कोटा में 40 फीट ऊंचे पेड़ पर चढ़ा लेपर्ड, 5वीं कोशिश में लगा डार्ट; साढ़े 3 घंटे चला रेस्क्यू
कोटा के छत्र विलास पार्क में मंगलवार सुबह एक लेपर्ड के 40 फीट ऊंचे जामुन के पेड़ पर चढ़ जाने से वन विभाग की टीम को रेस्क्यू ऑपरेशन करना पड़ा। चार कोशिशें नाकाम होने के बाद पांचवीं बार डार्ट लेपर्ड को लगा और करीब 20 मिनट बाद वह बेहोश होकर नीचे लगाए जाल में गिर गया।

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कोटा के छत्र विलास पार्क में मंगलवार सुबह उस वक्त हलचल मच गई, जब एक लेपर्ड 40 फीट ऊंचे जामुन के पेड़ पर जा चढ़ा। सुबह करीब 6 बजे पार्क में पहुंचे इस लेपर्ड को सुरक्षित नीचे उतारना आसान नहीं था। पेड़ की ऊंचाई और घनी शाखाओं के कारण वन विभाग की टीम को ट्रैंकुलाइज करने के लिए कई बार कोशिश करनी पड़ी।
करीब साढ़े तीन घंटे चले ऑपरेशन के बाद आखिरकार पांचवीं कोशिश सफल रही। डार्ट लगने के करीब 20 मिनट बाद लेपर्ड बेहोश होकर नीचे लगाए गए सुरक्षा जाल में गिरा, जिसके बाद टीम ने उसे सुरक्षित कब्जे में ले लिया।
घनी शाखाओं के कारण चार बार चूका निशाना
लेपर्ड को बेहोश करने के लिए वन विभाग की टीम ने कुल पांच बार डार्ट फायर किया। शुरुआती चार प्रयास पेड़ की घनी शाखाओं और पत्तियों के कारण सफल नहीं हो सके।
पांचवीं कोशिश में टीम ने क्रेन का सहारा लिया। इस दौरान लेपर्ड से करीब 10 फीट की दूरी से निशाना साधा गया और डार्ट उसके पेट में लगा।
डार्ट लगने के 20 मिनट बाद जाल में गिरा
डार्ट लगने के बाद टीम ने लेपर्ड पर लगातार नजर बनाए रखी। करीब 20 मिनट बाद दवा का असर हुआ और वह बेहोश होकर नीचे लगाए गए जाल में जा गिरा।
जाल पहले से तैयार रखा गया था, ताकि बेहोशी की हालत में ऊंचाई से गिरने पर लेपर्ड को चोट न लगे।
25 लोगों की टीम ने संभाला पूरा ऑपरेशन
रेस्क्यू के लिए वन विभाग की करीब 25 सदस्यों की टीम मौके पर मौजूद थी। इसमें दो डॉक्टर, सीसीएफ और दो एसीएफ समेत अन्य कर्मचारी शामिल थे।
पूरी कार्रवाई में करीब साढ़े तीन घंटे लगे। टीम ने लेपर्ड को सुरक्षित रेस्क्यू करने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू की।
पहले भी इलाके में नजर आने की आशंका
डीएफओ प्रमोद धाकड़ के मुताबिक संभावना है कि यह वही लेपर्ड हो सकता है, जिसे कुछ दिन पहले माल रोड स्थित आर्मी एरिया और स्वास्थ्य विभाग कार्यालय के आसपास देखा गया था।
वन विभाग ने उसे पकड़ने के लिए पहले पिंजरा भी लगाया था, लेकिन लेपर्ड उसमें नहीं आया। मंगलवार को उसके छत्र विलास पार्क पहुंचने के बाद टीम को ट्रैंकुलाइज कर रेस्क्यू करना पड़ा।
मेडिकल जांच के बाद जंगल में छोड़ा जाएगा
डीएफओ ने बताया कि रेस्क्यू किए गए लेपर्ड का मेडिकल परीक्षण कराया जाएगा। स्वास्थ्य जांच के बाद उसे जंगल में छोड़ने की प्रक्रिया की जाएगी।
फिलहाल वन विभाग की प्राथमिकता लेपर्ड की स्थिति पर नजर रखना और उसे सुरक्षित तरीके से उसके प्राकृतिक आवास तक पहुंचाना है।
