होर्मुज से गुजरना अब इतना आसान नहीं? ईरान ने जहाजों से शुल्क लेने को दी मंजूरी, अमेरिका से टकराव के बीच बढ़ा तनाव
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान ने बड़ा फैसला लिया है। ईरानी संसद ने इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क लेने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। ईरान का कहना है कि शुल्क के बदले जहाजों को सुरक्षा, समुद्री सेवाएं और इंश्योरेंस जैसी सुविधाएं दी जाएंगी। इस फैसले के बाद दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक होर्मुज को लेकर नई चिंता पैदा हो गई है।

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तेहरान। दुनिया के नक्शे पर एक ऐसा समुद्री रास्ता है, जिसकी हलचल का असर हजारों किलोमीटर दूर तक महसूस होता है। यही वजह है कि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान का नया फैसला अचानक अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया है। ईरानी संसद ने अब इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूलने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
ईरान का तर्क है कि जहाजों से लिया जाने वाला पैसा केवल रास्ते का टैक्स नहीं होगा। इसके बदले समुद्री सुरक्षा, इंश्योरेंस और दूसरी सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। लेकिन जिस समय यह फैसला लिया गया है, उसे देखते हुए इसे अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से जोड़कर देखा जा रहा है।
ईरान ने आखिर फैसला क्या लिया है?
ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के प्रवक्ता हसन काशकवी के मुताबिक, होर्मुज से गुजरने की अनुमति पाने वाले जहाजों से समुद्री सेवाओं के बदले शुल्क लिया जाएगा। यानी अब जहाजों के लिए इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से गुजरने की कीमत तय की जा सकती है।
भुगतान ईरानी मुद्रा रियाल में किया जा सकेगा। इसके अलावा ईरान जिस दूसरी करेंसी को स्वीकार करेगा, उसमें भी फीस देने का विकल्प होगा। ईरान के मुताबिक इसके बदले जहाजों को समुद्री सुरक्षा, इंश्योरेंस और पर्यावरण से जुड़ी सेवाएं मिलेंगी। जरूरत पड़ने पर ईंधन उपलब्ध कराने की बात भी कही गई है।
होर्मुज ही क्यों इतना महत्वपूर्ण है?
होर्मुज स्ट्रेट कोई सामान्य समुद्री रास्ता नहीं है। फारस की खाड़ी से बाहर निकलने के लिए यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। खाड़ी के देशों से निकलने वाला बड़ी मात्रा में तेल और दूसरे सामान इसी रास्ते से अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचते हैं।
यही वजह है कि यहां जहाजों की आवाजाही में मामूली रुकावट भी तेल की कीमतों से लेकर वैश्विक व्यापार तक असर डाल सकती है। अब अगर ईरान यहां शुल्क व्यवस्था लागू करता है, तो इसका असर सिर्फ ईरान और अमेरिका तक सीमित रहने की संभावना नहीं है।
अमेरिका से पहले ही चल रहा है बड़ा टकराव
ईरान का यह कदम ऐसे समय आया है, जब अमेरिका उसके खिलाफ आर्थिक दबाव लगातार बढ़ा रहा है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि ट्रंप प्रशासन ईरान के खिलाफ आर्थिक कार्रवाई के आखिरी चरण में पहुंच चुका है।
अमेरिका का लक्ष्य ईरान की कमाई के प्रमुख रास्तों को बंद करना बताया गया है। वॉशिंगटन की इस रणनीति के जवाब में तेहरान भी अपनी आर्थिक और रणनीतिक ताकत का इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा है। होर्मुज का फैसला इसी दबाव की कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है।
खाड़ी देशों को भी ईरान का सीधा संदेश
ईरान ने अमेरिका के साथ खड़े होने वाले खाड़ी देशों को भी चेतावनी दी है। ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख मोहसिन रेजाई ने कहा है कि जो देश ईरान पर अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों को लागू करने में मदद करेंगे, उन्हें दुश्मन के तौर पर देखा जाएगा।
इस बयान का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि फारस की खाड़ी में मौजूद कई देश अमेरिका के रणनीतिक सहयोगी हैं। ऐसे में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने पर इन देशों पर भी दबाव बढ़ सकता है।
‘मक्का एग्रीमेंट’ को लेकर ईरान का बड़ा दावा
इसी बीच ईरान की ओर से एक और दिलचस्प दावा सामने आया है। ईरानी संसद से जुड़े अधिकारी मेहदी रहीमी ने कहा है कि ईरान को ‘मक्का एग्रीमेंट’ में शामिल होने का न्योता मिला है।
यह समझौता सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान के बीच हुआ है। तीनों देशों ने 7 अगस्त को आपसी रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत किसी एक देश पर हमला होने की स्थिति में उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा।
हालांकि, ईरान को इस समझौते में शामिल होने का निमंत्रण मिलने के दावे की अभी ईरान के विदेश मंत्रालय या समझौते में शामिल देशों की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
ट्रंप के बयानों से भी गरमाया मामला
होर्मुज को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान पहले ही तनाव बढ़ा चुके हैं। ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट को ‘न्यू यूएस टेरिटरी’ यानी नया अमेरिकी इलाका तक बताया था।
18 अगस्त को ट्रंप ने पहली बार होर्मुज पर अमेरिकी नियंत्रण की बात कही थी। इसके बाद उन्होंने ऐसी तस्वीर भी साझा की, जिसमें इस समुद्री क्षेत्र को अमेरिकी इलाके के रूप में दिखाया गया।
ईरान की ओर से जहाजों पर शुल्क लगाने का फैसला ऐसे ही बयानों और बढ़ते अमेरिकी दबाव के बीच आया है।
होर्मुज में कौन सा रास्ता इस्तेमाल करते हैं जहाज?
होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही को लेकर मुख्य रूप से दो दिशाओं की चर्चा होती है। एक मार्ग ईरान के तट के करीब से गुजरता है। यह लारक और किश्म द्वीपों के आसपास से होकर ईरान के बंदरगाहों और तेल टर्मिनलों के करीब पहुंचता है।
दूसरा रास्ता ओमान की तरफ है। यह ईरान के तट से ज्यादा दूर है और समुद्री आवाजाही के लिए अपेक्षाकृत अलग दिशा देता है। अमेरिकी सुरक्षा में चलने वाले कुछ व्यावसायिक जहाज भी इसी तरफ से आवाजाही करते हैं।
अब नजर जहाजों और अमेरिका की प्रतिक्रिया पर
ईरान का फैसला लागू होने पर सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि विदेशी जहाज इस शुल्क व्यवस्था को स्वीकार करते हैं या नहीं। दूसरा सवाल अमेरिका की प्रतिक्रिया का है।
क्योंकि होर्मुज में कोई भी नया शुल्क, सुरक्षा व्यवस्था या आवाजाही पर नियंत्रण सीधे वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकता है। अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ता है, तो यह समुद्री रास्ता आने वाले दिनों में सिर्फ व्यापार का मार्ग नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक टकराव का सबसे अहम मोर्चा भी बन सकता है।
