लाल किला धमाके की 7,500 पन्नों की चार्जशीट में बड़ा दावा, 588 गवाहों से जुड़ी जांच; NIA ने खोली आतंकी साजिश की परतें
नवंबर 2025 में लाल किले के पास हुए कार बम धमाके की जांच में NIA ने 11 आरोपियों के खिलाफ करीब 7,500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। चार्जशीट में 588 मौखिक गवाह, 395 से अधिक दस्तावेज और 200 से ज्यादा जब्त सामग्रियों को साक्ष्य के तौर पर शामिल किया गया है। एजेंसी ने धमाके को कथित आतंकी साजिश से जोड़ते हुए कई राज्यों में की गई जांच और वैज्ञानिक साक्ष्यों का भी उल्लेख किया है।

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लाल किले के पास हुए उस धमाके की जांच अब एक ऐसे मुकाम पर पहुंच गई है, जहां सिर्फ धमाके की तस्वीर नहीं, बल्कि उसके पीछे की कथित पूरी साजिश का खाका सामने आया है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA ने मामले में करीब 7,500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। इसमें 11 आरोपियों के खिलाफ जुटाए गए सबूत, गवाहों के बयान, दस्तावेज और जब्त सामग्री का विस्तृत ब्यौरा दिया गया है।
शनिवार को राउज एवेन्यू स्थित विशेष NIA अदालत ने चार्जशीट पर संज्ञान लिया। एजेंसी के मुताबिक, जांच दिल्ली तक सीमित नहीं रही, बल्कि जम्मू-कश्मीर से लेकर हरियाणा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात तक अलग-अलग कड़ियों को खंगाला गया।
7,500 पन्नों में क्या-क्या है?
NIA की चार्जशीट में 588 मौखिक गवाहों के बयान शामिल किए गए हैं। इसके अलावा 395 से ज्यादा दस्तावेज और 200 से अधिक जब्त सामग्रियों को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है।
यानी एजेंसी ने मामले को सिर्फ प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर नहीं रखा, बल्कि दस्तावेजी, तकनीकी और फोरेंसिक सबूतों को भी अपनी कहानी का आधार बनाया है।
जांच के दौरान DNA प्रोफाइलिंग, फिंगरप्रिंट और वॉयस एनालिसिस जैसी वैज्ञानिक तकनीकों का इस्तेमाल किए जाने की बात भी चार्जशीट में कही गई है।
धमाके में मारे गए उमर उन नबी को लेकर बड़ा दावा
NIA ने चार्जशीट में डॉ. उमर उन नबी को कथित साजिश का मुख्य आरोपी बताया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, वैज्ञानिक और फोरेंसिक जांच के जरिए धमाके में मारे गए डॉ. उमर उन नबी की पहचान स्थापित हुई।
चूंकि उसकी मौत हो चुकी है, इसलिए उसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही समाप्त करने का प्रस्ताव भी चार्जशीट में रखा गया है।
11 आरोपियों पर किन कानूनों के तहत केस?
NIA ने 11 आरोपियों के खिलाफ UAPA, भारतीय न्याय संहिता, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, आर्म्स एक्ट और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से संबंधित कानूनों के तहत आरोप लगाए हैं।
चार्जशीट में आमिर राशिद मीर, जसीर बिलाल वानी, डॉ. मुजम्मिल शकील, डॉ. अदील अहमद राथर, डॉ. शाहीन सईद, मुफ्ती इरफान अहमद वागे, सोयब, डॉ. बिलाल नसीर मल्ला और यासिर अहमद डार समेत अन्य आरोपियों के नाम शामिल किए गए हैं।
एजेंसी के अनुसार, मामले में एक आरोपी अभी फरार है।
NIA को क्यों लगा कि यह सिर्फ धमाका नहीं था?
