स्कीम 171 के खिलाफ प्लाटधारकों का प्रदर्शन, IDA का घेराव; बोले- शुल्क दिया फिर भी जमीन क्यों नहीं हुई मुक्त?
इंदौर में स्कीम नंबर 171 के दायरे में आने वाली करीब 13 सोसायटियों के प्लाटधारकों ने गुरुवार को IDA पहुंचकर प्रदर्शन किया। हाथों में तख्तियां लेकर और मांगों वाली टी-शर्ट पहनकर लोगों ने स्कीम से जमीन मुक्त करने की मांग उठाई। प्लाटधारकों का दावा है कि विकास शुल्क जमा करने के बावजूद वर्षों से उन्हें अपने प्लाट पर निर्माण की अनुमति नहीं मिल पा रही है।

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हाथों में तख्तियां, मांगों के संदेश वाली टी-शर्ट और वर्षों से चला आ रहा गुस्सा—गुरुवार को इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) में स्कीम नंबर 171 के प्लाटधारकों का जमावड़ा रहा। करीब 13 सोसायटियों के प्लाटधारक IDA पहुंचे और स्कीम के दायरे से अपनी जमीन मुक्त कराने की मांग को लेकर घेराव किया।
प्रदर्शन में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल रहे। प्लाटधारकों का कहना है कि वे लंबे समय से अलग-अलग स्तरों पर अपनी मांग उठा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।
33 साल पुरानी स्कीम से शुरू हुई जमीन की लड़ाई
प्लाटधारकों के मुताबिक इस विवाद की शुरुआत करीब 33 साल पहले हुई थी। सोसायटियों और अन्य जमीन को शामिल करते हुए स्कीम नंबर 132 घोषित की गई थी। इसके खिलाफ प्लाटधारक कोर्ट पहुंचे और बाद में यह स्कीम समाप्त हो गई।
इसके बाद इसी क्षेत्र की जमीन पर IDA ने स्कीम नंबर 171 घोषित कर दी। प्लाटधारकों का कहना है कि इसके बाद से जमीन को स्कीम से बाहर कराने की मांग को लेकर उनका संघर्ष लगातार जारी है।
विकास शुल्क भी जमा किया, फिर भी अटकी जमीन
प्लाटधारकों के अनुसार लंबे संघर्ष के बाद पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में ऐसा प्रावधान किया गया था कि जिन कॉलोनियों में 10 फीसदी से कम विकास कार्य हुआ है, वहां खर्च हुई विकास शुल्क की राशि लेकर जमीन को स्कीम से मुक्त किया जा सकता है।
उनका दावा है कि संबंधित रहवासियों ने विकास शुल्क की राशि जमा कर दी, लेकिन इसके बावजूद सोसायटियों की जमीन को अब तक स्कीम से मुक्त नहीं किया गया।
यही मुद्दा गुरुवार के प्रदर्शन का मुख्य केंद्र रहा। प्लाटधारक जानना चाहते हैं कि निर्धारित शुल्क जमा करने के बाद भी उनकी जमीन को राहत क्यों नहीं मिली।
विधायक भी उठा चुके हैं मांग
प्लाटधारकों का कहना है कि स्थानीय विधायक महेंद्र हार्डिया भी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने इस जमीन को स्कीम से मुक्त करने की मांग रख चुके हैं। इसके बावजूद अभी तक कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है।
लंबे समय से समाधान नहीं होने के कारण अब प्लाटधारकों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। इसी क्रम में बुधवार को उन्होंने IDA के कॉन्फ्रेंस हॉल में हनुमान चालीसा का पाठ भी किया था।
बोले- प्लाट है, लेकिन घर नहीं बना पा रहे
प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि स्कीम नंबर 171 के कारण उनके प्लाट पर निर्माण का रास्ता अटका हुआ है। कई परिवारों का कहना है कि जमीन होने के बावजूद वे उस पर अपना मकान नहीं बना पा रहे हैं।
प्लाटधारकों के मुताबिक उन्हें अपनी मांग के लिए कई वर्षों से अलग-अलग स्तरों पर जाना पड़ रहा है। गुरुवार को IDA में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने का मकसद यही था कि संबंधित अधिकारी उनकी समस्या पर ठोस फैसला लें।
फिलहाल प्लाटधारक IDA परिसर में डटे हुए हैं और जमीन को स्कीम नंबर 171 से मुक्त करने की मांग कर रहे हैं।