काजी कैंप पर मिसाइल बयान से गरमाई भोपाल की सियासत, ओवैसी की चुनौती पर रामेश्वर शर्मा का पलटवार
भोपाल में काजी कैंप को लेकर दिए गए मिसाइल वाले बयान पर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा आमने-सामने हैं। ओवैसी की चुनौती के बाद शर्मा ने ऑपरेशन सिंदूर और UCC का जिक्र करते हुए पलटवार किया है।

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भोपाल में काजी कैंप पर मिसाइल गिराने के बयान से शुरू हुआ विवाद अब असदुद्दीन ओवैसी और भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा के बीच सीधे जुबानी टकराव में बदल गया है। 15 सितंबर को भोपाल में UCC के विरोध में आयोजित सभा में AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने शर्मा के बयान का जिक्र करते हुए उन्हें काजी कैंप आकर मिसाइल लॉन्च करने की चुनौती दी।
इसके जवाब में 16 सितंबर को रामेश्वर शर्मा ने ओवैसी पर तीखा पलटवार किया। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि भारत की मिसाइल आतंकवादी और भारत विरोधी ठिकानों को निशाना बनाने के लिए तैयार है। दोनों नेताओं के बयान सामने आने के बाद यह मुद्दा भोपाल की राजनीति में चर्चा का केंद्र बन गया है।
कैसे शुरू हुआ मिसाइल वाला विवाद?
विवाद की शुरुआत सितंबर की शुरुआत में करोंद इलाके में आयोजित एक कार्यक्रम से हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, रामेश्वर शर्मा ने मंच से करोंद चौराहे से काजी कैंप की ओर मिसाइल चलाने की बात कही थी।
बयान सामने आने के बाद इस पर राजनीतिक प्रतिक्रिया शुरू हुई। बाद में शर्मा ने सफाई देते हुए कहा कि उनका संदर्भ भोपाल के काजी कैंप से नहीं, बल्कि पाकिस्तान के इस्लामाबाद स्थित काजी कैंप से था। हालांकि इस स्पष्टीकरण के बाद भी विवाद खत्म नहीं हुआ।
ओवैसी ने मंच से दी चुनौती
15 सितंबर को भोपाल के सेंट्रल लाइब्रेरी ग्राउंड में UCC के विरोध में आयोजित सभा में ओवैसी ने इसी बयान को मुद्दा बनाया।
उन्होंने कहा कि यदि रामेश्वर शर्मा ने काजी कैंप पर मिसाइल गिराने की बात कही है तो उन्हें बताना चाहिए कि मिसाइल कब लॉन्च करेंगे। ओवैसी ने यह भी कहा कि वे काजी कैंप में अकेले खड़े होने के लिए तैयार हैं।
ओवैसी ने अपने भाषण में काजी कैंप से जुड़े इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन के कुछ स्थानीय सेनानियों का भी उल्लेख किया।
रामेश्वर शर्मा ने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र कर दिया जवाब
ओवैसी की चुनौती के बाद रामेश्वर शर्मा ने जवाब देते हुए ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत के वैज्ञानिकों द्वारा तैयार की गई मिसाइलों का इस्तेमाल भारतीय सेना ने पाकिस्तान में आतंकवादी और भारत विरोधी ठिकानों के खिलाफ कार्रवाई में किया है।
शर्मा ने कहा कि जहां आतंकवादी कैंप होंगे, वहां भारत की मिसाइल तैयार रहेगी। उन्होंने ओवैसी को यह भी कहा कि यदि उनके बयान पर आपत्ति है तो वे इसे अदालत में चुनौती दे सकते हैं।
उनके बयान में ओवैसी के खिलाफ व्यक्तिगत और आपत्तिजनक भाषा भी इस्तेमाल किए जाने की रिपोर्ट है।
UCC पर भी दोनों के बीच तीखी बहस
मिसाइल विवाद के साथ समान नागरिक संहिता यानी UCC भी दोनों नेताओं की बयानबाजी का प्रमुख मुद्दा रहा।
ओवैसी ने भोपाल की सभा में UCC का विरोध करते हुए संविधान के अनुच्छेद 14, 25, 26 और 29 का हवाला दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि अलग संस्कृति और परंपराओं के कारण आदिवासी समुदाय को UCC से बाहर रखा गया है तो मुस्लिम समुदाय को इसके दायरे में क्यों लाया जा रहा है।
उन्होंने UCC को लेकर BJP और RSS की नीतियों पर राजनीतिक आपत्ति जताई और इसे धार्मिक स्वतंत्रता तथा अल्पसंख्यक अधिकारों से जोड़कर सवाल उठाए। ये ओवैसी के राजनीतिक दावे हैं।
शर्मा बोले- UCC लागू होकर रहेगा
रामेश्वर शर्मा ने जवाब में UCC का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि समान कानून लागू होना चाहिए और मध्य प्रदेश में UCC लागू हो चुका है।
उन्होंने बहुविवाह और परिवार के आकार को लेकर भी ओवैसी पर निशाना साधते हुए विवादित टिप्पणी की। शर्मा ने दावा किया कि 2029 तक देश के 21 राज्यों में UCC लागू किया जाएगा।
यह 2029 तक 21 राज्यों में UCC लागू होने संबंधी राजनीतिक दावा है; इसे वर्तमान में लागू कानून या न्यायिक रूप से तय तथ्य के रूप में नहीं लिखा जा सकता।
ऑपरेशन सिंदूर भी बना राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा
रामेश्वर शर्मा ने अपने जवाब में ऑपरेशन सिंदूर का इस्तेमाल भारत की सैन्य क्षमता के उदाहरण के तौर पर किया। वहीं ओवैसी की सभा का मूल मुद्दा UCC था और मिसाइल विवाद उनके भाषण में शर्मा के बयान के जवाब के रूप में सामने आया।
इस तरह एक स्थानीय राजनीतिक बयान से शुरू हुआ विवाद अब मिसाइल, आतंकवाद, UCC और धार्मिक अधिकारों जैसे अलग-अलग मुद्दों तक पहुंच गया है।
अब विवाद किस दिशा में जाएगा?
फिलहाल दोनों नेताओं की ओर से बयान और पलटवार सामने आ चुके हैं। शर्मा ने अपने मूल बयान पर कायम रहने की बात कही है, जबकि ओवैसी ने उसी बयान को लेकर उन्हें सार्वजनिक चुनौती दी है।
विवाद का अगला राजनीतिक असर क्या होगा, यह आने वाली प्रतिक्रियाओं और संबंधित दलों के अगले कदमों से स्पष्ट होगा।