चीनी सेना ने पकड़ लिया था खुफिया मिशन, गलत नक्शे ने बिगाड़ दी पूरी कहानी; डोभाल बोले- लगा था करियर खत्म हो गया
NSA अजीत डोभाल ने IIT रुड़की के दीक्षांत समारोह में अपने शुरुआती खुफिया करियर का करीब पांच दशक पुराना अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि सीमा क्षेत्र में भेजी गई एक टीम तय समय पर वापस नहीं लौटी और बाद में पता चला कि उसे चीनी सेना ने पकड़ लिया था। जांच के दौरान डोभाल को जिम्मेदार नहीं माना गया और नक्शों में खामियां सामने आईं।

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पांच दशक पुराना वो मिशन, जिसने डोभाल को डरा दिया था
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने IIT रुड़की के दीक्षांत समारोह में अपने शुरुआती करियर से जुड़ा एक ऐसा किस्सा सुनाया, जब एक खुफिया मिशन अचानक उनके लिए बड़ी चिंता का कारण बन गया था। उस समय डोभाल युवा IPS अधिकारी थे और खुफिया विभाग में नए थे। करीब 20 साल की उम्र में उनकी पोस्टिंग सिक्किम में इंटेलिजेंस के प्रभारी के तौर पर हुई थी। उन्होंने बताया कि उस दौर में सिक्किम भारत का हिस्सा नहीं था, बल्कि भारत में विलय की प्रक्रिया चल रही थी। सीमा क्षेत्र की निगरानी और चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी यानी PLA की गतिविधियों से जुड़ी जानकारी जुटाना भी उनकी जिम्मेदारियों में शामिल था।
सीमा पर भेजी टीम, लेकिन तय समय पर नहीं लौटी
डोभाल ने बताया कि एक बार सीमा क्षेत्र में एक खुफिया मिशन भेजा गया। मिशन पर गए लोगों को करीब पांच-छह दिन में वापस लौटना था, लेकिन तय समय गुजरने के बाद भी उनकी कोई खबर नहीं आई। पहले पांच दिन बीते, फिर 10 दिन और उसके बाद करीब 15 दिन तक भी टीम वापस नहीं लौटी। डोभाल के लिए यह बेहद चिंता की स्थिति थी, क्योंकि उन्हें यह भी जानकारी नहीं थी कि टीम के सदस्य सुरक्षित हैं या उनके साथ कोई हादसा हुआ है। उन्होंने बताया कि हिमस्खलन या किसी दूसरी दुर्घटना की भी कोई सूचना नहीं मिली थी।
फिर मुख्यालय से आया एक फोन
कई दिनों तक कोई जानकारी नहीं मिलने के बाद डोभाल के पास मुख्यालय से फोन आया। उनके वरिष्ठ अधिकारी ने उनसे पूछा कि क्या उन्होंने कुछ लोगों को सीमा पार भेजा था। डोभाल ने बताया कि उन्होंने मिशन भेजे जाने की बात स्वीकार की और कहा कि टीम को कुछ दिनों में वापस लौटना था, लेकिन अब काफी समय बीत चुका है। इसके बाद उन्हें बताया गया कि मिशन पर गए लोग चीनी सेना की हिरासत में हैं। डोभाल के लिए यह जानकारी बेहद गंभीर थी, क्योंकि अब साफ हो गया था कि टीम किसी दुर्घटना के कारण गायब नहीं हुई थी, बल्कि उसे चीन की सेना ने पकड़ लिया था।
चीनी हिरासत से लौटे तो हालत खराब थी
डोभाल के मुताबिक, चीनी सेना ने पकड़े गए लोगों से पूछताछ की। बाद में बातचीत और किसी समझौते के जरिए उन्हें वापस लाया गया। जब टीम वापस लौटी तो उसके सदस्य बेहद खराब हालत में थे और पूरी तरह टूट चुके थे। इसके बाद पूरे मामले की जांच शुरू हुई। उस समय डोभाल की उम्र काफी कम थी और वह खुफिया विभाग में अपने करियर की शुरुआत कर रहे थे। ऐसे में जांच शुरू होते ही उन्हें अपने भविष्य को लेकर चिंता होने लगी।
डोभाल को लगा- अब करियर खत्म हो जाएगा
डोभाल ने बताया कि उन्हें लगा था कि इस घटना की जिम्मेदारी उन पर आएगी और उनका करियर खत्म हो जाएगा। उन्होंने यहां तक मान लिया था कि शायद उन्हें अपना करियर ही बदलना पड़े। लेकिन जांच पूरी होने के बाद उन्हें दोषी नहीं पाया गया। डोभाल के मुताबिक, जांच में सामने आया कि मिशन में हुई समस्या के पीछे उनकी ओर से की गई कोई गलती नहीं थी। इसके बजाय मुख्यालय की ओर से उपलब्ध कराए गए स्केच और नक्शों में कुछ खामियां थीं।
गलत नक्शों ने बिगाड़ दिया था पूरा मिशन
डोभाल के मुताबिक, खुफिया टीम को जो नक्शे और स्केच दिए गए थे, उनमें मौजूद गलतियों की वजह से मिशन में परेशानी पैदा हुई। यही चूक आगे चलकर टीम के चीनी सेना की पकड़ में पहुंचने की वजह बनी। जांच में जब यह बात सामने आई तो डोभाल को जिम्मेदार नहीं माना गया। उन्होंने कहा कि संभवतः उन्होंने अपनी तरफ से जरूरी प्रक्रिया सही तरीके से पूरी की थी और समस्या उन सूचनाओं तथा नक्शों में थी, जो उन्हें मुख्यालय से उपलब्ध कराए गए थे।
छात्रों को सुनाई कहानी, लेकिन मकसद सिर्फ पुरानी याद नहीं था
डोभाल ने IIT रुड़की के छात्रों के सामने यह घटना इसलिए भी साझा की ताकि वे समझ सकें कि करियर में मुश्किल परिस्थितियां आ सकती हैं और किसी घटना का परिणाम हमेशा पहली नजर में दिखाई देने जैसा नहीं होता। उन्होंने बताया कि उस समय उन्हें लगा था कि सब कुछ खत्म हो गया है, लेकिन जांच के बाद सच्चाई अलग सामने आई। यह अनुभव उनके शुरुआती करियर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव बन गया।
डोभाल बोले- आज की पीढ़ी के पास बहुत बड़े अवसर
अपने अनुभव से आगे बढ़ते हुए डोभाल ने छात्रों को आज के दौर में उपलब्ध अवसरों की भी बात बताई। उन्होंने कहा कि पिछले 1,000 वर्षों में आज की पीढ़ी सबसे ज्यादा अवसर पाने वाली पीढ़ियों में से एक है। उनके मुताबिक, पिछली पीढ़ियों ने गुलामी और कठिन परिस्थितियों का सामना किया, जबकि आज युवाओं के सामने दुनिया तेजी से बदल रही है और उनके पास आगे बढ़ने के कई रास्ते हैं।
तकनीक को बताया आने वाले दौर की सबसे बड़ी ताकत
डोभाल ने कहा कि आने वाले समय में किसी भी देश और समाज की तरक्की में तकनीक की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने छात्रों को बदलती दुनिया के साथ खुद को तैयार करने और उपलब्ध अवसरों का इस्तेमाल करने का संदेश दिया। इस तरह डोभाल का करीब पांच दशक पुराना खुफिया मिशन का किस्सा सिर्फ एक पुराने ऑपरेशन की कहानी नहीं रहा, बल्कि उन्होंने इसे आज की युवा पीढ़ी के लिए अनुभव और सीख के तौर पर भी सामने रखा।
