नितिन नवीन के सामने विजयवर्गीय का ‘राज’ वाला तंज, रणदिवे के जिक्र पर इंदौर BJP में फिर चर्चा
इंदौर के एक सरकारी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने गौरव रणदिवे को आयोजन का ‘सूत्रधार’ बताया तो कैलाश विजयवर्गीय ने इसी बात को पकड़ते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने ‘एक राज की बात’ बता दी। बयान का वीडियो सामने आने के बाद भाजपा की स्थानीय राजनीति को लेकर चर्चाएं तेज हैं।

Audio tools for this article
इंदौर में एक सरकारी कार्यक्रम के मंच से निकली दो टिप्पणियों ने भाजपा की स्थानीय राजनीति को फिर चर्चा में ला दिया। मौका था स्वामित्व अधिकार योजना के तहत फ्री रजिस्ट्री वितरण अभियान की शुरुआत का, जहां मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के साथ भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन भी मौजूद थे।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में भाजपा प्रदेश महामंत्री गौरव रणदिवे को कार्यक्रम की तैयारियों का ‘सूत्रधार’ बताया। इसके कुछ देर बाद विजयवर्गीय मंच पर आए और मुख्यमंत्री की इसी टिप्पणी पर अपनी बात रखी।
विजयवर्गीय ने कहा, “आप सभी का आभार, मुख्यमंत्री का आभार कि उन्होंने एक राज की बात बताई। इसके लिए गौरव जी का भी आभार।”
इस टिप्पणी का वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों और सोशल मीडिया पर इसके अलग-अलग अर्थ निकाले जा रहे हैं। हालांकि, विजयवर्गीय ने अपने बयान में किसी विवाद या मतभेद का सीधा उल्लेख नहीं किया।
मंच से निकली एक लाइन, बढ़ी राजनीतिक चर्चा
मुख्यमंत्री का रणदिवे को आयोजन का ‘सूत्रधार’ कहना जहां संगठन में उनकी भूमिका की ओर इशारा माना गया, वहीं विजयवर्गीय का उसी शब्दावली को लेकर ‘राज की बात’ कहना चर्चा का विषय बन गया।
विजयवर्गीय के समर्थक इसे उनके सामान्य राजनीतिक अंदाज के तौर पर देख रहे हैं। दूसरी ओर, भाजपा की स्थानीय राजनीति पर नजर रखने वाले लोग इसे इंदौर संगठन में बदलते समीकरणों के संदर्भ में जोड़कर देख रहे हैं।
हालांकि, इन अटकलों के बीच दोनों नेताओं के बीच किसी मौजूदा औपचारिक विवाद की सार्वजनिक पुष्टि नहीं हुई है।
रणदिवे की बढ़ती भूमिका और पुराने समीकरण
गौरव रणदिवे के राजनीतिक सफर में इंदौर भाजपा का नगर अध्यक्ष पद भी अहम पड़ाव रहा है। उस समय राजनीतिक हलकों में माना गया था कि उन्हें कैलाश विजयवर्गीय और विधायक रमेश मेंदोला का समर्थन हासिल था।
बाद के वर्षों में रणदिवे संगठन में आगे बढ़े और प्रदेश भाजपा में महामंत्री की जिम्मेदारी तक पहुंचे। इसके साथ ही इंदौर की स्थानीय राजनीति में उनके प्रभाव और भूमिका को लेकर चर्चाएं भी बढ़ीं।
अब सार्वजनिक कार्यक्रमों में विजयवर्गीय और रणदिवे कई बार एक ही मंच पर दिखाई देते हैं। ऐसे में मंच से की गई छोटी राजनीतिक टिप्पणियां भी स्थानीय भाजपा के समीकरणों के संदर्भ में चर्चा का विषय बन जाती हैं।
‘पौधे’ वाले बयान की भी हुई थी चर्चा
विजयवर्गीय का राजनीतिक बयानबाजी का अंदाज पहले भी सुर्खियों में रहा है। पिछले साल एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि वे अपने द्वारा उगे हुए पौधों को नहीं काटते।
उस समय इस टिप्पणी को भी राजनीतिक संदर्भों में अलग-अलग तरह से समझा गया था। अब रणदिवे के संदर्भ में ‘राज की बात’ वाले बयान के सामने आने के बाद पुराने बयान का भी सोशल मीडिया पर जिक्र होने लगा है।
कांग्रेस ने साधा भाजपा पर निशाना
कांग्रेस के मीडिया को-ऑर्डिनेटर नीलाभ शुक्ला ने इस घटनाक्रम को भाजपा की अंदरूनी गुटबाजी से जोड़ते हुए निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की मौजूदगी वाले कार्यक्रम में ही पार्टी के भीतर के मतभेद सामने आ गए। शुक्ला के मुताबिक, एक तरफ मुख्यमंत्री रणदिवे की भूमिका की तारीफ करते हैं और दूसरी तरफ विजयवर्गीय उसी बात को ‘राज’ बताते हैं।
यह कांग्रेस का राजनीतिक आरोप है। भाजपा की ओर से इस टिप्पणी को लेकर किसी औपचारिक गुटबाजी या विवाद की पुष्टि सामने नहीं आई है।
सवाल बयान से ज्यादा उसके मतलब पर
पूरे घटनाक्रम में फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यही है कि मुख्यमंत्री ने रणदिवे को कार्यक्रम का ‘सूत्रधार’ बताया और विजयवर्गीय ने उसी बात को ‘राज’ कहकर मंच से दोहराया।
क्या यह सिर्फ विजयवर्गीय का चिर-परिचित राजनीतिक अंदाज था या बयान के पीछे कोई और राजनीतिक संकेत था—इसकी पुष्टि दोनों नेताओं की ओर से नहीं हुई है। लेकिन इतना जरूर है कि एक मंच से निकली कुछ पंक्तियों ने इंदौर भाजपा के पुराने और नए समीकरणों पर बहस जरूर छेड़ दी है।