
सावधान हुकूमत! अब जम्हूरियत सड़क पर उतरी
जब भी सड़कों पर निकले हैं उम्मीद के कारवां, हुकूमत के महलों में फिर छा गया है धुआं। घरों से जो निकले हैं हक मांगने सड़कों पर, ज़माने ने देखा है अंदाज़ उनका अड़कर।।

Audio tools for this article
इतिहास गवाह है जब-जब प्रजा ने सत्ता के खिलाफ बगावत की है... जब-जब जनता सड़क पर उतरी है, तब-तब सत्ताधीशों की सांस फूली है।
सत्ताधीशों को यह समझ लेना चाहिए कि बगावत के जर्म्स सिर्फ राजनीति के कारण ही नहीं फैलते हैं, बल्कि जुल्म-ओ-सितम तथा भ्रष्टाचार से लबरेज विभिन्न समस्याओं से उपजा असंतोष भी इसकी एक बड़ी वजह होती है। यदि जनता सड़क पर उतर आए तो समझ लेना चाहिए, कि हुकूमत अपने कर्तव्य से भटक गई है।
पब्लिक में भी यदि यूथ का जूथ है तो जन पैमाने पर असंतोष का ग्राफ बढ़ता ही जाता है। यही लोकतंत्र की ताकत भी है। सड़क पर उतरी जनता एक चेतावनी है आने वाले वक्त की, जो भविष्य में जल्द ही 'सत्ता पलट' की ओर इशारा करती है। श्रीलंका और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी हमारे पास सबसे बड़ा उदाहरण है, जहां अवाम ने मौजूदा सरकारों को सत्ता से बेदखल कर ही दिया।
हिंदुस्तान में भी हालत कुछ इसी तरह नुमाया हो रहे हैं। एक छोटी सी टिप्पणी पर जनता कॉकरोच पार्टी जैसा संगठन खड़ा हो जाता है। लोग खुद-व-खुद उससे जुडऩे लगते हैं और खुलकर अपना आक्रोश व्यक्त करते हैं। देशभर में जगह-जगह लोग कॉकरोच की तरह फैल जाते हैं, सड़क पर उतर आते हैं और खुलेआम चुनौती देते हैं।
हो सकता है जनता कॉकरोच पार्टी भविष्य में शक्तिशाली बनकर उभरे, या फिर जिस तरह एक जाजम पर जो अराजनीतिक और असंगठित लोग आए थे वे बिखर जाएं। लेकिन इतना तो तय हो गया कि लोगों के दिलो दिमाग में सत्ता के खिलाफ एक विस्फोट दबा हुआ है। एक चिंगारी किसी भी समय शोले भड़का देगी, और जिस दिन ऐसा होगा उस दिन सत्ताधीशों को भागने के लिए पतली गली भी नसीब नहीं होगी।
यह पब्लिक है, जो शोषण-दमन-जुल्म-सितम सहन करती है। सत्ताई राजनीतिक दांव-पेंच चलते रहते हैं। लेकिन कहते हैं कि समय की भी अपनी एक मर्यादा है। जब धमाका होगा तब ना धर्म होगा ना मजहब, ना हिंदी होगी ना उर्दू, ना इंग्लिश होगी ना हिंग्लिश, ना जाति होगी ना वर्ग। स्वतंत्रता आंदोलन की तरह कूद पड़ेंगे सब एकजुट होकर मैदान में।
राजनीति कर रहे पक्ष और विपक्ष को अभी से यह समझ लेना चाहिए, कि जम्हूरियत ने सड़क पर उतरना शुरू कर दिया है। विधानसभा की ओर मार्च करना भी उसे आ गया है। अभी भले ही यह सिर्फ एक ट्रेलर हो, लेकिन 'पूरी झांकी' किसी भी दिन दिखाने में यह पब्लिक परहेज नहीं करेगी।
लिख रहा हूं मैं अंजाम जिसका, कल आगाज आएगा,
मेरे लहू का हर एक कतरा इंकलाब लाएगा।
मैं रहूं या न रहूं पर ये वादा है मेरा तुमसे कि,
मेरे बाद वतन पर मरने वालों का सैलाब आएगा।।