जांच एजेंसी ने लाल किले के पास हुए विस्फोट को एक बड़े कथित आतंकी षड्यंत्र से जोड़ते हुए कई कड़ियां सामने रखी हैं।
NIA के मुताबिक, धमाके में हाई-इंटेंसिटी वाहन आधारित IED का इस्तेमाल किया गया था। चार्जशीट में TATP विस्फोटक के इस्तेमाल के भी सबूत मिलने का दावा किया गया है।
एजेंसी का आरोप है कि विस्फोटक तैयार करने को लेकर कथित तौर पर कई प्रयोग किए गए थे। जांच में हथियार और गोला-बारूद जुटाने से जुड़े इनपुट मिलने की बात भी कही गई है।
हथियारों से लेकर IED प्रयोग तक जांच
चार्जशीट में NIA ने कथित तौर पर हथियारों की खरीद और विस्फोटक उपकरणों से जुड़े प्रयोगों का भी उल्लेख किया है।
जांच एजेंसी के अनुसार, AK-47, क्रिनकोव राइफल और देसी पिस्तौल जैसे हथियारों की कथित अवैध खरीद से जुड़े संकेत मिले। इसके अलावा रॉकेट आधारित और ड्रोन से संचालित IED से जुड़े प्रयोगों का भी चार्जशीट में जिक्र है।
इन सभी तथ्यों को एजेंसी ने कथित साजिश की व्यापक कड़ी के रूप में पेश किया है।
जांच कश्मीर से दिल्ली और कई राज्यों तक पहुंची
इस मामले की जांच का दायरा काफी बड़ा रहा। NIA ने जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली-NCR में कार्रवाई की।
अलग-अलग जगहों से मिले दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, गवाहों के बयान और जब्त सामग्री को आपस में जोड़कर एजेंसी ने कथित नेटवर्क की तस्वीर तैयार करने की कोशिश की।
यही वजह है कि चार्जशीट हजारों पन्नों तक पहुंची है।
चार्जशीट में कथित ‘जिहादी साजिश’ का भी जिक्र
NIA ने अपनी चार्जशीट में आरोपियों के कथित आतंकी नेटवर्क का भी उल्लेख किया है। एजेंसी के मुताबिक, कुछ आरोपी अंसर गजवत-उल-हिंद यानी AGuH से जुड़े थे, जिसे NIA ने AQIS से संबद्ध संगठन बताया है।
जांच एजेंसी का दावा है कि वर्ष 2022 में श्रीनगर में हुई एक कथित गुप्त बैठक में संगठन को ‘AGuH Interim’ के तौर पर पुनर्गठित करने की कोशिश की गई थी।
NIA ने इन गतिविधियों को कथित व्यापक आतंकी साजिश से जोड़कर देखा है।
‘ऑपरेशन हेवनिली हिंद’ की कहानी क्या है?
चार्जशीट का एक और अहम हिस्सा कथित ‘ऑपरेशन हेवनिली हिंद’ से जुड़ा है।
NIA का आरोप है कि इस कथित अभियान का उद्देश्य लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार को हटाकर शरिया आधारित शासन स्थापित करना था।
एजेंसी ने इस दावे को लाल किले धमाका मामले की कथित व्यापक साजिश की जांच के संदर्भ में रखा है।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि चार्जशीट में लगाए गए आरोप अभी न्यायिक परीक्षण के अधीन हैं। आरोपों को अदालत में साबित किया जाना बाकी है और अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
अब आगे क्या होगा?
चार्जशीट पर विशेष NIA अदालत के संज्ञान लेने के बाद मामले की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। अब अदालत के सामने एजेंसी की ओर से पेश किए गए गवाहों, दस्तावेजों, फोरेंसिक रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों की कानूनी जांच होगी।
7,500 पन्नों की इस चार्जशीट ने मामले को एक नए चरण में पहुंचा दिया है। जांच एजेंसी ने जिस तरह अलग-अलग राज्यों, तकनीकी सबूतों और कथित आतंकी नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ा है, उससे अब अदालत में यह तय होना बाकी है कि इनमें से कौन-से आरोप और सबूत कानूनी कसौटी पर खरे उतरते हैं।


