'प्लेबॉय जॉब' के नाम पर ठगी, राजस्थान में 11 गिरफ्तार
फर्जी महिला प्रोफाइल, वीआईपी क्लाइंट का लालच और रजिस्ट्रेशन फीस के नाम पर ठगी। राजस्थान के भीम कस्बे में साइबर फ्रॉड गैंग के 11 सदस्य गिरफ्तार, 20 फोन और 3 पीओएस मशीनें बरामद।

Audio tools for this article
फर्जी लड़की की तस्वीर, "वीआईपी क्लाइंट" का सपना और महीने में हजारों रुपये कमाने का झांसा। यही वो जाल था जिसमें राजस्थान के भीम कस्बे में दर्जनों युवा फंसते चले गए। पुलिस के मुताबिक टेलीग्राम और स्नैपचैट पर महिलाओं के नाम से चलाई जा रही फर्जी प्रोफाइलों ने युवकों को "प्लेबॉय जॉब" का ऑफर देकर पहले भरोसा जीता, फिर रजिस्ट्रेशन फीस के नाम पर पैसे ऐंठने शुरू कर दिए। अब इस मामले में पुलिस ने 11 लोगों को गिरफ्तार किया है, और जांच में सामने आए 20 मोबाइल फोन और 3 पीओएस मशीनें इस पूरे रैकेट की परतें खोलने की कड़ी बन सकती हैं।
कहां और कैसे हुई गिरफ्तारी
पुलिस के अनुसार यह पूरा ऑपरेशन 6 सितंबर को राजस्थान के भीम कस्बे के धर्मेशपुरी इलाके में अंजाम दिया गया। सूचना मिलने पर एक विशेष टीम ने इलाके की घेराबंदी की और एक कार के साथ मौजूद 11 युवकों को हिरासत में लिया। फोन और अन्य सामान की जांच के बाद पुलिस को कथित रैकेट से जुड़े सबूत मिले, जिसके आधार पर सभी को गिरफ्तार किया गया।
मौके से 20 स्मार्टफोन, कई एटीएम और डेबिट कार्ड, तीन पीओएस मशीनें और एक कार बरामद की गई है।
फर्जी प्रोफाइल और वीआईपी क्लाइंट का झांसा
पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने इंटरनेट से महिलाओं की तस्वीरें और नाम लेकर सोशल मीडिया पर फर्जी अकाउंट बनाए। इन प्रोफाइलों को टेलीग्राम, स्नैपचैट और अन्य प्लेटफॉर्म पर ऑपरेट किया जा रहा था, ताकि युवकों से संपर्क साधा जा सके।
इन अकाउंट्स के जरिए "मेल एस्कॉर्ट" या "प्लेबॉय जॉब" जैसे मौकों का प्रस्ताव दिया जाता था, जिसमें अमीर या वीआईपी महिला क्लाइंट्स तक पहुंच और पार्ट टाइम काम से मोटी कमाई का लालच दिया जाता था।
जांच में अब तक यह साबित नहीं हुआ है कि कोई असली एस्कॉर्ट जॉब या क्लाइंट मौजूद था। धोखाधड़ी इसी वादे के जरिए पैसे ऐंठने में थी।
रजिस्ट्रेशन फीस से शुरू, फिर बार-बार मांग
पुलिस के हवाले से सामने आया पैटर्न एडवांस फीस फ्रॉड का क्लासिक तरीका है। पीड़ित से पहले रजिस्ट्रेशन चार्ज मांगा जाता, फिर सिक्योरिटी डिपॉजिट, कमीशन या किसी और औपचारिकता के नाम पर और पैसे मांगे जाते।
हर पेमेंट को अगले कदम के लिए जरूरी बताया जाता था, जिससे पीड़ित एक के बाद एक किस्त भेजता चला जाता। कुल कितनी रकम ठगी गई या कितने पीड़ित हैं, इसकी पुष्टि अभी पुलिस ने नहीं की है।
20 फोन, 3 पीओएस मशीनें जांच के दायरे में
बरामद स्मार्टफोन जांच एजेंसियों को उन अकाउंट्स तक पहुंचाने में मदद कर सकते हैं जिनसे पीड़ितों से संपर्क किया गया था। चैट हिस्ट्री, लॉगिन डिटेल्स और पेमेंट मैसेज हर आरोपी की भूमिका तय करने में अहम होंगे।
तीन पीओएस मशीनें और बैंक कार्ड आर्थिक जांच के लिहाज से सबसे अहम कड़ी हैं। पीओएस मशीन का इस्तेमाल आमतौर पर व्यापारी कार्ड पेमेंट लेने के लिए करते हैं, इसलिए इनकी मौजूदगी अपने आप में धोखाधड़ी साबित नहीं करती। जांच एजेंसियों को यह पता लगाना होगा कि इन डिवाइसों और खातों से जुड़े ट्रांजैक्शन का पीड़ितों की रकम से क्या संबंध है।
बड़े नेटवर्क की तलाश, केस दर्ज
पुलिस के मुताबिक इस मामले में भारतीय न्याय संहिता और आईटी एक्ट की धारा 66डी के तहत केस दर्ज किया गया है। धारा 66डी ऑनलाइन पहचान का गलत इस्तेमाल कर धोखाधड़ी करने से जुड़ी है। हालांकि बीएनएस की सटीक धाराओं की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि क्या इस रैकेट से जुड़े और लोग बैंक खाते मुहैया करा रहे थे या फर्जी प्रोफाइल चला रहे थे। हालांकि जब तक पुलिस पुष्टि नहीं करती, किसी बड़े नेटवर्क की बात कयास ही मानी जाएगी।
