अवैध होर्डिंग्स के खिलाफ दंपती का अनशन, गांधी प्रतिमा के नीचे प्रहलाद-संगीता पांडे ने शुरू किया आंदोलन
इंदौर में अवैध बैनर-होर्डिंग हटाने और मारपीट के मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता प्रहलाद पांडे पत्नी संगीता के साथ रीगल तिराहे पर अनिश्चितकालीन उपवास पर बैठ गए हैं। उनका कहना है कि जब तक अवैध होर्डिंग्स के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, वे आंदोलन जारी रखेंगे।

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इंदौर में अवैध बैनर और होर्डिंग्स के खिलाफ सामाजिक कार्यकर्ता प्रहलाद पांडे ने आंदोलन शुरू कर दिया है। वे अपनी पत्नी संगीता पांडे के साथ रीगल तिराहे पर महात्मा गांधी की प्रतिमा के नीचे अनिश्चितकालीन उपवास पर बैठे हैं। पांडे का कहना है कि शहर की सड़कों, चौराहों और गलियों में लगे अवैध पोस्टर और होर्डिंग्स हटाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक इस दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक वे अन्न ग्रहण नहीं करेंगे और पानी पीकर अपना आंदोलन जारी रखेंगे।
मोमबत्ती और मोबाइल फ्लैशलाइट लेकर पहुंचे लोग
रविवार शाम आंदोलन स्थल पर प्रहलाद पांडे के समर्थन में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। महिलाओं, पुरुषों, बच्चों और बुजुर्गों ने हाथों में मोमबत्तियां और मोबाइल की फ्लैशलाइट जलाकर ‘आशा की किरण’ नाम से सांकेतिक प्रदर्शन किया। इस दौरान अवैध होर्डिंग्स हटाने की मांग को लेकर नारे लगाए गए और बाद में प्रदर्शनकारियों ने रीगल क्षेत्र में पैदल मार्च भी निकाला। पांडे का कहना है कि उनका उद्देश्य जनहित के मुद्दों पर आवाज उठाने वाले 100 जागरूक नागरिकों को इस मुहिम से जोड़ना है।
16 सितंबर की घटना के बाद बढ़ा विवाद
प्रहलाद पांडे ने अपने आंदोलन की वजह बताते हुए 16 सितंबर की एक घटना का जिक्र किया। उनके अनुसार, वह मरीमाता चौराहे पर लगे एक कथित अवैध बैनर का वीडियो बना रहे थे। इसी दौरान कुछ अज्ञात लोगों ने उनके साथ मारपीट की और उनका माइक तथा रिकॉर्डिंग डिवाइस छीन लिया। पांडे का आरोप है कि उन्हें एक स्थानीय विधायक का नाम नहीं लेने की धमकी भी दी गई। उनका यह भी दावा है कि मौके पर पुलिस की मौजूदगी के बावजूद उनके साथ धक्का-मुक्की हुई। इस घटना के बाद उन्होंने गांधी प्रतिमा के नीचे बैठकर आंदोलन शुरू करने का फैसला किया।
पांच दिन बाद भी FIR नहीं होने का आरोप
पांडे का आरोप है कि घटना के पांच दिन बीत जाने के बावजूद पुलिस ने मामले में FIR दर्ज नहीं की है। उनका कहना है कि घटनास्थल के आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज की जांच की जाए तो कथित हमलावरों की पहचान हो सकती है। उनका आरोप है कि पुलिस की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।
पत्नी भी आंदोलन में साथ
प्रहलाद पांडे के साथ उनकी पत्नी संगीता पांडे भी उपवास पर बैठी हैं। दोनों की मांग केवल कथित मारपीट की घटना में कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि शहर में लगे अवैध बैनर और होर्डिंग्स को हटाने की भी है। पांडे ने पुराने हाईकोर्ट आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि शिकायत मिलने के 24 घंटे के भीतर अवैध होर्डिंग या बैनर हटाने की व्यवस्था है और प्रशासन को इसका पालन सुनिश्चित करना चाहिए।
अब प्रशासन की कार्रवाई पर नजर
एक तरफ दंपती का अनिश्चितकालीन उपवास जारी है, वहीं दूसरी ओर इस पूरे मामले में प्रशासन और पुलिस की अगली कार्रवाई पर नजर है। प्रहलाद पांडे द्वारा लगाए गए मारपीट और FIR नहीं दर्ज करने के आरोपों की पुष्टि पुलिस कार्रवाई और जांच के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल उनका आंदोलन अवैध होर्डिंग्स हटाने और कथित हमले में कार्रवाई की मांग को लेकर जारी है।