उज्जैन: जलती चिता से कथित मांस खाने के वीडियो के बाद अघोरी काली उर्फ नंद गिरी गिरफ्तार, अब सामने आए पुराने विवाद
चक्रतीर्थ श्मशान घाट पर जलती चिता से कथित तौर पर मानव मांस निकालकर खाने का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने किन्नर अघोरी काली उर्फ नंद गिरी को गिरफ्तार कर 15 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा। गिरफ्तारी के बाद अघोर अखाड़े ने SP को शिकायत सौंपकर उसके पुराने विवादों की जांच की मांग की है।

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उज्जैन के चक्रतीर्थ श्मशान घाट से जुड़ा एक विवादास्पद मामला इन दिनों चर्चा में है। खुद को किन्नर अघोरी और "लेडी अघोरी" बताने वाली काली उर्फ नंद गिरी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसके बाद पुलिस कार्रवाई से लेकर संत समाज के विरोध तक, मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है।
क्या है पूरा मामला
30 अगस्त 2026 की रात चक्रतीर्थ श्मशान घाट पर काली उर्फ नंद गिरी का एक वीडियो सामने आया, जिसमें वह जलती चिता के पास तलवार की मदद से कथित तौर पर कुछ निकालकर खाती नज़र आ रही है। वीडियो में वह उसे गर्म और स्वादिष्ट बताते हुए लोगों को खुद से बचकर रहने की चेतावनी भी देती है। यह वीडियो कथित तौर पर उसने खुद अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से पोस्ट किया था।
वीडियो में चिता से निकाली गई सामग्री को कथित तौर पर मानव मांस बताया जा रहा है, लेकिन केवल वीडियो के आधार पर यह पुष्टि के साथ नहीं कहा जा सकता कि वह वास्तव में मानव शरीर का हिस्सा ही था। इस बिंदु पर अभी तक कोई फॉरेंसिक या आधिकारिक पुलिस पुष्टि सार्वजनिक तौर पर सामने नहीं आई है।
शिकायत, FIR और गिरफ्तारी
काल भैरव घाट निवासी तांत्रिक विष्णुनाथ ने 30 अगस्त को जीवाजीगंज थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि आरोपी ने जलती चिता पर जल रहे मानव शव के साथ अमानवीय कृत्य कर उसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया, जिससे शव की अवहेलना हुई और धार्मिक भावनाएं आहत हुईं।
शिकायत और वायरल वीडियो के आधार पर जीवाजीगंज थाना पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 301 के तहत मामला दर्ज कर आरोपी को हिरासत में लिया। जांच के बाद औपचारिक गिरफ्तारी हुई और कोर्ट में पेशी के बाद आरोपी को 15 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
गिरफ्तारी से ठीक पहले काली ने श्मशान घाट में भस्म लगाए एक और वीडियो पोस्ट कर शिकायतकर्ताओं को खुली चेतावनी दी थी, हालांकि उस वीडियो की सामग्री को लेकर भी पुलिस या अदालत की तरफ से कोई आधिकारिक बयान अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है।
गिरफ्तारी के बाद उठे पुराने विवाद
गिरफ्तारी के बाद अघोर अखाड़े के पीठाधीश्वर एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा नाथ संप्रदाय के बालयोगी विष्णुनाथजी खड़ेश्वरी अघोरी बाबा ने पुलिस अधीक्षक को पत्र सौंपकर जांच और कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने वायरल वीडियो की निंदा करते हुए कहा कि इस तरह की गतिविधियों से उज्जैन की धार्मिक और आध्यात्मिक छवि प्रभावित होती है। आवेदन के साथ उन्होंने काली से जुड़े बताए जा रहे कुछ पुराने फोटो-वीडियो भी पुलिस को सौंपे हैं, जिनकी अभी जांच चल रही है।
विष्णुनाथजी खड़ेश्वरी का दावा है कि काली नंद गिरी पूर्व में पुरुष थी और उसकी पहचान कथित तौर पर अल्लूरी श्रीनिवास के नाम से थी, जिसने बाद में जेंडर चेंज कराकर किन्नर के रूप में पहचान बनाई और सोशल मीडिया पर 'लेडी अघोरी' के नाम से खुद को स्थापित किया। इसके अलावा तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में भी उसके द्वारा विवाद खड़े किए जाने के दावे किए जा रहे हैं।
गौरतलब है कि पहचान, जेंडर चेंज और तेलंगाना-आंध्र प्रदेश से जुड़े इन दावों की अभी तक कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है — ये फिलहाल शिकायतकर्ताओं और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित हैं। पुलिस रिकॉर्ड, मेडिकल दस्तावेज़ों और न्यायालयीन अभिलेखों से इनकी अंतिम पुष्टि होना अभी बाकी है।
2025 के दो और आरोप सामने आए
गिरफ्तारी के बाद सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, काली नंद गिरी पर 2025 में भी दो अलग-अलग आरोप लग चुके हैं—
कथित ठगी का मामला: उत्तर प्रदेश की एक महिला फिल्म निर्माता ने आरोप लगाया था कि अनुष्ठान के नाम पर उससे कथित तौर पर 10 लाख रुपये ऐंठे गए और धमकी दी गई। इस शिकायत पर तेलंगाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए गिरफ्तारी की थी।
विवाह से जुड़ा विवाद: 2025 में एक युवती के साथ काली की शादी की तस्वीरें वायरल हुई थीं। युवती ने बाद में आरोप लगाया कि वह अघोरी साधना की जानकारी लेने के इरादे से संपर्क में आई थी, लेकिन उस पर कथित तौर पर शादी के लिए दबाव बनाया गया और डराया-धमकाया गया। एक दूसरी महिला ने भी इसी तरह के आरोप लगाए थे।
ये दोनों मामले भी आरोप के स्तर पर हैं और इनमें आरोपी पक्ष का जवाब अभी सार्वजनिक रिपोर्टों में शामिल नहीं है।
अखाड़ों की राजनीति भी सामने आई
काली नंद गिरी खुद को किन्नर अखाड़े से जुड़ा और कई बार खुद को "महामंडलेश्वर" बताती रही है, जबकि अघोर अखाड़ा और नाथ संप्रदाय के पदाधिकारी इसे "पाखंड" करार देकर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और स्थानीय साधु-संतों ने भी इस कृत्य को सनातन परंपरा का अपमान बताते हुए कड़ा विरोध जताया है। स्थानीय स्तर पर आरोपी को उज्जैन ज़िले से बाहर करने की मांग भी उठी है, जो अब पुलिस अधीक्षक तक पहुंच चुकी है।
