ड, इलाज के दौरान उठाए गए कदम और अस्पताल की प्रक्रिया की जांच करेगी।
इसके अलावा परिवार द्वारा लगाए गए दुर्व्यवहार के आरोप भी जांच के दायरे में हैं। महिला की मौत के बाद पोस्टमार्टम भी कराया गया है, जिसकी रिपोर्ट भी जांच में अहम मानी जाएगी।
परिवार को उम्मीद है कि जांच से यह साफ होगा कि कल्पना की मौत केवल उनकी गंभीर मेडिकल स्थिति का नतीजा थी या इलाज के दौरान कोई ऐसी चूक हुई, जिसने हालात को और बिगाड़ दिया।
मां और बच्चे को अंतिम विदाई
परिवार की मांग पर रीवा जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज की संयुक्त टीम ने कल्पना और उनके अजन्मे बच्चे का पोस्टमार्टम किया।
औपचारिकताएं पूरी होने के बाद शवों को उनके पैतृक गांव भेज दिया गया।
अब इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल सिर्फ यह नहीं है कि मां और बच्चे की जान क्यों नहीं बच सकी। सवाल यह भी है कि अगर इलाज के दौरान कोई चूक हुई थी, तो वह कहां हुई और उसकी जिम्मेदारी किसकी थी।
इसका जवाब जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा।
