पुरोहित जी के कटले में आग के बाद बड़ा एक्शन, CFO-AFO सस्पेंड; 14 फायर हाइड्रेंट बंद मिले
जयपुर के पुरोहित जी के कटले में आग की घटना के बाद राज्य सरकार ने उच्चस्तरीय जांच कमेटी गठित की है। फायर सेफ्टी सिस्टम पर उठे सवालों के बीच नगर निगम के CFO और AFO को निलंबित किया गया है, जबकि मानवाधिकार आयोग की जांच में स्मार्ट सिटी के 14 हाइड्रेंट बंद मिले।

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जयपुर के पुरोहित जी के कटले में 17 सितंबर को लगी आग के बाद अब सरकारी स्तर पर कार्रवाई शुरू हो गई है। आग में करीब 20 से 25 दुकानें जल गईं और व्यापारियों का लाखों रुपए का सामान बर्बाद हो गया। घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल फायर सेफ्टी सिस्टम की प्रभावशीलता को लेकर उठा। इसी को देखते हुए राज्य सरकार ने पूरे मामले की जांच के लिए उच्चस्तरीय कमेटी बनाई है और नगर निगम जयपुर के मुख्य अग्निशमन अधिकारी देवेंद्र मीणा तथा सहायक अग्निशमन अधिकारी कुलदीप माणतवाल को निलंबित कर दिया है।
सात दिन में देनी होगी जांच रिपोर्ट
राज्य सरकार की ओर से बनाई गई कमेटी की अध्यक्षता स्थानीय निकाय विभाग के अतिरिक्त निदेशक करेंगे। कमेटी में निदेशालय के मुख्य अभियंता और नगर निगम उदयपुर के मुख्य अग्निशमन अधिकारी को सदस्य बनाया गया है। स्वायत्त शासन विभाग के सचिव रवि जैन के मुताबिक, कमेटी आग की घटना से जुड़े सभी तथ्यों की जांच करेगी। इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि फायर सेफ्टी व्यवस्था में कहां कमी रही और अधिकारियों की ओर से किसी तरह की लापरवाही या चूक हुई या नहीं। कमेटी को सात दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
3.90 करोड़ का सिस्टम, फिर भी हाइड्रेंट बंद क्यों?
अग्निकांड के बाद फायर हाइड्रेंट सिस्टम की उपयोगिता और रखरखाव पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। मानवाधिकार आयोग की टीम ने शुक्रवार को पुरोहित जी के कटले पहुंचकर मौके का निरीक्षण किया। आयोग के अध्यक्ष और पूर्व न्यायाधीश जीआर मूलचंदानी के नेतृत्व में हुई जांच के दौरान स्मार्ट सिटी के तहत बनाए गए 14 फायर हाइड्रेंट बंद मिले। इसके अलावा फायर सिस्टम की पाइपों में नींबू-मिर्च भरे होने की बात भी जांच के दौरान सामने आई।
इसी मुद्दे को लेकर सांसद मंजू शर्मा ने यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा से मुलाकात की और फायर हाइड्रेंट सिस्टम के रखरखाव पर सवाल उठाए। बताया गया कि यह सिस्टम करीब 3.90 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया गया था। सांसद ने मांग की कि आग के दौरान सिस्टम के काम नहीं करने की निष्पक्ष जांच हो और जिम्मेदारी तय की जाए।
20 से 25 दुकानें जलकर खाक
पुरोहित जी के कटले में आग उस वक्त लगी, जब बाजार में दिन की सामान्य गतिविधियां शुरू होनी थीं। देखते ही देखते आग ने कई दुकानों को अपनी चपेट में ले लिया। करीब 20 से 25 दुकानें आग की वजह से पूरी तरह प्रभावित हुईं और उनमें रखा लाखों रुपए का सामान जल गया।
कई व्यापारियों ने अपनी दुकानों में बैंक से कर्ज लेकर माल भरा था, जबकि कुछ कारोबारी दीपावली के सीजन को देखते हुए अतिरिक्त स्टॉक जुटा रहे थे। ऐसे में आग ने सिर्फ दुकानें ही नहीं जलाईं, बल्कि कई परिवारों की रोजी-रोटी पर भी सीधा असर डाला। आग बुझने के बाद व्यापारी अपनी दुकानों के बाहर जले हुए सामान को देखकर परेशान नजर आए।
मानवाधिकार आयोग ने भी मांगे जवाब
अग्निकांड के बाद मानवाधिकार आयोग की टीम के निरीक्षण ने फायर सेफ्टी व्यवस्था को लेकर सवाल और गंभीर कर दिए हैं। बंद हाइड्रेंट और पाइपों की स्थिति की जानकारी सामने आने के बाद अब यह जांच का विषय है कि आग के समय फायर सिस्टम का इस्तेमाल क्यों नहीं हो पाया और उसके रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी थी।
सरकार की ओर से गठित कमेटी भी अधिकारियों की भूमिका और संभावित चूक की जांच करेगी। रिपोर्ट सामने आने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि फायर सिस्टम में तकनीकी समस्या थी, रखरखाव में कमी थी या फिर प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही हुई।
हादसे के बाद सियासत भी तेज
पुरोहित जी के कटले में आग लगने के बाद राजनीतिक नेताओं ने भी मौके का दौरा किया। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ घटनास्थल पर पहुंचे थे। इसके बाद मामला राजनीतिक चर्चा का विषय भी बना।
अब सरकार की जांच कमेटी की रिपोर्ट पर सबकी नजर है। रिपोर्ट में अगर किसी अधिकारी या व्यवस्था की जिम्मेदारी तय होती है तो उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
मंत्री ने कार्रवाई का भरोसा दिया
सांसद मंजू शर्मा के साथ मुलाकात में यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने भरोसा दिया कि जांच में जो भी जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही परकोटे के घने बाजारों में दमकल वाहनों की पहुंच, पर्याप्त पानी की व्यवस्था और अग्निसुरक्षा से जुड़ी दूसरी कमियों को दूर करने की बात कही गई है।
अब जांच का सबसे अहम सवाल यही है कि करोड़ों रुपए खर्च कर तैयार किए गए फायर हाइड्रेंट सिस्टम के बावजूद आग के समय सुरक्षा व्यवस्था कितनी प्रभावी थी और रखरखाव में चूक कहां हुई।
