जीतू यादव की MIC में वापसी, कमलेश कालरा ने राजबाड़ा पर दिया मौन धरना; इंदौर BJP में फिर खींचतान
इंदौर में जीतू यादव को दोबारा महापौर परिषद में शामिल किए जाने के बाद भाजपा के भीतर विवाद फिर सामने आ गया है। फैसले के विरोध में पार्षद कमलेश कालरा राजबाड़ा पर मौन धरने पर बैठे।

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भाजपा में जीतू यादव की वापसी के साथ ही पुराना विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। वार्ड 24 के पार्षद जीतू यादव को महापौर परिषद यानी MIC में दोबारा शामिल कर लिया गया है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने शुक्रवार को अमेरिका रवाना होने से पहले इस संबंध में पत्र जारी किया।
सरकार और संगठन के स्तर पर यादव की वापसी का रास्ता साफ होने के कुछ ही समय बाद भाजपा के ही पार्षद कमलेश कालरा ने इसका विरोध शुरू कर दिया। कालरा राजबाड़ा पहुंचे और जीतू यादव को MIC में शामिल किए जाने के खिलाफ मौन धरना दिया।
यानी एक तरफ संगठन ने यादव को फिर जिम्मेदारी दी, तो दूसरी तरफ उसी पार्टी के पार्षद ने सार्वजनिक रूप से इस फैसले के खिलाफ अपनी नाराजगी दर्ज कराई।
जिस मामले के बाद छिनी थी जिम्मेदारी, उसी में मिली राहत
जीतू यादव का नाम जनवरी 2025 में कमलेश कालरा के घर हुए विवाद के बाद सामने आया था। आरोप था कि घर में घुसकर कालरा के नाबालिग बेटे के साथ मारपीट और अभद्रता की गई।
घटना के बाद भाजपा संगठन ने यादव को पार्टी से बाहर कर दिया था। उनकी महापौर परिषद की जिम्मेदारी भी वापस ले ली गई थी।
इसके बाद यादव करीब 18 महीने तक पार्टी से बाहर रहे।
पुलिस के पूरक चालान में नहीं मिले स्पष्ट सबूत
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने कोर्ट में पूरक चालान पेश किया। इसमें कहा गया कि घटना में जीतू यादव की संलिप्तता के स्पष्ट साक्ष्य नहीं मिले हैं।
पुलिस की इस रिपोर्ट के बाद उनके खिलाफ अपराध बनाए जाने का आधार नहीं मिलने की बात सामने आई। इसके बाद भाजपा संगठन ने उन्हें दोबारा पार्टी में शामिल कर लिया।
पार्टी में वापसी के बाद से ही उनकी MIC में दोबारा एंट्री की चर्चा चल रही थी। शुक्रवार को महापौर के पत्र के साथ यह फैसला औपचारिक हो गया।
संगठन के फैसले के खिलाफ कालरा का मौन विरोध
जीतू यादव की MIC में वापसी के बाद कमलेश कालरा का राजबाड़ा पर मौन धरना इस पूरे घटनाक्रम का नया मोड़ बन गया है।
कालरा पहले भी इसी विवाद के केंद्र में रहे हैं। अब उन्होंने यादव को फिर से महापौर परिषद में जगह दिए जाने पर सार्वजनिक तौर पर विरोध दर्ज कराया है।
मौन धरने के जरिए कालरा ने संगठन के फैसले पर अपनी असहमति जाहिर की। इससे इंदौर भाजपा के भीतर इस पुराने विवाद के फिर राजनीतिक रूप से गर्म होने के संकेत मिले हैं।
भोपाल में नेताओं ने रखा था अपना पक्ष
जीतू यादव की पार्टी में वापसी से पहले संगठन स्तर पर भी इस मामले को लेकर चर्चा हुई थी। सूत्रों के मुताबिक, कुछ नेता और विधायक भोपाल में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से मिले थे।
इन नेताओं ने यादव के खिलाफ हुई शिकायत और पूरे घटनाक्रम को लेकर संगठन के सामने अपना पक्ष रखा था। इसके बाद मामले की स्थिति स्पष्ट होने पर यादव की पार्टी में वापसी का रास्ता साफ हुआ।
अब सवाल MIC में वापसी से आगे का
करीब 18 महीने पार्टी से बाहर रहने के बाद जीतू यादव पहले भाजपा में लौटे और अब महापौर परिषद में भी वापस आ गए हैं। दूसरी तरफ, इसी फैसले के खिलाफ कमलेश कालरा का धरना भाजपा के भीतर इस विवाद के पूरी तरह खत्म नहीं होने का संकेत दे रहा है।
फिलहाल पुलिस या प्रशासन की ओर से इस नए विरोध को लेकर किसी कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है। अब नजर इस बात पर है कि पार्टी संगठन कालरा के विरोध पर क्या रुख अपनाता है।