UPI पर 0.4% चार्ज कन्फर्म, 15 अक्टूबर से लागू, जानिए किसे देना होगा
एक दिन पहले तक सोशल मीडिया पर सिर्फ अफवाह थी। अब NPCI ने खुद पुष्टि कर दी है, ₹2,000 से ऊपर के UPI मर्चेंट पेमेंट पर 0.4% चार्ज लगेगा, 15 अक्टूबर 2026 से। पूरी डिटेल, कौन देगा चार्ज, कौन बचेगा, वायरल दावा कितना सही निकला।

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एक लाइन में पूरी खबर
कल तक जो 0.5% चार्ज की बात सिर्फ सोशल मीडिया की अफवाह लग रही थी, आज उसका असली, कन्फर्म वर्जन सामने आ गया है। NPCI ने घोषणा की है कि ₹2,000 से ऊपर के UPI मर्चेंट पेमेंट पर 0.4% का चार्ज लगेगा, लेकिन यह चार्ज ग्राहक नहीं, दुकानदार देगा, और यह 15 अक्टूबर 2026 से लागू होगा।
कल का वायरल दावा, आज की असली खबर
सोमवार को एक मैसेज तेज़ी से वायरल हुआ था, दावा था कि ₹2,000 से ऊपर के हर UPI पेमेंट पर सरकार 0.5% चार्ज वसूलेगी, ₹5,000 पर ₹25 और ₹10,000 पर ₹50 के उदाहरण के साथ। इस दावे के साथ 14 सितंबर की असली गजट अधिसूचना की फोटो भी शेयर हो रही थी, जो असल में इसका उलट कहती थी, ₹2,000 तक के UPI लेनदेन और सभी RuPay डेबिट कार्ड भुगतान पर कोई चार्ज नहीं लगेगा। भाजपा नेता अमित मालवीय ने इस 0.5% वाले दावे को झूठा बताया था।
अब सिर्फ एक दिन बाद, 15 सितंबर को, वित्त मंत्रालय और NPCI ने खुद आगे आकर असली आंकड़ा बता दिया, दर 0.5% नहीं, 0.4% है, और यह ग्राहक से नहीं, मर्चेंट से वसूली जाएगी।
NPCI ने क्या घोषणा की
15 सितंबर 2026 को वित्त मंत्रालय और NPCI ने स्पष्ट किया कि व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) UPI लेनदेन, यानी दोस्तों-रिश्तेदारों के बीच पैसे भेजना, राशि चाहे जो भी हो, पूरी तरह मुफ्त बना रहेगा। बदलाव सिर्फ व्यक्ति-से-दुकानदार (P2M) लेनदेन में हो रहा है, और वह भी सिर्फ ₹2,000 से ऊपर के भुगतान पर।
किसे चार्ज देना होगा, किसे नहीं
श्रेणी | नियम |
|---|---|
P2P (दोस्त, परिवार को भेजना) | हमेशा की तरह पूरी तरह मुफ्त, राशि कोई भी हो |
मर्चेंट पेमेंट ₹2,000 तक | पूरी तरह मुफ्त, कोई MDR नहीं |
मर्चेंट पेमेंट ₹2,000 से ऊपर | 0.4% MDR, ₹75,000 या उससे ऊपर के लेनदेन पर अधिकतम ₹300 कैप |
छोटे दुकानदार (P2PM, महीने में ₹1 लाख तक UPI से पाने वाले) | पूरी तरह मुफ्त, राशि कोई भी हो |
रेलवे, टेलिकॉम, बिजली, पानी, पाइप्ड गैस, बीमा जैसी ज़रूरी सेवाएं | ₹2,000 से ऊपर सिर्फ ₹5 फ्लैट चार्ज |
कैपिटल मार्केट लेनदेन | 0.02% MDR, अधिकतम ₹300 |
चार्ज देगा कौन, ग्राहक या दुकानदार
NPCI ने साफ कहा है कि यह MDR मर्चेंट यानी दुकानदार से वसूला जाएगा, ग्राहक की जेब पर सीधा असर नहीं पड़ेगा। बैंकों को हिदायत दी गई है कि वे यह सुनिश्चित करें कि दुकानदार यह चार्ज ग्राहकों पर न डालें। साथ ही, UPI ऐप बनाने वाली कंपनियां, जैसे PhonePe, Google Pay या Paytm, किसी भी तरह की प्लेटफॉर्म फीस या छिपा हुआ चार्ज सीधे यूज़र से नहीं वसूल सकतीं।
