इंदौर क्राइम ब्रांच का ऑपरेशन FAST-2.0: साइबर फ्रॉड में इस्तेमाल फर्जी सिम मुहैया कराने वाले 3 आरोपी गिरफ्तार
इंदौर क्राइम ब्रांच ने ऑपरेशन FAST-2.0 के तहत साइबर फ्रॉड में इस्तेमाल हुई फर्जी सिम मुहैया कराने वाले तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार इन सिम नंबरों से महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में दर्ज मामलों में 84.58 लाख रुपये से अधिक की ठगी सामने आई है।

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I4C की सूची से हुआ खुलासा
केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन काम करने वाले इंडियन साइबर कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) से मिली संदिग्ध POS धारकों और फर्जी सिम यूजर्स की सूची के आधार पर इंदौर क्राइम ब्रांच ने कार्रवाई शुरू की। पुलिस के मुताबिक, राज्य साइबर पुलिस मुख्यालय भोपाल से मिली सूची की पड़ताल के दौरान चार संदिग्ध मोबाइल नंबरों और उन्हें जारी करने वाले नेटवर्क का पता चला।
दुकान से जुड़े तार, संचालक निकला मुख्य कड़ी
जांच के दौरान क्राइम ब्रांच टीम यशवंत निवास रोड स्थित मालवा मिल के पास मौजूद "राउत कलेक्शन" नामक दुकान पर पहुंची। पुलिस के अनुसार, दुकान संचालक राजेन्द्र राऊत की भूमिका जांच में संदिग्ध पाई गई। यहीं से जुड़े चार संदिग्ध मोबाइल नंबरों की पड़ताल में अन्य आरोपियों की संलिप्तता भी सामने आई।
गिरफ्तार आरोपी
पुलिस ने इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है:
राजेन्द्र राऊत (पिता विठ्ठल राऊत, 40 वर्ष), निवासी स्वर्ण बाग कॉलोनी, विजय नगर, इंदौर
आनंद वासरे (पिता गोपाल वासरे, 22 वर्ष), निवासी मालवा मिल, गोमा की फेल, इंदौर
सूरज सिंह (पिता अरविंद सिंह, 24 वर्ष), निवासी पाटनीपुरा, नरसिंह की चाल, इंदौर
84.58 लाख की ठगी का आरोप
पुलिस के मुताबिक, चिन्हित चारों मोबाइल नंबरों से जुड़ी सिम का मिलान जब NCRP पोर्टल पर दर्ज शिकायतों से किया गया, तो महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में दर्ज साइबर फ्रॉड के मामलों में कुल 84 लाख 58 हजार 499 रुपये की कथित ठगी का खुलासा हुआ। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर सिम मुहैया कराने वाले अन्य लोगों, नेटवर्क और जुड़े बैंक खातों की जानकारी जुटाई जा रही है।
आगे की कार्रवाई
क्राइम ब्रांच के मुताबिक, मामले में दर्ज संबंधित राज्यों की पुलिस इकाइयों से समन्वय स्थापित कर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। पुलिस आयुक्त इंदौर के निर्देशन और अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) के मार्गदर्शन में ऑपरेशन FAST-2.0 के तहत फर्जी दस्तावेजों पर सिम हासिल करने और उन्हें साइबर अपराध में इस्तेमाल कराने वाले नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई जारी रहने की बात कही गई है।


