गूगल मैप पर 579 वारंटी बदमाशों के ठिकाने, गुना पुलिस ने तैयार किया डिजिटल डोजियर; अब दबिश होगी सीधे घर पर
गुना पुलिस ने 579 वारंटी आरोपियों की डिजिटल प्रोफाइल तैयार कर उनके ठिकानों की GPS लोकेशन दर्ज की है। पुलिस के मुताबिक, इस व्यवस्था से टीमों को सटीक स्थान की जानकारी मिलेगी और दबिश के दौरान स्थानीय स्तर पर सूचना जुटाने पर निर्भरता कम होगी।

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किसी वारंटी आरोपी के घर तक पहुंचने के लिए अब गुना पुलिस को गलियों और स्थानीय रास्तों की जानकारी जुटाने में समय नहीं लगाना पड़ेगा। पुलिस ने 579 वारंटी आरोपियों का डिजिटल डाटा तैयार कर उनके ठिकानों की GPS लोकेशन गूगल मैप पर दर्ज की है।
यह पहल खासतौर पर पारदी बहुल इलाकों में पुलिस की कार्रवाई को आसान बनाने के उद्देश्य से की गई है। पुलिस टीमों ने गांवों में जाकर आरोपियों के घरों की सटीक लोकेशन रिकॉर्ड की है। अब जरूरत पड़ने पर पुलिस टीम डिजिटल लोकेशन के आधार पर सीधे संबंधित ठिकाने तक पहुंच सकती है।
चार गांवों में जाकर दर्ज की गई लोकेशन
पुलिस ने पारदी बहुल चार प्रमुख गांवों—कनेरा चक, खेजरा चक, बीलाखेड़ी और कनेरी में जाकर यह डाटा तैयार किया।
टीमों ने आरोपियों के घरों की GPS लोकेशन यानी अक्षांश और देशांतर दर्ज किए। इसका मकसद यह है कि गुना के अलावा किसी दूसरे इलाके से आने वाली पुलिस टीम को भी आरोपी का ठिकाना खोजने में परेशानी न हो।
कागजी वारंट के साथ अब डिजिटल डोजियर
पुलिस के मुताबिक, सिर्फ वारंट की कागजी जानकारी के बजाय अब प्रत्येक आरोपी से जुड़ा विस्तृत डिजिटल डोजियर तैयार किया गया है।
इसमें आरोपी की फोटो, परिवार से जुड़ी जानकारी और उसके ठिकाने का डिजिटल रिकॉर्ड शामिल किया गया है। पुलिस का दावा है कि इससे कार्रवाई से पहले जरूरी जानकारी एक ही जगह उपलब्ध रहेगी।
पुलिस के अनुसार, सटीक लोकेशन उपलब्ध होने से दबिश की योजना बनाने में मदद मिलेगी और स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाने की जरूरत भी कम हो सकती है।
पारदी समुदाय का इतिहास क्या है?
पारदी समुदाय का इतिहास पारंपरिक रूप से शिकार और जंगल से जुड़े जीवन से रहा है। ‘पारदी’ शब्द को मराठी के ‘पारध’ शब्द से जोड़ा जाता है, जिसका अर्थ शिकार करना है।
यह समुदाय मुख्य रूप से मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र सहित देश के कई हिस्सों में पाया जाता है। ब्रिटिश शासन के दौरान क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट के तहत कई घुमंतू और विमुक्त समुदायों को कलंकित किया गया था। आजादी के बाद यह कानून खत्म कर दिया गया, लेकिन इन समुदायों को लंबे समय तक सामाजिक भेदभाव और पूर्वाग्रह का सामना करना पड़ा।
ऐसे में किसी पूरे समुदाय को अपराध से जोड़कर देखने के बजाय पुलिस कार्रवाई को विशिष्ट आरोपियों और मामलों तक सीमित रखना जरूरी है।
कार्रवाई के साथ सुधार पर भी जोर
गुना पुलिस की पहल केवल गिरफ्तारी और निगरानी तक सीमित रखने के बजाय सुधार की दिशा में भी बताई गई है। इसके लिए ‘नई दिशा’ अभियान चलाया जा रहा है।
पुलिस के मुताबिक, ऐसे युवाओं और परिवारों की पहचान की जा रही है जो अपराध छोड़कर सामान्य जीवन की ओर लौटना चाहते हैं। उन्हें स्वरोजगार से जोड़ने और बच्चों की शिक्षा में मदद करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
यानी एक तरफ वारंटियों के ठिकानों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार कर कार्रवाई आसान की जा रही है, तो दूसरी तरफ अपराध से बाहर निकलने के इच्छुक परिवारों को मुख्यधारा से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
अब दबिश में तकनीक बनेगी पुलिस का सहारा
579 डिजिटल प्रोफाइल तैयार होने के बाद गुना पुलिस के पास वारंटी आरोपियों की लोकेशन और व्यक्तिगत जानकारी का एक संगठित रिकॉर्ड उपलब्ध हो गया है।
पुलिस की योजना के मुताबिक, इसका इस्तेमाल भविष्य की कार्रवाई में किया जाएगा। इससे कितना समय बचेगा और कितने मामलों में आरोपी सीधे पकड़े जा सकेंगे, इसका असर आगे की कार्रवाई में सामने आएगा।