निशु आजाद और स्वतंत्र भारद्वाज विवाद क्या है? जंतर-मंतर की मारपीट से CJP प्रदर्शन तक, जानिए पूरा मामला
दिल्ली में CJP के प्रदर्शन के दौरान निशु आजाद के पिता संजय कुमार से मारपीट का मामला अब राजनीतिक विवाद बन गया है। मामले में स्वतंत्र भारद्वाज का नाम सामने आने के बाद राहुल गांधी, चंद्रशेखर आजाद और पप्पू यादव भी मुद्दे पर सक्रिय हुए। स्वतंत्र ने पहले मारपीट की बात कही, बाद में इसे आत्मरक्षा बताया। पुलिस कार्रवाई और FIR को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

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दिल्ली के संसद मार्ग थाने के बाहर चल रहा CJP का विरोध प्रदर्शन अब सिर्फ चुनावी या छात्र मुद्दों तक सीमित नहीं रह गया है। एक मारपीट की घटना ने पूरे विवाद को नया मोड़ दे दिया है। इस मामले में 15 साल की सोशल मीडिया एक्टिविस्ट निशु आजाद, उनके पिता संजय कुमार और स्वतंत्र भारद्वाज के नाम लगातार चर्चा में हैं।
मामला इतना बढ़ा कि नेताओं की बयानबाजी से लेकर पुलिस की कार्रवाई तक सवालों के घेरे में आ गई। राहुल गांधी ने निशु के समर्थन में पोस्ट किया, चंद्रशेखर आजाद ने पुलिस से कार्रवाई की अपील की और पप्पू यादव भी संसद मार्ग थाने पहुंच गए।
आखिर विवाद की शुरुआत कहां से हुई?
मामला CJP और छात्र संगठनों के प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान गाजियाबाद निवासी संजय कुमार भी अपनी बेटी निशु आजाद और एक दोस्त के साथ मौजूद थे। संजय अपने मोबाइल से प्रदर्शन का वीडियो बना रहे थे।
इसी दौरान कुछ युवकों से उनकी बहस हो गई। आरोप है कि विवाद बढ़ने के बाद संजय के साथ मारपीट की गई और उनके सिर में चोट आई।
पुलिस ने मौके से स्वतंत्र भारद्वाज और सूरज कुमार को हिरासत में लिया था। मामले में संसद मार्ग थाने में FIR भी दर्ज की गई।
निशु आजाद कौन हैं?
निशु आजाद सोशल मीडिया पर सक्रिय युवा एक्टिविस्ट हैं और बहुजन मुद्दों से जुड़े विषयों पर अपनी बात रखती हैं। CJP के प्रदर्शन के दौरान वह उस वक्त भी चर्चा में आई थीं, जब उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रतीकात्मक विरोध के तौर पर उनकी ‘तेरहवीं’ का खाना बांटा था। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।
अब उनके पिता के साथ हुई मारपीट ने इस पुराने विवाद को भी फिर चर्चा में ला दिया है।
स्वतंत्र भारद्वाज कौन हैं?
इस मामले में दूसरा प्रमुख नाम स्वतंत्र भारद्वाज का है। मारपीट की घटना के बाद उनका एक वीडियो सामने आया, जिसमें उन्होंने खुद संजय कुमार के साथ मारपीट करने की बात कही।
वायरल वीडियो में स्वतंत्र ने दावा किया कि मारपीट के बाद संजय के सिर पर कई टांके लगे थे। उन्होंने यह भी कहा कि मामले में हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धारा लग सकती थी, लेकिन उन्हें जेल नहीं जाना पड़ा।
इसी बयान के बाद मामला राजनीतिक रूप से और ज्यादा गरमा गया।
पहले मारपीट मानी, फिर बताया आत्मरक्षा
विवाद बढ़ने के बाद स्वतंत्र भारद्वाज ने एक और वीडियो जारी किया। इस बार उन्होंने घटना को हमले के बजाय आत्मरक्षा बताया।
उनका दावा है कि उन्हें 10 से 15 लोगों ने घेर लिया था और अगर वह खुद को बचाने के लिए कदम नहीं उठाते तो उनकी जान को खतरा हो सकता था। स्वतंत्र के मुताबिक उनके पास इस दावे के समर्थन में वीडियो सबूत भी हैं।
इस तरह मामले में दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं। अब पुलिस जांच में घटनास्थल के वीडियो और दूसरे साक्ष्यों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
कपिल मिश्रा और चिराग पासवान का नाम क्यों आया?
स्वतंत्र भारद्वाज के बयान में बीजेपी नेता कपिल मिश्रा और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान का नाम भी आया। स्वतंत्र ने कपिल मिश्रा को अपना बड़ा भाई जैसा बताते हुए उनके फोन आने का दावा किया।
उन्होंने यह भी कहा कि कपिल मिश्रा और चिराग पासवान से उनके करीबी संबंध हैं। बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके बयान को जिस तरह पेश किया जा रहा है, उसे संदर्भ से अलग करके नहीं देखा जाना चाहिए।
इसी बयान ने पुलिस की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक सवालों को और हवा दे दी।
राहुल गांधी ने निशु के समर्थन में क्या कहा?
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए निशु आजाद का समर्थन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि निशु को इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि वह छात्रों और अपने समुदाय से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठा रही हैं।
राहुल ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि आरोपी के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई क्यों नहीं हुई। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टैग करते हुए मामले में जवाबदेही की मांग की।
चंद्रशेखर आजाद भी पहुंचे निशु के साथ
नगीना सांसद और आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने भी निशु के समर्थन में वीडियो जारी किया। उन्होंने निशु को बहादुर बताते हुए पुलिस से मामले में मजबूती से कार्रवाई करने की अपील की।
चंद्रशेखर ने चेतावनी दी कि अगर पुलिस अपना काम प्रभावी तरीके से नहीं करेगी तो लोगों का भरोसा कानून व्यवस्था से उठ सकता है। उन्होंने निशु और उनके परिवार के साथ खड़े रहने की बात कही।
पप्पू यादव भी संसद मार्ग थाने पहुंचे
मामले में सांसद पप्पू यादव भी संसद मार्ग थाने पहुंचे और प्रदर्शन कर रहे लोगों के साथ थाने के बाहर बैठे। इस दौरान कांग्रेस की ओर से भी पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए गए।
दिल्ली यूथ कांग्रेस अध्यक्ष अक्षय लाकड़ा के मुताबिक FIR में SC/ST एक्ट की धाराएं जोड़ी गई हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि मेडिकल राय के आधार पर धारा 307 यानी हत्या के प्रयास की धारा जोड़ने की प्रक्रिया चल रही है।
हालांकि इन धाराओं को लेकर अंतिम स्थिति पुलिस की आधिकारिक कार्रवाई और जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
अब पुलिस जांच पर टिकी निगाहें
मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रदर्शन स्थल पर आखिर उस समय क्या हुआ था। क्या संजय कुमार पर जानबूझकर हमला किया गया या जैसा स्वतंत्र भारद्वाज दावा कर रहे हैं, वह आत्मरक्षा की स्थिति थी?
इसके अलावा मेडिकल रिपोर्ट, घटनास्थल के वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और पुलिस जांच यह तय करने में अहम होंगे कि घटना की वास्तविक तस्वीर क्या थी।
फिलहाल मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर पुलिस कार्रवाई और कानूनी जांच का विषय बन चुका है। आने वाले दिनों में जांच में सामने आने वाले सबूत ही तय करेंगे कि इस विवाद की अगली दिशा क्या होगी।
