
ChatGPT में अब जवाब के नीचे दिखेगा ‘Sponsored’! OpenAI ने शुरू किया Ads का नया दौर, जानिए किसे दिखेंगे और किसे नहीं
ChatGPT में विज्ञापनों की टेस्टिंग अब वास्तविक प्रोडक्ट फीचर बन चुकी है। Free और Go यूजर्स को Ads दिख सकते हैं, जबकि Plus, Pro और बिजनेस प्लान विज्ञापन-मुक्त रहेंगे।

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टेक्नोलॉजी डेस्क। ChatGPT खोलिए, सवाल पूछिए और जवाब पढ़ने के बाद नीचे अगर कोई ‘Sponsored’ कार्ड दिखाई दे तो अब चौंकने की जरूरत नहीं है। OpenAI ने ChatGPT के भीतर विज्ञापनों की शुरुआत कर दी है। फरवरी 2026 में अमेरिका से शुरू हुआ शुरुआती परीक्षण अब आगे बढ़ चुका है और कंपनी ने advertisers के लिए बाकायदा Ads Manager भी शुरू कर दिया है। हालांकि सबसे अहम बात यह है कि विज्ञापन ChatGPT के जवाब का हिस्सा नहीं होंगे और पैसे देकर कोई कंपनी AI के जवाब को अपने पक्ष में नहीं करवा सकेगी।
सबको नहीं दिखेंगे Ads, आपका प्लान तय करेगा
OpenAI के मौजूदा नियमों के मुताबिक Free और Go प्लान इस्तेमाल करने वाले यूजर्स को विज्ञापन दिखाए जा सकते हैं। इसके उलट Plus, Pro, Business, Enterprise और Edu अकाउंट विज्ञापन-मुक्त रहेंगे। 18 साल से कम उम्र बताने वाले या सिस्टम द्वारा नाबालिग माने गए अकाउंट्स पर भी Ads नहीं दिखाए जाते। Temporary Chats को भी विज्ञापनों से बाहर रखा गया है।
यानी ChatGPT अचानक किसी सोशल मीडिया ऐप की तरह हर जगह विज्ञापनों से नहीं भरने जा रहा। Ads की उपलब्धता यूजर के प्लान, उम्र, क्षेत्र और चल रहे rollout पर निर्भर करेगी।
जवाब खत्म होगा, उसके बाद आ सकता है विज्ञापन
Ads को ChatGPT के मूल जवाब से अलग रखा गया है। OpenAI के अनुसार कोई विज्ञापन किसी जवाब के नीचे दिखाई दे सकता है और उस पर साफ तौर पर Sponsored का संकेत होगा। इसमें advertiser का नाम, headline, description, image और उसकी वेबसाइट पर जाने का विकल्प शामिल हो सकता है।
इसका मतलब समझना जरूरी है। अगर आपने लैपटॉप के बारे में सवाल पूछा और जवाब के नीचे किसी लैपटॉप ब्रांड का Sponsored कार्ड दिखाई दिया, तो वह विज्ञापन होगा—ChatGPT की recommendation या उसके जवाब का हिस्सा नहीं।
क्या पैसे देकर ChatGPT का जवाब बदला जा सकेगा?
नहीं। OpenAI ने अपनी Ads policy में इस हिस्से को स्पष्ट रखा है। विज्ञापन और ChatGPT के जवाब अलग systems पर चलते हैं। Advertiser यह तय नहीं कर सकता कि ChatGPT किसी सवाल के जवाब में उसके ब्रांड को ऊपर रखे, उसकी तारीफ करे या किसी competitor को नीचे दिखाए।
यही फर्क इस पूरे बदलाव का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। कंपनी Ads से कमाई कर सकती है, लेकिन विज्ञापनदाता ChatGPT के उत्तर खरीद नहीं सकता।
फिर ChatGPT को कैसे पता चलेगा कौन-सा Ad दिखाना है?
