खजराना में सवा लाख मोदक, ग्वालियर में ‘अर्जी वाले गणेश’; MP में ऐसे सजेगा 12 दिन का गणेशोत्सव
मध्यप्रदेश में गणेश चतुर्थी से 12 दिवसीय गणेशोत्सव की शुरुआत हो गई है। इंदौर, उज्जैन, सीहोर और ग्वालियर के प्रमुख गणेश मंदिरों में विशेष पूजा, भोग और धार्मिक आयोजन होंगे।

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मध्यप्रदेश में गणेश चतुर्थी के साथ गणपति आराधना का दौर शुरू हो गया है। घरों और सार्वजनिक पंडालों के साथ प्रदेश के प्रसिद्ध गणेश मंदिरों में भी विशेष तैयारियां की गई हैं। पंचांग के अनुसार इस बार गणेशोत्सव 14 से 25 सितंबर तक चलेगा।
प्रदेश के अलग-अलग शहरों में गणेश पूजा की अपनी खास परंपराएं हैं। कहीं भगवान को सवा लाख मोदक चढ़ाए जाएंगे, तो कहीं मनोकामना पूरी होने की उम्मीद लेकर भक्त अपनी ‘अर्जी’ गणपति के चरणों में रखेंगे। उज्जैन के मंदिरों में विशेष पूजन होगा, जबकि ग्वालियर में कारोबारी भी अपने आराध्य के दर्शन के लिए पहुंचेंगे।
खजराना गणेश के दरबार में सवा लाख मोदक
इंदौर का खजराना गणेश मंदिर गणेशोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहेगा। यहां 12 दिनों तक विशेष धार्मिक आयोजन होंगे।
उत्सव के पहले दिन भगवान गणेश को सवा लाख मोदक का भोग लगाया जाएगा। इसके बाद अलग-अलग दिनों में विभिन्न अनाज से तैयार लड्डुओं का भोग अर्पित किया जाएगा।
इस दौरान भगवान गणेश का स्वर्ण आभूषणों से विशेष श्रृंगार भी किया जाएगा। मंदिर में 12 दिनों के दौरान धार्मिक, भजन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। कुल 25 कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।
चिंतामन गणेश के तीन स्वरूपों के दर्शन
उज्जैन शहर से करीब 7 किलोमीटर दूर स्थित चिंतामन गणेश मंदिर की अपनी अलग धार्मिक पहचान है। यहां गणेशजी की प्रतिमा को धार्मिक मान्यता में स्वयंभू माना जाता है।
मंदिर में भगवान गणेश के तीन स्वरूपों की पूजा की जाती है—चिंतामन, इच्छामन और सिद्धिविनायक।
गणेश चतुर्थी के मौके पर मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने की संभावना है। यह मंदिर उज्जैन के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है।
महाकाल क्षेत्र के बड़ा गणेश मंदिर में विशेष पूजा
उज्जैन में महाकाल मंदिर के नजदीक स्थित बड़ा गणेश मंदिर विशाल गणेश प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध है। गणेश चतुर्थी पर यहां विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी।
मंदिर परिसर में भगवान गणेश के अलावा पंचमुखी हनुमान की सप्तधातु से निर्मित प्रतिमा भी विराजमान है। महाकाल दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचने वाले श्रद्धालु बड़ी संख्या में यहां भी गणपति के दर्शन करते हैं।
सीहोर में सिद्ध गणेश के दरबार में बढ़ेगी भीड़
सीहोर के गोपालपुर क्षेत्र में स्थित सिद्ध गणेश मंदिर में भी गणेशोत्सव को लेकर तैयारियां की गई हैं। स्थानीय धार्मिक परंपराओं में इस मंदिर को प्राचीन काल से जोड़ा जाता है।
गणेश चतुर्थी से यहां 12 दिवसीय उत्सव की शुरुआत होगी। श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए यातायात और पार्किंग की व्यवस्थाओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
ग्वालियर में कागज पर लिखकर लगती है ‘अर्जी’
ग्वालियर के शिंदे की छावनी क्षेत्र में स्थित रिद्धि-सिद्धि गणेश मंदिर ‘अर्जी वाले गणेश’ के नाम से प्रसिद्ध है।
यहां भक्त अपनी मनोकामना या समस्या कागज पर लिखकर भगवान गणेश के चरणों में अर्पित करते हैं। विवाह, नौकरी, कारोबार और परिवार से जुड़ी इच्छाओं की अर्जी लगाने की परंपरा यहां देखने को मिलती है।
मंदिर में गणेशजी रिद्धि-सिद्धि के साथ पद्मासन मुद्रा में विराजमान हैं। इसी स्वरूप के कारण विवाह संबंधी मनोकामनाओं को लेकर भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
मोटे गणेश के दरबार में व्यापारियों की आस्था
ग्वालियर के खासगी बाजार में स्थित मोटे गणेश मंदिर की पहचान यहां विराजमान बड़ी गणेश प्रतिमा से है। प्रतिमा के उभरे हुए उदर के कारण भगवान को ‘मोटे गणेश’ के नाम से जाना जाता है।
स्थानीय धार्मिक मान्यता में इनका व्यापारियों के आराध्य के रूप में भी विशेष स्थान है। कारोबारी अपने नए काम या व्यापार की शुरुआत से पहले यहां दर्शन और पूजा करने पहुंचते हैं।
गणेशोत्सव के दौरान इन प्रमुख मंदिरों में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ेगी। अलग-अलग शहरों की धार्मिक परंपराएं और विशेष आयोजन इस बार के गणेशोत्सव को खास बना रहे हैं।