
बस में बैठा था ₹7.5 करोड़ का सोना... पीछे की सीट पर बैठे बदमाशों ने रुकवाई गाड़ी और सेकंडों में बैग लेकर गायब
रतलाम के सराफा व्यापारी अर्पित चौरड़िया से बस में सफर के दौरान करीब 5 किलो सोने के जेवर और लगभग ₹3 लाख नकद से भरा बैग छीनने का मामला सामने आया है। पुलिस ने नाकाबंदी कर कई टीमें जांच में लगाई हैं।

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रतलाम। बस में बाकी यात्रियों की तरह ही कुछ लोग चढ़े, अलग-अलग सीटों पर बैठ गए और किसी को भनक तक नहीं लगी कि कुछ किलोमीटर बाद यही सफर करोड़ों की लूट में बदल जाएगा। रतलाम के सराफा कारोबारी अर्पित चौरड़िया गुरुवार रात बड़नगर से रतलाम लौट रहे थे। उनका दावा है कि बैग में करीब 5 किलो सोने के जेवर और लगभग ₹3 लाख नकद थे। रेन-मऊ फंटे के पास बस रुकते ही पीछे बैठे दो लोग बैग लेकर नीचे उतरे और बाहर इंतजार कर रहे साथियों के साथ फरार हो गए। पूरी वारदात इतनी तेजी से हुई कि व्यापारी संभलते, उससे पहले करोड़ों का माल आंखों के सामने गायब हो चुका था।
बड़नगर से ही बस में चढ़े थे संदिग्ध
रतलाम की जैन कॉलोनी निवासी अर्पित चौरड़िया सोने के आभूषणों के कारोबार के सिलसिले में बड़नगर गए थे। रात करीब 8.15 बजे वह बस से रतलाम के लिए रवाना हुए। उसी दौरान कुछ अन्य लोग भी बस में सवार हुए और अलग-अलग जगह बैठ गए। पुलिस की शुरुआती जांच में आशंका है कि इन्हीं में वारदात से जुड़े लोग शामिल हो सकते हैं।
एक ड्राइवर के पास बैठा, दो व्यापारी के पीछे
घटना का तरीका बताता है कि आरोपियों ने सीटें भी सोच-समझकर चुनी होंगी। पुलिस को दिए बयान के मुताबिक एक व्यक्ति चालक के पास जाकर बैठा, जबकि दो संदिग्ध व्यापारी की सीट के पीछे थे। रात करीब 9.15 बजे बस बिलपांक थाना क्षेत्र के रेन-मऊ फंटे के पास पहुंची तो आगे बैठे व्यक्ति ने गाड़ी रुकवाई। इसी क्षण पीछे बैठे दोनों लोगों ने अर्पित का बैग छीना और बस से नीचे उतर गए।
बाहर पहले से तैयार थे साथी?
जांच में यह भी सामने आया है कि बस से उतरने के बाद आरोपी बाहर मौजूद साथियों के साथ भागे। कुछ रिपोर्टों में बाइक सवार मददगारों का जिक्र है। पुलिस को आशंका है कि पूरी वारदात में करीब पांच लोग शामिल हो सकते हैं। अगर यह कड़ी सही निकलती है तो यह अचानक हुई छीना-झपटी से ज्यादा एक योजनाबद्ध ऑपरेशन की तरफ इशारा करती है।
बैग में कितना सोना था? यहीं जांच का पहला बड़ा सवाल
व्यापारी ने पुलिस को करीब 5 किलो सोने के जेवर होने की जानकारी दी है और कई ताजा रिपोर्टों में इनकी कीमत लगभग ₹7.5 करोड़ बताई गई है। साथ ही ₹3 लाख नकद होने का भी दावा है। हालांकि शुरुआती रिपोर्टों में सोने की मात्रा को लेकर 3 से 5 किलो तक अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। इसलिए वास्तविक वजन, जेवरों की सूची और कीमत की पुष्टि पुलिस रिकॉर्ड तथा कारोबारी दस्तावेजों के मिलान के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगी।
लूट के बाद सीधे पुलिस तक नहीं पहुंचे व्यापारी
वारदात के बाद बस आगे बढ़ी और व्यापारी ने बाद में पुलिस को सूचना दी। एक रिपोर्ट के मुताबिक धराड़ पुलिस चौकी के पास उन्होंने घटना की जानकारी दी, जिसके बाद बिलपांक पुलिस सक्रिय हुई। इसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों को खबर दी गई और इलाके में नाकाबंदी कराई गई।
DIG से SP तक मौके पर, डॉग स्क्वॉड और साइबर टीम भी लगी
मामले की गंभीरता देखते हुए DIG निमिष अग्रवाल, SP अमित कुमार, ASP विवेक कुमार और अन्य अधिकारी जांच में जुटे। डॉग स्क्वॉड की मदद से घटनास्थल और आसपास के रास्ते खंगाले गए। पुलिस ने अलग-अलग टीमें बनाकर संभावित फरार रूट, बस में चढ़े यात्रियों और आसपास लगे CCTV कैमरों की जांच शुरू की है। साइबर टीम भी सक्रिय की गई है।
क्या व्यापारी को पहले से ट्रैक किया जा रहा था?
अब जांच का सबसे दिलचस्प हिस्सा यही है। अगर आरोपी बड़नगर से ही उसी बस में चढ़े, व्यापारी के पीछे बैठे और बाहर दूसरे साथी पहले से तैयार थे, तो पुलिस यह जरूर देखेगी कि उन्हें सोने से भरे बैग की जानकारी पहले से थी या नहीं। क्या व्यापारी की यात्रा पर नजर रखी जा रही थी? क्या किसी ने उनके निकलने की सूचना दी? या आरोपियों ने रास्ते में मौका देखकर वारदात की? फिलहाल इनमें से किसी संभावना की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
मामला सिर्फ ‘बैग छीनने’ का नहीं, सूचना लीक होने का भी हो सकता है
करीब पांच किलो सोना लेकर सार्वजनिक बस में सफर कर रहे व्यापारी तक यदि अपराधी सीधे पहुंच गए, तो जांच का दायरा केवल बस और घटनास्थल तक सीमित नहीं रहेगा। पुलिस को कारोबारी के संपर्क, यात्रा की जानकारी रखने वाले लोगों, हाल की डील और संदिग्ध कॉल रिकॉर्ड तक जाना पड़ सकता है। यह जांच बताएगी कि लुटेरों को सिर्फ मौका मिला था या उन्हें पहले से माल और यात्रा दोनों की खबर थी।
फिलहाल एक बात साफ है—लूट केवल कुछ सेकंड में हुई, लेकिन उसे समझने के लिए पुलिस को पूरी यात्रा पीछे से जोड़नी होगी।

