चश्मदीद के दावे से फिर गरमाया BHU का विवाद, डॉ. लाहिड़ी से मारपीट मामले में जांच रिपोर्ट पर सवाल
प्रो. ओमशंकर ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर घटना से जुड़े एक प्रत्यक्षदर्शी के होने का दावा किया है। उनका कहना है कि मामले की जांच के बावजूद रिपोर्ट सामने नहीं आई, जिससे विवाद से जुड़े कई सवाल अब भी बने हुए हैं।

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काशी हिंदू विश्वविद्यालय में वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. टीके लाहिड़ी से जुड़ा विवाद नए दावों के साथ फिर चर्चा में आ गया है। इस बार मामला किसी नई कार्रवाई से नहीं, बल्कि प्रोफेसर डॉ. ओमशंकर के जारी किए गए वीडियो से गरमाया है। उन्होंने घटना को लेकर कई दावे किए हैं और कहा है कि उनके पास एक ऐसा चश्मदीद है, जो उस दिन की पूरी घटना के बारे में प्रत्यक्ष जानकारी रखता है। इसके साथ ही उन्होंने जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं किए जाने पर भी सवाल उठाए हैं।
सोशल मीडिया वीडियो में रखी अपनी बात
प्रो. ओमशंकर ने फेसबुक पर वीडियो और तस्वीरें साझा करते हुए 29 अगस्त की घटना का जिक्र किया। उनके अनुसार, सुबह करीब 11 बजे डॉ. अरविंद पांडे ने डॉ. लाहिड़ी के साथ कथित तौर पर मारपीट की। उन्होंने कहा कि उस समय डॉ. लाहिड़ी घर जाने की इच्छा जता रहे थे। हालांकि वीडियो में किए गए इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
तस्वीरों के आधार पर चोटों का दावा
ओमशंकर ने घटना के दिन की बताई जा रही तस्वीरों का हवाला देकर डॉ. लाहिड़ी के चेहरे पर चोट के निशान होने का दावा किया। उन्होंने आंख और भौंह के आसपास सूजन, गाल और ललाट पर उंगलियों जैसे निशान तथा नाक के पास खून आने की बात कही। बाईं आंख के आसपास भी चोट के निशान होने का दावा उनके वीडियो में किया गया है। इन तस्वीरों की चिकित्सकीय व्याख्या या स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
कथित व्हाट्सऐप संदेश का भी जिक्र
वीडियो में प्रो. ओमशंकर ने दावा किया कि घटना सामने आने के बाद डॉ. अरविंद पांडे ने IMS-BHU के व्हाट्सऐप ग्रुप में डॉ. लाहिड़ी पर बल प्रयोग किए जाने की बात स्वीकार की थी। हालांकि इस कथित संदेश का स्वतंत्र सत्यापन नहीं हुआ है और संबंधित पक्ष की ओर से इस दावे पर कोई पुष्ट प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।
जांच कमेटी की रिपोर्ट अब भी सवालों में
घटना के बाद बीएचयू और जिला प्रशासन की ओर से जांच कमेटी गठित की गई थी। अब प्रो. ओमशंकर इसी रिपोर्ट को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि जांच पूरी होने के बावजूद रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई। उन्होंने डॉ. लाहिड़ी के वरिष्ठ चिकित्सक और पद्मश्री सम्मानित होने का हवाला देते हुए मामले में पारदर्शिता की मांग की है।
अस्पताल के कर्मचारियों को लेकर भी लगाए आरोप
प्रो. ओमशंकर ने सर सुंदरलाल अस्पताल प्रशासन के रवैये पर भी सवाल उठाया। उनका दावा है कि घटना के समय ड्यूटी पर मौजूद कर्मचारियों से पूछताछ कर घटनाक्रम की पुष्टि की जा सकती थी। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि कुछ कर्मचारियों पर दबाव बनाया जा रहा है और नौकरी से हटाने की धमकी दी जा रही है। इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
अब चश्मदीद के बयान पर टिकी नजर
मामले में सबसे अहम दावा उस चश्मदीद को लेकर है, जिसका जिक्र प्रो. ओमशंकर ने अपने वीडियो में किया है। उनका कहना है कि यह व्यक्ति घटना के समय मौके पर मौजूद था और डॉ. लाहिड़ी के साथ हुई पूरी घटना के बारे में जानकारी दे सकता है। फिलहाल उस व्यक्ति का सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में उसकी पहचान, बयान और जांच एजेंसियों के सामने उसकी गवाही मामले की आगे की दिशा के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।
आरोपों की पुष्टि जांच से ही होगी
फिलहाल मामले में दो अलग-अलग पक्षों से सामने आने वाली जानकारियों के बीच आधिकारिक जांच रिपोर्ट का महत्व बढ़ गया है। मारपीट के आरोप, कथित चोटें, व्हाट्सऐप संदेश और कर्मचारियों पर दबाव जैसे दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होने और संबंधित पक्षों के बयान सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि 29 अगस्त को वास्तव में क्या हुआ था।