200 छात्राओं का पैदल मार्च, हाईवे पर चक्काजाम... अब जयस के 12 नेताओं पर FIR; उकसाने का आरोप
बड़वानी के निवाली में कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास की छात्राओं के पैदल मार्च और हाईवे पर चक्काजाम के मामले में पुलिस ने 12 नामजद लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। छात्रावास प्रबंधन की शिकायत पर जयस के जिला महामंत्री दीपक निगवाल समेत अन्य पर नाबालिग छात्राओं को हॉस्टल से बाहर निकालने और आंदोलन के लिए उकसाने का आरोप लगाया गया है।

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बड़वानी के निवाली में कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास की छात्राओं के प्रदर्शन के बाद मामला अब पुलिस कार्रवाई तक पहुंच गया है। करीब 200 छात्राएं हॉस्टल से निकलकर जिला मुख्यालय की ओर पैदल रवाना हुई थीं और बाद में स्टेट हाईवे पर चक्काजाम किया था।
अब छात्रावास अधीक्षक सविता बारिया की शिकायत पर निवाली थाना पुलिस ने जय आदिवासी युवा शक्ति संगठन (जयस) के जिला महामंत्री दीपक निगवाल समेत 12 नामजद लोगों और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
पुलिस का आरोप है कि इन लोगों ने नाबालिग छात्राओं को कथित तौर पर उकसाया, उन्हें हॉस्टल से बाहर निकलने के लिए प्रेरित किया और करीब पांच किलोमीटर दूर ले जाकर सड़क पर आंदोलन कराया। मामले में BNS और किशोर न्याय अधिनियम की धाराएं लगाई गई हैं।
किन धाराओं में दर्ज हुआ केस?
निवाली थाना प्रभारी वीर सिंह चौहान के मुताबिक, छात्रावास अधीक्षक की लिखित शिकायत के आधार पर आरोपियों के खिलाफ BNS की धारा 223 और किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम की धारा 83(2) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।
नामजद आरोपियों में जयस जिला महामंत्री दीपक निगवाल के अलावा विकास ब्राम्हणे, मनीष ब्राम्हणे, दीपक ब्राम्हणे, मदन सेनानी, भीम कनोजे, प्रेम चौहान, देव जमरे, सुवालाल खर्ते, दिलेश सोलंकी और दादु जाधव शामिल हैं।
पुलिस की ओर से लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद होगी।
भोजन-पानी की समस्या को लेकर छात्राएं निकली थीं
घटना 15 सितंबर की शाम की बताई गई है। छात्राओं ने छात्रावास में भोजन, पानी और अन्य मूलभूत सुविधाओं को लेकर नाराजगी जताई थी।
इसके बाद 200 से अधिक छात्राएं जिला कलेक्टर से मिलने के लिए पैदल निकल पड़ीं। प्रशासन और पुलिस ने उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन छात्राएं आगे बढ़ती रहीं।
कुछ दूरी तय करने के बाद छात्राएं करीब पांच किलोमीटर दूर स्टेट हाईवे तक पहुंच गईं और वहां चक्काजाम कर दिया।
अधीक्षक और सहायक वार्डन को हटाया गया
प्रदर्शन के दौरान छात्राएं छात्रावास अधीक्षक और सहायक वार्डन को हटाने की मांग पर अड़ी रहीं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पानसेमल एसडीएम रमेश सिसोदिया, राजपुर एसडीओपी बीएल अटोडे और सर्व शिक्षा अभियान की डीपीसी सोनालिका अचाले मौके पर पहुंचीं।
छात्राओं की शिकायतों के बीच डीपीसी ने अधीक्षक सविता बारिया और सहायक वार्डन साधना साहू को पद से हटाने का आदेश जारी किया। जांच पूरी होने तक नायब तहसीलदार अर्चना ग्रेवाल को छात्रावास का प्रशासनिक प्रभार सौंपा गया।
छह बसों से छात्राओं को हॉस्टल पहुंचाया
प्रशासन और छात्राओं के बीच बातचीत के बाद चक्काजाम खत्म कराया गया। इसके बाद प्रशासन ने छह बसों की व्यवस्था की और छात्राओं को देर रात वापस छात्रावास पहुंचाया।
इस दौरान पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर मौजूद रही।
असली सवाल छात्राओं की शिकायतों का भी
पुलिस कार्रवाई के साथ छात्राओं की ओर से उठाई गई भोजन, पानी और मूलभूत सुविधाओं की शिकायतें भी इस पूरे मामले का अहम हिस्सा हैं।
एक तरफ प्रशासन ने तत्काल अधीक्षक और सहायक वार्डन को हटाने का फैसला लिया है, वहीं दूसरी तरफ छात्राओं को कथित तौर पर आंदोलन के लिए उकसाने के आरोप में FIR दर्ज की गई है।
अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि छात्राएं अपनी समस्याओं को लेकर स्वत: सड़क पर निकली थीं या किसी बाहरी व्यक्ति या संगठन की भूमिका से आंदोलन का स्वरूप बदला।
एक सप्ताह में तीसरा मामला बताया गया
पुलिस और प्रशासन के स्तर पर पिछले कुछ वर्षों में निमाड़ क्षेत्र के छात्रावासों से जुड़े छात्र आंदोलनों को लेकर चिंता जताई जाती रही है।
पुलिस के अनुसार, पिछले एक सप्ताह में छात्रों को आंदोलन के लिए कथित तौर पर उकसाने से जुड़ा यह तीसरा मामला है। प्रशासन का दावा है कि कुछ स्थानीय संगठन छात्रावासों की वास्तविक समस्याओं को लेकर होने वाले विरोध को अपने राजनीतिक हितों के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश करते हैं।