किराए पर गरबा पार्टनर: मजाक में बनी पोस्ट वायरल, अहमदाबाद साइबर सेल ने कहा, पैसे भेजने से पहले सोचें
नवरात्रि से पहले इंस्टाग्राम पर किराए पर गरबा पार्टनर की पोस्ट वायरल हुई, जिसमें ₹1,000, ₹1,500 और ₹2,000 के तीन पैकेज थे। पोस्ट बनाने वाले ने इसे मजाक बताया और बाद में हटा लिया। लेकिन नकल करने वाले अकाउंट सामने आए हैं, इसलिए अहमदाबाद साइबर क्राइम सेल ने अनजान अकाउंट में पैसे न भेजने की चेतावनी दी है।

Audio tools for this article
गरबा के लिए पार्टनर नहीं मिला, तो इंटरनेट ने रेट कार्ड निकाल दिया। ₹1,000 में दो घंटे, ₹1,500 में चार घंटे और साथ में हम कैसे मिले की पूरी कहानी। बात यहां तक मजेदार थी। फिर पुलिस की एंट्री हुई।
नवरात्रि से पहले इंस्टाग्राम पर किराए पर गरबा पार्टनर की एक पोस्ट वायरल हुई, जिसमें तीन पैकेज थे। पोस्ट बनाने वाले का कहना है कि यह मजाक था और बाद में उसे हटा लिया गया। लेकिन अहमदाबाद साइबर क्राइम सेल का कहना है कि असली खतरा नकल करने वाले अकाउंट से है।
क्या था वायरल पोस्ट में
पोस्ट में तीन पैकेज बताए गए थे।
सिल्वर, ₹1,000: दो घंटे का साथ, मैचिंग आउटफिट, गरबा के बेसिक स्टेप सीखने में मदद और सेल्फी।
गोल्ड, ₹1,500: चार घंटे का साथ, हम कैसे मिले की तैयार कहानी और सोशल मीडिया के लिए वीडियो। दोस्तों के सवालों से बचने के लिए पार्टनर उन्हें भाई और भाभी भी बुला सकता था।
प्लैटिनम, ₹2,000: पूरे दिन का साथ, डांस स्टेप में मदद, कपड़ों और एक्सेसरीज में सहयोग और घर तक सुरक्षित ड्रॉप।
पोस्ट पर लोगों ने खूब मजे लिए। किसी ने पूछा कि यह सच है या मजाक, क्योंकि उसे वाकई पार्टनर चाहिए। किसी ने ₹2,000 वाला पैकेज ₹100 से कम में मांग लिया। एक यूजर ने पूछा कि क्या यह सुविधा अमेरिका में भी मिलेगी।
पोस्ट के पीछे कौन
पोस्ट इंस्टाग्राम यूजर कृश मिस्त्री ने डाली थी, जिनके करीब 1,700 फॉलोअर हैं। उनका कहना है कि उन्होंने पहले से मौजूद एक ऑनलाइन कॉन्सेप्ट में अपनी फोटो जोड़कर इसे सिर्फ मनोरंजन के लिए दोबारा डाला था। उनके मुताबिक कैप्शन में यह बात लिखी थी, फिर भी कई लोगों ने इसे गंभीरता से ले लिया। ऑनलाइन विरोध के बाद पोस्ट हटा दी गई।
साइबर सेल की चेतावनी: असली खतरा नकल से
अहमदाबाद साइबर क्राइम सेल के एक अधिकारी के मुताबिक यूनिट पांच से छह दिन से ऐसी पोस्ट पर नजर रख रही है। शुरुआत कुछ ही अकाउंट से हुई थी, लेकिन बाद में कई प्रोफाइल पर वैसा ही कंटेंट दिखा, जिनमें कुछ AI से बना लगता है।
पुलिस ने अपील की है कि सिर्फ ऐसे विज्ञापनों के भरोसे अनजान या असत्यापित अकाउंट में पैसे ट्रांसफर न करें। जो लोग पैसे भेज चुके हैं, वे साइबर पुलिस से संपर्क करें। किसी भी सेवा की पेशकश करने वाले की पहचान परखे बिना निजी जानकारी या भुगतान साझा न करें।
यह चिंता बेवजह नहीं है। इसी साल अगस्त में हैदराबाद पुलिस ने भी रेंट बॉयफ्रेंड जैसे पोस्टरों को साइबर ठगी बताकर चेताया था। ठगी का तरीका आमतौर पर एक जैसा रहता है: पहले आकर्षक ऑफर, फिर रजिस्ट्रेशन, वेरिफिकेशन या कैंसिलेशन के नाम पर बार-बार पैसे की मांग।
आस्था के त्योहार का बाजार
पोस्ट ने बहस भी छेड़ी। स्थानीय समूहों ने इसे धार्मिक त्योहार का व्यावसायीकरण बताया। जानकारों का मानना है कि नवरात्रि में बाजार का असर अब सामान से आगे इंसानी रिश्तों तक पहुंच गया है, और साथ को किराए की सेवा बना देना चिंताजनक बदलाव है।
गरबा मूल रूप से देवी दुर्गा की आराधना का नृत्य है। गुजरात में इसकी टोलियां दोस्तों, परिवार और मोहल्ले के लोगों से अपने आप बन जाती हैं। बीते तीन दशक में पास वाले बड़े आयोजनों, ट्रेनिंग एकेडमी और चनिया-चोली के किराए के बाजार ने इसे करोड़ों का उद्योग बना दिया है।
क्या करें, क्या न करें
किसी भी पार्टनर सर्विस के लिए अनजान अकाउंट में एडवांस, रजिस्ट्रेशन या वेरिफिकेशन फीस न दें।
अकाउंट पुराना और असली है या नहीं, पहले जांचें। नए अकाउंट, कम पोस्ट और AI जैसी तस्वीरें खतरे का संकेत हैं।
गरबा पास या टिकट सिर्फ आयोजकों की आधिकारिक वेबसाइट या अधिकृत काउंटर से लें।
संदिग्ध लिंक या APK फाइल न खोलें।
ठगी हो जाए तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।
नवरात्रि में गरबा का मजा दोस्तों और परिवार के साथ ही सबसे ज्यादा आता है। मजाक में बनी पोस्ट पर हंसना ठीक है, बस उसकी नकल पर पैसे भेजना नहीं।