
बागेश्वर धाम नाबालिग केस में DNA से नया मोड़: MP हाईकोर्ट ने SIT जांच के दिए निर्देश
DNA जांच में आरोपी के भ्रूण का जैविक पिता नहीं पाए जाने के बाद MP हाईकोर्ट ने छतरपुर SP को विशेष टीम गठित कर दो महीने में विस्तृत जांच पूरी करने का निर्देश दिया है।

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मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में बागेश्वर धाम क्षेत्र से जुड़े एक नाबालिग के कथित यौन उत्पीड़न मामले में DNA रिपोर्ट के बाद जांच ने नया मोड़ लिया है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने छतरपुर पुलिस अधीक्षक को विशेष जांच टीम गठित कर मामले की विस्तृत जांच कराने का निर्देश दिया है।
हाईकोर्ट ने आरोपी राजू जाटव की दूसरी जमानत अर्जी भी खारिज कर दी है। अदालत के सामने आई फॉरेंसिक रिपोर्ट के मुताबिक आरोपी नाबालिग के गर्भ में रहे भ्रूण का जैविक पिता नहीं पाया गया।
DNA जांच में क्या सामने आया?
मामले की जांच के दौरान नाबालिग की मेडिकल जांच हुई थी। उस समय वह करीब दो महीने की गर्भवती पाई गई थी। गर्भावस्था समाप्त किए जाने के बाद भ्रूण और संबंधित नमूनों को फॉरेंसिक जांच के लिए सुरक्षित किया गया था।
आरोपी का रक्त नमूना भी जांच के लिए भेजा गया। स्टेट फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी, सागर की रिपोर्ट में आरोपी को भ्रूण का जैविक पिता नहीं पाया गया।
नाबालिग के बयानों में भी सामने आया अंतर
अदालत ने मामले में नाबालिग के अलग-अलग चरणों में दर्ज बयानों पर भी गौर किया। शुरुआती बयानों में उसने आरोपी पर कथित यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। हालांकि ट्रायल के दौरान उसने अभियोजन के मामले का समर्थन नहीं किया और आरोपी द्वारा दुष्कर्म किए जाने से इनकार किया।
DNA रिपोर्ट और बयानों में सामने आए इन पहलुओं के बाद हाईकोर्ट ने मामले की विस्तृत जांच जरूरी मानी।
SIT को क्या पता लगाना है?
Justice Ajay Kumar Nirankari की पीठ ने छतरपुर के पुलिस अधीक्षक को विशेष जांच टीम गठित करने का निर्देश दिया है।
जांच टीम को मुख्य रूप से यह पता लगाना है कि नाबालिग के कथित यौन उत्पीड़न के लिए कौन जिम्मेदार था और भ्रूण का जैविक पिता कौन है।
अदालत ने विस्तृत जांच दो महीने के भीतर पूरी कर उसके आधार पर उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
आरोपी की दूसरी जमानत अर्जी खारिज
DNA रिपोर्ट में आरोपी को भ्रूण का जैविक पिता नहीं पाए जाने के बावजूद हाईकोर्ट ने उसकी दूसरी जमानत अर्जी खारिज कर दी।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि DNA रिपोर्ट में जैविक पितृत्व नहीं मिलने का निष्कर्ष अपने-आप मामले में आरोपी की भूमिका पर अंतिम न्यायिक फैसला नहीं है। मामला जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है।
हाईकोर्ट का आदेश 25 सितंबर 2026 का है। इसके बाद मामला



