आरा के VIP होटल पर अब नगर निगम की नजर! G+2 की जगह G+4 निर्माण का आरोप, सील के बाद खुलेंगे पुराने राज
आरा के जिस VIP होटल में देह व्यापार का मामला सामने आने के बाद कार्रवाई हुई, अब उसी भवन का निर्माण भी जांच के घेरे में है। नगर निगम के रिकॉर्ड और मौके की स्थिति में अंतर की जांच की जा रही है। आरोप है कि G+2 की अनुमति के बावजूद भवन को G+4 तक बनाया गया। निगम अब नक्शा, निर्माण की मंजूरी, संपत्ति कर और भवन के वास्तविक उपयोग से जुड़े रिकॉर्ड खंगाल रहा है।

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बिहार। आरा के एक VIP होटल पर कार्रवाई के बाद मामला अब सिर्फ देह व्यापार के आरोपों तक सीमित नहीं रह गया है। होटल जिस इमारत में संचालित हो रहा था, उसके निर्माण और इस्तेमाल को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं। नगर निगम की जांच में यह देखा जा रहा है कि जिस भवन को जितनी मंजिलों की अनुमति मिली थी, क्या वास्तव में उतना ही निर्माण हुआ है या नियमों को दरकिनार कर इमारत को और ऊंचा कर दिया गया।
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, भवन के लिए G+2 निर्माण की अनुमति होने की बात सामने आ रही है, जबकि मौके पर G+4 तक निर्माण किए जाने का आरोप है। अब नगर निगम पुराने रिकॉर्ड और मौके की स्थिति का मिलान कर रहा है।
होटल सील हुआ तो खुलने लगी भवन की फाइल
VIP होटल में देह व्यापार के मामले के बाद जब संबंधित भवन की फाइलों की जांच शुरू हुई, तो निर्माण से जुड़े कई सवाल सामने आए।
नगर निगम अब यह पता लगाने में जुटा है कि भवन निर्माण के समय कौन सा नक्शा स्वीकृत हुआ था, कितनी मंजिलों की अनुमति दी गई थी और मौके पर बनी इमारत उसी स्वीकृति के मुताबिक है या नहीं।
यानी अब जांच का सवाल सिर्फ यह नहीं है कि होटल के भीतर क्या गतिविधियां चल रही थीं, बल्कि यह भी है कि जिस इमारत में यह सब चल रहा था, वह खुद कितनी वैध है।
G+2 की अनुमति, G+4 निर्माण का आरोप
भवन मालिक प्रहलाद गुप्ता उर्फ शिशु गुप्ता के नाम से जुड़े इस भवन को लेकर आरोप है कि नगर निगम के नियमों के मुताबिक यहां G+2 तक निर्माण की अनुमति थी।
इसके बावजूद भवन को G+4 तक बनाए जाने की बात सामने आई है।
अगर जांच में यह आरोप सही पाया जाता है तो अतिरिक्त मंजिलों के निर्माण को लेकर नगर निगम भवन मालिक के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई कर सकता है। फिलहाल निगम की टीम दस्तावेजों और वास्तविक निर्माण की स्थिति का मिलान कर रही है।
नक्शा पास था या सिर्फ मंजिलें बढ़ती गईं?
नगर निगम के सामने अब एक और बड़ा सवाल भवन के स्वीकृत नक्शे को लेकर है।
अधिकारी यह जांच रहे हैं कि निर्माण शुरू होने से पहले विधिवत नक्शा स्वीकृत कराया गया था या नहीं। अगर नक्शा स्वीकृत था तो उसकी शर्तों का पालन हुआ या नहीं, इसकी भी जांच होगी।
यही जांच यह तय करेगी कि भवन की अतिरिक्त मंजिलें नियमों के तहत बनीं या बिना अनुमति के निर्माण कराया गया।
आवासीय रिकॉर्ड, लेकिन अंदर चल रहा था कारोबार?
जांच का एक अहम हिस्सा भवन के वास्तविक इस्तेमाल से जुड़ा है।
आरोप है कि भवन में होटल, दुकान और दूसरी व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने के बावजूद रिकॉर्ड में इसका उपयोग आवासीय श्रेणी में दिखाया गया। नगर निगम अब संपत्ति कर से जुड़े दस्तावेजों के साथ यह भी देख रहा है कि भवन का इस्तेमाल किस उद्देश्य के लिए दर्ज है और जमीन मालिक के नाम से किस तरह की रसीदें जारी हुई हैं।
अगर रिकॉर्ड और मौके पर इस्तेमाल में अंतर मिलता है तो संपत्ति कर और भवन उपयोग से जुड़े नियमों के तहत भी कार्रवाई की स्थिति बन सकती है।
सिर्फ VIP होटल नहीं, दूसरे भवन भी जांच के दायरे में
VIP होटल की जांच के साथ नगर निगम की नजर शहर की दूसरी इमारतों पर भी जा सकती है।
खास तौर पर ऐसे भवनों की जांच की जा सकती है, जिन्हें रिकॉर्ड में आवासीय बताया गया है, लेकिन वहां होटल, रेस्टोरेंट, दुकान, मॉल या अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने की शिकायत है।
इस कार्रवाई का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं भवन मालिक नियमों और कर व्यवस्था से बचने के लिए भवन का वास्तविक उपयोग अलग तरीके से तो नहीं दिखा रहे।
पानी की टंकी वाली जमीन पर भी सवाल
इस भवन को लेकर स्थानीय स्तर पर एक और दावा चर्चा में है। बताया जा रहा है कि जिस स्थान पर पहले राहगीरों के लिए नगर निगम की पानी की टंकी थी, उसी जगह पर बाद में निर्माण कर भवन विकसित किया गया।
हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। नगर निगम अब यह भी देख सकता है कि जमीन का पुराना रिकॉर्ड क्या था और वर्तमान निर्माण किस आधार पर हुआ।
जांच के बाद तय होगी कार्रवाई
नगर आयुक्त अंजू कुमारी के मुताबिक, संबंधित भवन की फाइल, नक्शा स्वीकृति, संपत्ति कर और भवन के वास्तविक उपयोग से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
उनके अनुसार, जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि निर्माण और व्यावसायिक इस्तेमाल में किन नियमों का उल्लंघन हुआ है। इसके बाद उसी के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
अब इस पूरे मामले में नजर इस बात पर है कि नगर निगम की जांच में VIP होटल की इमारत को लेकर क्या सामने आता है। अगर G+4 निर्माण और नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो देह व्यापार के मामले के बाद इस भवन पर नगर निगम की कार्रवाई एक नया मोड़ ले सकती है।