यह चार्ज आया कहां से, पूरी टाइमलाइन
अगस्त 2026: संसद ने टैक्सेशन एंड अदर लॉज़ (अमेंडमेंट) बिल, 2026 पास किया, जिसने पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 की धारा 10A में बदलाव किया। पहले यह तय होता था कि इनकम टैक्स एक्ट में दर्ज पेमेंट मोड अपने आप चार्ज-फ्री रहेंगे, अब यह अधिकार सीधे केंद्र सरकार के पास आ गया, वह अधिसूचना जारी करके तय करेगी। उस वक्त विपक्ष ने आरोप लगाया था कि यह UPI की मुफ्त सुविधा खत्म करने की तैयारी है, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में जवाब दिया था कि यह सिर्फ एक सक्षम प्रावधान है, तुरंत कोई चार्ज नहीं लगता, फैसला आगे NPCI की स्टीयरिंग कमेटी करेगी।
17 अगस्त 2026: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बिल को मंज़ूरी दी।
14 सितंबर 2026: वित्त मंत्रालय ने गजट अधिसूचना S.O. 5067(E) जारी की, जिसमें ₹2,000 तक के UPI लेनदेन और सभी RuPay डेबिट कार्ड भुगतान को चार्ज-फ्री घोषित किया गया।
15 सितंबर 2026: उसी दिन सोशल मीडिया पर 0.5% चार्ज का भ्रामक दावा वायरल हुआ, और उसी दिन शाम को NPCI ने असली 0.4% MDR फ्रेमवर्क की घोषणा कर दी, साथ में पूरी FAQ शीट भी जारी की।
15 अक्टूबर 2026: नया MDR ढांचा लागू होगा।
यह चार्ज क्यों लगाया जा रहा है
सरकार अब तक UPI और RuPay डेबिट कार्ड लेनदेन को सब्सिडी देकर मुफ्त बनाए रखती थी, इस मद में सालाना हज़ारों करोड़ रुपये खर्च होते थे। इंडस्ट्री का अनुमान है कि UPI का सर्वर, फ्रॉड रोकथाम सिस्टम और बैंकों का तकनीकी सहयोग बनाए रखने में हर साल करीब ₹20,000 करोड़ का खर्च आता है, जो अकेले सरकारी बजट से लंबे समय तक टिकाऊ नहीं था। जो MDR अब वसूला जाएगा, वह बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और ऐप कंपनियों के बीच बंटेगा, और उसका एक हिस्सा इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए भी रखा जाएगा।
फैक्ट-चेक नतीजा
वायरल दावा आधा सही, आधा गलत निकला। दिशा सही थी, यह सच है कि ₹2,000 से ऊपर के UPI लेनदेन पर चार्ज आ रहा था, लेकिन बाकी सारी डिटेल गलत थी।
दर 0.5% नहीं, 0.4% है।
यह चार्ज ग्राहक नहीं, दुकानदार देगा। वायरल मैसेज में जो ₹25 और ₹50 की मिसालें दी गई थीं, वह ग्राहक की जेब से कटने का गलत प्रभाव देती थीं।
दोस्तों-रिश्तेदारों के बीच होने वाला रोज़मर्रा का UPI लेनदेन (P2P) पूरी तरह मुफ्त बना हुआ है, चाहे राशि कितनी भी हो।
छोटे दुकानदार, जो महीने में ₹1 लाख तक UPI से कमाते हैं, इस चार्ज के दायरे से पूरी तरह बाहर हैं।