यहां मामला थोड़ा दिलचस्प है। Ads system मौजूदा conversation के context और intent को relevance signal के रूप में इस्तेमाल कर सकता है। उदाहरण के लिए कोई व्यक्ति किसी सामान्य खरीदारी विकल्प की तुलना कर रहा है तो उस बातचीत के संदर्भ से संबंधित विज्ञापन चुना जा सकता है। भाषा और सामान्य location जैसी basic context भी इस्तेमाल हो सकती है।
अगर Personalized Ads चालू हैं, तो broader ChatGPT experience के कुछ अतिरिक्त signals भी relevance तय करने में इस्तेमाल हो सकते हैं। इनमें past chats, memory और यूजर ने पहले Ads के साथ किस तरह interact किया जैसी चीजें शामिल हो सकती हैं।
क्या Advertiser आपकी Chat पढ़ सकेगा?
यहीं privacy को लेकर सबसे बड़ा सवाल आता है। OpenAI का कहना है कि advertisers को यूजर की conversations, chat history, memories, नाम, email, precise location या IP address नहीं दिए जाते। विज्ञापनदाताओं को performance से संबंधित aggregated reporting मिल सकती है, जैसे कितनी बार विज्ञापन देखा या क्लिक किया गया।
इसलिए किसी conversation का संदर्भ Ad चुनने में इस्तेमाल होना और वही conversation advertiser को सौंप देना—दो बिल्कुल अलग बातें हैं। कंपनी के अनुसार दूसरा काम नहीं किया जाता।
विज्ञापन पसंद नहीं आया तो यूजर के हाथ में भी कंट्रोल
OpenAI ने Ads के साथ user controls भी रखे हैं। यूजर किसी Ad को hide कर सकता है, उसे irrelevant बता सकता है और उपलब्ध विकल्पों के जरिए यह समझ सकता है कि वह विज्ञापन क्यों दिखाया गया। Personalized Ads को बंद करने का विकल्प भी दिया गया है।
हालांकि personalization बंद करने का अर्थ जरूरी नहीं कि हर विज्ञापन बंद हो जाएगा। OpenAI ने एक free no-ads option का भी उल्लेख किया है, लेकिन उसमें कम daily messages और image जैसे कुछ tools तक पहुंच न मिलने जैसी अतिरिक्त सीमाएं हो सकती हैं और इसकी availability क्षेत्र के अनुसार अलग हो सकती है।
अब कंपनियां सीधे ChatGPT पर विज्ञापन खरीद सकती हैं
बदलाव सिर्फ यूजर्स की स्क्रीन तक सीमित नहीं है। OpenAI ने advertisers के लिए Ads Manager Beta तैयार किया है, जहां कंपनियां campaign बना सकती हैं, budget और bidding तय कर सकती हैं, creatives upload कर सकती हैं और performance देख सकती हैं। विज्ञापन CPM यानी impressions और CPC यानी clicks जैसे models पर खरीदे जा सकते हैं।
यह संकेत देता है कि ChatGPT Ads अब केवल कुछ कंपनियों के साथ किया जा रहा छोटा प्रयोग नहीं रह गया है। OpenAI इसे धीरे-धीरे एक व्यवस्थित advertising platform के रूप में विकसित कर रहा है। कंपनी हालांकि अभी इसे beta और शुरुआती scaling stage बताती है।
भारत में अभी सबसे जरूरी बात क्या है?
भारत के यूजर्स के लिए किसी निश्चित तारीख का दावा करना जल्दबाजी होगी। OpenAI का कहना है कि Ads availability क्षेत्र और rollout के हिसाब से बदल सकती है। शुरुआत 9 फरवरी 2026 को अमेरिका में Free और Go के logged-in adult users के साथ हुई थी और विस्तार चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है। इसलिए भारत में किस अकाउंट पर कब Ads दिखाई देंगे, यह rollout और eligibility पर निर्भर करेगा।
लेकिन ChatGPT के बिजनेस मॉडल में बदलाव साफ दिखाई देने लगा है। अब कंपनी के पास subscription के साथ advertising भी कमाई का रास्ता बन रही है—और आने वाले समय में असली परीक्षा यही होगी कि Sponsored content और AI के स्वतंत्र जवाब के बीच की दीवार कितनी मजबूत बनी रहती है।




