ईरान ने दिखाया सुप्रीम लीडर का नया वीडियो, जिंदा होने का दावा मजबूत; लेकिन तारीख गायब होने से सवाल बरकरार
ईरान ने सुप्रीम लीडर मोजतबा अली खामेनेई का एक नया वीडियो जारी किया है, जिसमें वह धार्मिक अध्ययन सत्र में एक छात्र की थीसिस सुनते और उस पर अपनी राय देते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में उनकी आवाज भी पहली बार सुनाई दे रही है। हालांकि, फुटेज के साथ तारीख नहीं बताई गई है, इसलिए इसकी ताजगी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

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तेहरान। ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा अली खामेनेई को लेकर लंबे समय से चल रही अटकलों के बीच तेहरान ने अब एक ऐसा वीडियो सामने रखा है, जिसे उनकी मौजूदगी का सबूत बताया जा रहा है। वीडियो में 56 वर्षीय मोजतबा खामेनेई एक धार्मिक अकादमिक सत्र में बैठे दिखाई देते हैं। वह एक छात्र की थीसिस सुनते हैं और बाद में उसके काम पर अपनी टिप्पणी भी करते हैं।
वीडियो में सबसे अहम बात उनकी आवाज है। युद्ध शुरू होने के बाद से मोजतबा खामेनेई सार्वजनिक तौर पर नजर नहीं आए हैं और उनकी आवाज की कोई नई रिकॉर्डिंग भी सामने नहीं आई थी। ऐसे में ईरानी मीडिया की ओर से जारी यह फुटेज उनकी स्थिति को लेकर चल रही अटकलों के बीच काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
लेकिन तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं हुई है। वीडियो कब रिकॉर्ड किया गया था, इसकी तारीख नहीं बताई गई है। यही वजह है कि अब एक नया सवाल खड़ा हो गया है—क्या यह हाल का वीडियो है या पहले रिकॉर्ड की गई पुरानी फुटेज?
पहली बार आवाज के साथ सामने आए मोजतबा
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी फार्स ने यह वीडियो साझा किया है। फुटेज में मोजतबा खामेनेई धार्मिक अध्ययन से जुड़े एक सत्र की अध्यक्षता करते दिखाई देते हैं।
वह एक छात्र की थीसिस प्रस्तुति सुनते हैं और उसके बाद उसके अकादमिक काम पर अपनी राय रखते नजर आते हैं। यानी वीडियो में सिर्फ उनकी मौजूदगी दिखाई नहीं देती, बल्कि उन्हें बातचीत करते हुए भी सुना जा सकता है।
यही वजह है कि इस फुटेज को ईरानी पक्ष की ओर से महज तस्वीर दिखाने के बजाय उनकी सक्रियता का संकेत देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
युद्ध के बाद से सार्वजनिक नजरों से दूर
मोजतबा खामेनेई के सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आने के कारण उनकी सेहत और स्थिति को लेकर लगातार अटकलें लगती रही हैं। युद्ध के दौरान भी उनकी कोई ऐसी सार्वजनिक मौजूदगी सामने नहीं आई थी, जिससे उनकी स्थिति को लेकर उठ रहे सवाल पूरी तरह खत्म हो सकें।
अब ईरान ने वीडियो जारी कर यह संदेश देने की कोशिश की है कि सुप्रीम लीडर सक्रिय हैं और धार्मिक-अकादमिक गतिविधियों में हिस्सा ले रहे हैं।
वीडियो सामने आने के बाद ईरानी पक्ष के लिए यह राजनीतिक और रणनीतिक तौर पर भी महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि लंबे समय से उनकी सार्वजनिक अनुपस्थिति को लेकर सवाल उठ रहे थे।
लेकिन वीडियो की तारीख क्यों नहीं बताई?
फुटेज में मोजतबा खामेनेई की मौजूदगी और आवाज तो दिखाई-सुनाई दे रही है, लेकिन सबसे अहम जानकारी गायब है—वीडियो कब बनाया गया था।
यही कमी इस पूरे दावे पर सबसे बड़ा सवाल खड़ा करती है। अगर वीडियो हाल का है तो यह उनकी मौजूदा स्थिति का महत्वपूर्ण प्रमाण हो सकता है। लेकिन अगर फुटेज पुरानी है, तो इससे वर्तमान समय में उनके जिंदा और सक्रिय होने की पुष्टि नहीं होती।
इसी वजह से वीडियो सामने आने के बाद चर्चा सिर्फ इस बात पर नहीं है कि उसमें कौन दिखाई दे रहा है, बल्कि इस पर भी है कि फुटेज रिकॉर्ड कब की गई थी।
ईरान को आखिर वीडियो जारी करने की जरूरत क्यों पड़ी?
किसी बड़े नेता की सार्वजनिक मौजूदगी लंबे समय तक दिखाई न देने पर अफवाहों को जगह मिलना स्वाभाविक है। मोजतबा खामेनेई के मामले में भी यही हुआ। उनकी गैरमौजूदगी के बीच उनकी सेहत को लेकर कई तरह के दावे सामने आते रहे।
ऐसे माहौल में ईरान का यह वीडियो जारी करना एक स्पष्ट संदेश देने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है—कि सुप्रीम लीडर मौजूद हैं और काम कर रहे हैं।
हालांकि, किसी वीडियो को मौजूदा समय का प्रमाण मानने के लिए उसकी तारीख और संदर्भ महत्वपूर्ण होते हैं। फिलहाल यही जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
अब असली सवाल वीडियो से ज्यादा उसकी तारीख का
ईरान की ओर से जारी फुटेज ने एक सवाल का जवाब देने की कोशिश जरूर की है, लेकिन साथ ही दूसरा सवाल और बड़ा कर दिया है। वीडियो में मोजतबा खामेनेई की आवाज और मौजूदगी दिख रही है, लेकिन यह तय नहीं है कि यह दृश्य कब का है।
इसलिए फिलहाल इतना कहा जा सकता है कि ईरान ने मोजतबा खामेनेई की मौजूदगी का एक नया वीडियो सामने रखा है। लेकिन उनकी मौजूदा स्थिति की स्वतंत्र और पुख्ता पुष्टि के लिए वीडियो की तारीख और अन्य स्वतंत्र प्रमाण महत्वपूर्ण होंगे।
यानी तेहरान ने सबूत तो पेश किया है, लेकिन वीडियो की तारीख अब इस पूरी कहानी की सबसे बड़ी कड़ी बन गई है।
