मर्डर से पहले 6 बार बेटे को कॉल, नया सिम और चाकू की गूगल सर्च; विनीत हत्याकांड में नौकर की प्लानिंग पर सवाल
कानपुर के कारोबारी विनीत मिनोचा की हत्या की जांच में पुलिस को नौकर विशाल के मोबाइल से कई अहम जानकारियां मिली हैं। जांच के मुताबिक, हत्या से पहले उसने नया सिम लिया, चाकू से जुड़ी जानकारी सर्च की और कारोबारी के बेटे सुब्रत को छह बार फोन किया था।

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कानपुर के कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड की जांच में नौकर विशाल के मोबाइल फोन से सामने आए रिकॉर्ड ने पुलिस की पड़ताल को नया मोड़ दिया है। जांच के मुताबिक, हत्या वाली रात विशाल ने कारोबारी के बेटे सुब्रत को छह बार कॉल किया था। इससे पहले उसने नया सिम कार्ड खरीदा और अपने मोबाइल की गूगल हिस्ट्री में धारदार चाकू से जुड़ी जानकारी तलाशने की बात भी सामने आई है।
पुलिस अब इन कॉल रिकॉर्ड, मोबाइल सर्च हिस्ट्री और CCTV फुटेज को जोड़कर यह समझने की कोशिश कर रही है कि हत्या से पहले आरोपियों के बीच क्या बातचीत हुई और वारदात की योजना कैसे बनी।
हत्या से दो दिन पहले नहीं, उसी दिन बदला सिम
जांच के मुताबिक, विशाल ने 3 सितंबर को नया सिम कार्ड खरीदा था। यह सिम शुभम के नाम से लिया गया था। इसके बाद उसने पुराने नंबर को बंद कर नए सिम को मोबाइल में इस्तेमाल करना शुरू किया।
पुलिस के अनुसार, नए नंबर से विशाल ने शालू को सात और सुब्रत को छह बार कॉल की थी। जांच में सामने आया है कि इस नंबर से आठ मिनट के भीतर तीन बार आपस में भी बातचीत हुई।
मोबाइल रिकॉर्ड को पुलिस इसलिए अहम मान रही है क्योंकि इसी अवधि में हत्या की तैयारी और आरोपियों के बीच संपर्क की कड़ियां तलाश की जा रही हैं।
गूगल हिस्ट्री में चाकू से जुड़ी सर्च
आरोपी विशाल के मोबाइल की गूगल हिस्ट्री की जांच में पुलिस को चाकू से संबंधित सर्च मिलने की बात सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, उसने हत्या से एक दिन पहले धारदार चाकू कहां मिलता है, उसकी धार कैसी होती है और चाकू कितने प्रकार के होते हैं जैसी जानकारी इंटरनेट पर तलाश की थी।
पुलिस इस सर्च को वारदात में इस्तेमाल हथियार और उसकी तैयारी से जोड़कर देख रही है। हालांकि केवल इंटरनेट सर्च से हत्या की साजिश या आरोपी की मंशा साबित नहीं होती। इसकी पुष्टि अन्य साक्ष्यों से की जानी बाकी है।
फ्लैट में जाने से पहले गार्डन में घूमे
पुलिस की जांच में हत्या वाली रात की गतिविधियों का भी पता लगाया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, विशाल और उसका साथी राजकिशोर अपार्टमेंट पहुंचने के बाद कुछ समय गार्डन में टहलते रहे।
इस दौरान दोनों के बीच 10:29 बजे करीब 20 सेकेंड, 10:31 बजे 44 सेकेंड और 10:37 बजे लगभग एक मिनट तक फोन पर बातचीत हुई।
इन कॉल्स को लेकर पुलिस का अनुमान है कि फ्लैट में प्रवेश करने से पहले दोनों के बीच वारदात से संबंधित बातचीत हुई हो सकती है। एक संभावना यह भी जांची जा रही है कि शुरुआत में एक व्यक्ति को अंदर जाने और दूसरे को बाहर निगरानी करने की योजना रही हो, लेकिन बाद में दोनों ने साथ अंदर जाने का फैसला किया।
यह पुलिस की जांच का अनुमान है, जिसकी पुष्टि आगे के साक्ष्यों से होना बाकी है।
हत्या का अनुमानित समय 11:10 से 11:25 के बीच
जांच के अनुसार, पुलिस ने हत्या का संभावित समय रात 11:10 से 11:25 बजे के बीच माना है।
वारदात के बाद विशाल के फोन से पहली कॉल ऑनलाइन टैक्सी बुक कराने के लिए किए जाने की बात सामने आई है। इसके बाद उसने अपने दोस्त नैतिक को भी पांच बार कॉल किया था।
कॉल रिकॉर्ड की यह पूरी श्रृंखला पुलिस के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे वारदात से पहले और बाद की गतिविधियों का क्रम तैयार करने में मदद मिल रही है।
5 सितंबर की रात फ्लैट में हुई थी हत्या
इंदिरा नगर निवासी दवा कारोबारी विनीत मिनोचा की 5 सितंबर की रात उनके फ्लैट में चाकू से हत्या कर दी गई थी।
मामले में विशाल उर्फ शिवम और उसके साथी राजकिशोर को पुलिस ने 6 सितंबर की शाम मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया था। पुलिस के अनुसार, विशाल पहले विनीत के यहां नौकर रह चुका था।
गिरफ्तारी के बाद विशाल ने कारोबारी की बहू शालू पर हत्या की साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया था।
शालू और सुब्रत की भूमिका भी जांच के घेरे में
विशाल ने पूछताछ में दावा किया था कि शालू के कहने पर उसने हत्या की। शालू मूल रूप से लखनऊ के ठाकुरगंज की रहने वाली बताई गई है।
हालांकि पुलिस की जांच केवल इस दावे तक सीमित नहीं है। कारोबारी के बेटे सुब्रत और शालू के साथ विशाल के संपर्क की भी पड़ताल की जा रही है। पुलिस कॉल डिटेल रिकॉर्ड, CCTV फुटेज और मोबाइल से मिले अन्य डिजिटल साक्ष्यों के जरिए घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ रही है।
यानी फिलहाल किसी एक आरोपी के बयान को अंतिम निष्कर्ष मानने के बजाय पुलिस अलग-अलग साक्ष्यों का मिलान कर रही है।
शालू और विशाल के रिमांड की मांग
ताजा जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने मंगलवार को शालू और विशाल का कस्टडी रिमांड लेने के लिए कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया है।
रिमांड मिलने पर पुलिस दोनों से आमने-सामने पूछताछ कर सकती है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश करेंगी कि वारदात से पहले किससे संपर्क हुआ, हत्या की योजना कब और कैसे बनी और घटना के बाद आरोपियों ने क्या कदम उठाए।
अब कॉल रिकॉर्ड, मोबाइल सर्च हिस्ट्री और CCTV फुटेज के साथ आरोपियों के बयानों का मिलान इस केस की अगली दिशा तय कर सकता है।