कौन हैं प्रिया त्यागी? जिनके लिए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को लताड़ा, कहा- 'खुद दें परमानेंट कमीशन, वर्ना हम देंगे आदेश'
भारतीय तट रक्षक बल (Indian Coast Guard) में शॉर्ट सर्विस अपॉइंटमेंट (SSA) अधिकारी के रूप में कार्यरत प्रिया त्यागी को परमानेंट कमीशन दिए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को सख्त रुख दिखाया है. अदालत ने कहा कि वह अधिकारियों को इस तरह अपमानित नहीं होने दे सकती और यदि सरकार खुद कदम नहीं उठाती है तो कोर्ट आदेश जारी करेगा.

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नई दिल्ली: भारतीय तट रक्षक बल (ICG) में महिला अधिकारियों की स्थायी भूमिका और लैंगिक समानता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर ऐतिहासिक और कड़ा रुख अपनाया है. शीर्ष अदालत ने इंडियन कोस्ट गार्ड में शॉर्ट सर्विस अपॉइंटमेंट (SSA) ऑफिसर के रूप में सेवा दे रहीं प्रिया त्यागी के परमानेंट कमीशन (Permanent Commission) के हक में पुरजोर वकालत करते हुए केंद्र सरकार को दो टूक निर्देश जारी किए हैं.
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: 'अधिकारियों को अपमानित नहीं होने देंगे'
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) और तीन सदस्यीय पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि अगर केंद्र सरकार खुद प्रिया त्यागी को कोस्ट गार्ड में परमानेंट कमीशन प्रदान नहीं करती है, तो अदालत को इस मामले में हस्तक्षेप कर प्रत्यक्ष आदेश जारी करना पड़ेगा.
पीठ ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा:
क्या है पूरा विवाद और प्रिया त्यागी का मामला?
प्रिया त्यागी इंडियन कोस्ट गार्ड में शॉर्ट सर्विस अपॉइंटमेंट अधिकारी के तौर पर अपनी सेवाएं दे रही हैं. उन्होंने अपनी सेवा अवधि पूरी होने के बाद पुरुष अधिकारियों की तर्ज पर परमानेंट कमीशन की मांग को लेकर कानूनी लड़ाई शुरू की थी.
अप्रैल 2024 का अंतरिम आदेश: इससे पहले अप्रैल 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश पारित कर प्रिया त्यागी को जनरल ड्यूटी ऑफिसर (GDO) के रूप में अपनी सेवा जारी रखने की अंतरिम राहत प्रदान की थी.
केंद्र का विरोध: केंद्र सरकार और कोस्ट गार्ड प्रशासन लगातार यह तर्क देकर परमानेंट कमीशन का विरोध करता रहा है कि भारतीय तट रक्षक बल का संगठनात्मक ढांचा और परिचालन स्थितियां थलसेना, नौसेना और वायुसेना से भिन्न हैं.
अटॉर्नी जनरल की अदालत में दलील
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने कोस्ट गार्ड की विशेषताओं और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का हवाला दिया. उन्होंने अदालत को आश्वस्त करने का प्रयास करते हुए कहा कि यदि अधिकारी पात्र पाई जाती हैं, तो नई नीतिगत व्यवस्था के तहत उन पर विचार किया जा सकता है और सरकार यह पता लगाएगी कि क्या उन्हें स्थायी रूप से शामिल किया जाना संभव है.
2020 का ऐतिहासिक फैसला और लैंगिक समानता
उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2020 में दिए अपने लैंडमार्क फैसले में यह स्पष्ट कर दिया था कि भारतीय थलसेना और नौसेना में कार्यरत महिला शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारियों को पुरुष समकक्षों की तरह परमानेंट कमीशन पाने का पूर्ण संवैधानिक अधिकार है.
उस समय भी शीर्ष अदालत ने माना था कि महिलाओं को कॉम्बैट या प्रशासनिक भूमिकाओं से दूर रखने का केंद्र का रुख पुरानी सामाजिक अवधारणाओं और 'जेंडर स्टीरियोटाइप' (लिंग-आधारित रूढ़िवादिता) पर आधारित है, जिसे आधुनिक सुरक्षा बलों में स्वीकार नहीं किया जा सकता.
सीजेआई की अध्यक्षता वाली पीठ ने अब स्पष्ट कर दिया है कि नई पॉलिसी के तहत प्रिया त्यागी के आवेदन पर सकारात्मक रुख के साथ निर्णय लिया जाए, अन्यथा न्यायिक आदेश के जरिए राहत सुनिश्चित की जाएगी.

