मणिपुर में ‘ब्लैक डे’ पर खूनी हमला, दो महिलाओं समेत 4 की हत्या; घर में घुसकर नवजात के सामने मां को मारी गोली
मणिपुर के तामेंगलोंग और नोनी जिलों में रविवार को संदिग्ध उग्रवादियों के दो अलग-अलग हमलों में चार लोगों की मौत हो गई। पहली घटना में एक महिला और उसके पति की जान गई, जबकि दूसरी वारदात में एक महिला और पुरुष को गोली मार दी गई।

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मणिपुर में रविवार को दो अलग-अलग इलाकों में हुई हिंसा ने एक बार फिर आम नागरिकों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए। तामेंगलोंग और नोनी जिलों में संदिग्ध उग्रवादियों ने कथित तौर पर दो अलग-अलग हमलों को अंजाम दिया। इन घटनाओं में दो महिलाओं समेत चार लोगों की मौत हो गई।
पहला हमला सुबह करीब 4 बजे हुआ, जबकि दूसरी वारदात करीब 12 घंटे बाद दोपहर में सामने आई। दोनों घटनाएं ऐसे दिन हुईं, जिसे कुकी समुदाय 1990 के दशक के कुकी-नगा संघर्ष में मारे गए लोगों की याद में ‘साहनित नी’ या ‘ब्लैक डे’ के रूप में मनाता है।
घटनाओं के बाद सुरक्षा बलों ने प्रभावित इलाकों में पहुंचकर स्थिति संभाली और घायलों को चिकित्सा सहायता दिलाई।
सुबह 4 बजे घर पर हमला, महिला की मौत
पहली घटना तामेंगलोंग जिले में इंफाल-जिरीबाम राष्ट्रीय राजमार्ग-37 के पास स्थित टोल्लेन कुकी गांव में हुई।
पुलिस के अनुसार संदिग्ध हथियारबंद हमलावरों ने एक घर को निशाना बनाया। हमले में लिंगनगाई सिंगसिट की मौत हो गई।
उनके पति सेइनैह सिंगसिट और नवजात बच्चा भी घायल हुए। सुरक्षा बलों के पहुंचने के बाद घायलों को इलाज के लिए ले जाया गया।
हालांकि सेइनैह की हालत गंभीर थी और अस्पताल ले जाते समय पड़ोसी राज्य असम के सिलचर में रास्ते में उनकी भी मौत हो गई।
इस तरह पहली वारदात में पति-पत्नी दोनों की जान चली गई, जबकि उनका नवजात बच्चा घायल है।
दूसरी वारदात में महिला और पुरुष की गोली मारकर हत्या
पहली घटना के करीब 12 घंटे बाद नोनी जिले के नोन्गबा थाना क्षेत्र में दूसरी वारदात हुई।
पुलिस के मुताबिक दोपहर करीब 3:30 बजे हथियारबंद संदिग्ध उग्रवादियों ने लॉन्गपी गांव में एक महिला और पुरुष को गोली मार दी।
दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों की पहचान जूली गंगटे और आर. गंगटे के रूप में की गई है।
पुलिस ने घटनाओं के बाद हमलावरों की तलाश और पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी है।
‘ब्लैक डे’ के दिन ही हुई हिंसा
इन हत्याओं का समय भी इस मामले को संवेदनशील बनाता है।
13 सितंबर को कुकी समुदाय ‘साहनित नी’ यानी ‘ब्लैक डे’ के रूप में मनाता है। यह दिन 1990 के दशक में कुकी-नगा संघर्ष के दौरान जातीय हिंसा में मारे गए लोगों की याद में मनाया जाता है।
ऐसे दिन दो अलग-अलग इलाकों में हिंसक घटनाएं सामने आने से तनाव और बढ़ने की आशंका है।
हालांकि पुलिस ने हमलों के पीछे जिम्मेदार समूह की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। फिलहाल हमलावरों को संदिग्ध उग्रवादी बताया गया है।
ग्राम प्राधिकरण ने बताया जानबूझकर किया गया प्रयास
कैमाई ग्राम प्राधिकरण ने टोल्लेन कुकी गांव में हुए हमले की निंदा की है।
प्राधिकरण ने इसे समुदायों के बीच वैमनस्य और विभाजन पैदा करने की कोशिश बताया। साथ ही प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
ग्राम प्राधिकरण ने कहा कि हमले के जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
मुख्यमंत्री बोले- निर्दोषों पर हिंसा स्वीकार्य नहीं
मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह ने दोनों घटनाओं में हुई हत्याओं पर दुख जताया।
मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में उन्होंने कहा कि निर्दोष नागरिकों के खिलाफ हिंसा के ऐसे कृत्य कायराना और अस्वीकार्य हैं तथा समाज में इनका कोई स्थान नहीं है।
उन्होंने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई।
मुख्यमंत्री के बयान के बाद प्रशासन के सामने प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा मजबूत करने और हमलावरों की पहचान कर कार्रवाई करने की चुनौती है।
पूर्व CM बीरेन सिंह ने भी जताई नाराजगी
मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता एन. बीरेन सिंह ने टोल्लेन कुकी गांव की घटना पर दुख जताते हुए इसे बेहद परेशान करने वाला बताया।
उन्होंने कहा कि आम नागरिकों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। उनके मुताबिक इस तरह की हिंसा आम लोगों की मुश्किलें बढ़ाती है और शांति की दिशा में चल रहे प्रयासों को कमजोर करती है।
नगा पीपुल्स फ्रंट के विधायक अवांगबोउ न्यूमैई ने भी घटना की निंदा की। उन्होंने कहा कि निहत्थे पुरुषों, महिलाओं और बच्चों को निशाना बनाना कायराना है।
मई 2023 से जारी संघर्ष का दर्द
मणिपुर में मई 2023 में मेइती और कुकी समुदायों के बीच शुरू हुआ जातीय संघर्ष अब तक राज्य के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक संघर्ष में अब तक कम से कम 306 लोगों की मौत हो चुकी है। करीब 49 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोग अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर हुए हैं।
ऐसे में चार और नागरिकों की हत्या ने यह सवाल फिर खड़ा कर दिया है कि हिंसा से प्रभावित इलाकों में आम लोगों की सुरक्षा कितनी मजबूत है।
अब जांच के सामने सबसे बड़ा सवाल
दोनों घटनाओं में हमले का तरीका और समय अलग है, लेकिन दोनों में हथियारबंद हमलावरों द्वारा नागरिकों को निशाना बनाए जाने की बात सामने आई है।
अब सुरक्षा एजेंसियों के सामने सबसे अहम सवाल हमलावरों की पहचान, उनके मकसद और घटनाओं के बीच किसी संभावित कनेक्शन का पता लगाना है।
साथ ही यह भी देखना होगा कि संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद हमलावर गांवों तक कैसे पहुंचे और नागरिकों को निशाना बनाने के बाद वहां से निकलने में कैसे सफल हुए।