अयोध्या: साधु के भेष में कथावाचक देवेंद्र पाठक का महिला संग डांस वीडियो वायरल, पाखंड पर उठे सवाल
अयोध्या के कथावाचक देवेंद्र पाठक का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वे साधु वेश में एक महिला के साथ भोजपुरी गाने पर थिरकते नजर आ रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद उनके आचरण और धर्म की आड़ में पाखंड को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठ रहे हैं। मामले में अब तक कोई आधिकारिक कार्रवाई या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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अयोध्या, उत्तर प्रदेश। साधु के भेष में सामने आने वाले कथावाचक देवेंद्र पाठक का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह एक महिला के साथ भोजपुरी गाने पर थिरकते नजर आ रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद देवेंद्र पाठक की कार्यशैली और आचरण पर सवाल उठने लगे हैं, और मामला सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा का विषय बन गया है।
वीडियो में क्या दिख रहा है
वायरल क्लिप में देवेंद्र पाठक भगवा वस्त्रों में नजर आ रहे हैं, जो आमतौर पर कथावाचकों और धार्मिक प्रवचनकर्ताओं की पहचान माने जाते हैं। इसी वेश में वह एक महिला के साथ कदम मिलाते हुए भोजपुरी गाने पर ठुमके लगाते दिख रहे हैं। वीडियो की अवधि कम है, लेकिन इसके सामने आते ही मिनटों में यह सोशल मीडिया के कई प्लेटफॉर्म्स पर शेयर होने लगा।
कथावाचक की भूमिका पर सवाल
समाज में कथावाचक की भूमिका धर्म की स्थापना और समाज में फैली कुरीतियों को दूर करने की मानी जाती है। लोग कथा-प्रवचन सुनने और आध्यात्मिक मार्गदर्शन के लिए ऐसे लोगों पर भरोसा करते हैं। ऐसे में जब कोई कथावाचक सार्वजनिक तौर पर इस तरह के आचरण में नजर आता है, तो यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठता है कि धार्मिक भेष की आड़ में असल मंशा क्या है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं धर्म और आस्था के नाम पर बनाई गई साख को कमजोर करती हैं।
सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया
वीडियो वायरल होने के बाद यूजर्स की प्रतिक्रियाएं लगातार आ रही हैं। बड़ी संख्या में लोगों ने इसे "साधु के भेष में पाखंड" करार दिया है। कई यूजर्स ने कमेंट सेक्शन में सवाल उठाया कि धर्म और आस्था की आड़ में इस तरह की हरकतें करने वालों पर लगाम कौन लगाएगा। कुछ यूजर्स ने इसे महिला सुरक्षा और सामाजिक भरोसे के नजरिए से भी जोड़ा है, यह कहते हुए कि साधु वेश में घूमने वाले हर व्यक्ति पर आंख मूंदकर भरोसा करना खतरनाक साबित हो सकता है।
प्रशासनिक कार्रवाई पर संशय
वीडियो को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज है, लेकिन अब तक इस मामले में किसी आधिकारिक शिकायत या प्रशासनिक कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है। न ही देवेंद्र पाठक की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया सामने आई है। ऐसे में यह देखना बाकी है कि क्या यह मामला महज सोशल मीडिया ट्रेंड बनकर रह जाएगा, या इस पर कोई ठोस कदम उठाया जाएगा।
धार्मिक भेष और जवाबदेही का सवाल
यह पहला मामला नहीं है जब साधु या कथावाचक के भेष में किसी व्यक्ति के आचरण पर सवाल उठे हों। ऐसे मामलों में अक्सर यह चर्चा भी होती है कि धार्मिक भेष धारण करने के लिए किसी तरह की औपचारिक जांच या निगरानी व्यवस्था नहीं है, जिसकी वजह से कोई भी व्यक्ति खुद को कथावाचक या साधु बताकर समाज में प्रभाव जमा सकता है। इसी वजह से जानकार मानते हैं कि इस तरह के मामलों में सामाजिक जागरूकता और सतर्कता की जरूरत है।