मां-बेटी हत्याकांड के दोषी को 10 साल की सजा, कोर्ट से निकलते ही हंसा कुलदीप; कैमरे पर बोला- स्माइली वाला दिखाइएगा
सूरजपुर के चर्चित दोहरे हत्याकांड में आरोपी कुलदीप साहू को पुलिसकर्मियों को कार से कुचलने के प्रयास के मामले में 10 साल का सश्रम कारावास मिला। दोहरे हत्याकांड में चार आरोपियों पर हत्या का दोष सिद्ध हुआ है, जिनकी सजा पर 8 अक्टूबर को फैसला होगा।

Audio tools for this article
अंबिकापुर से सूरजपुर कोर्ट तक सोमवार को सुरक्षा के बीच लाया गया कुलदीप साहू सजा सुनाए जाने के बाद भी चर्चा में रहा। पुलिसकर्मियों को कार से कुचलने के प्रयास के मामले में उसे 10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई। कोर्ट से बाहर निकलते समय वह कैमरों के सामने हंसता नजर आया और कथित तौर पर बोला, “स्माइली वाला दिखाइएगा।” उसका यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है।
दो अलग मामलों में आया अदालत का फैसला
फास्ट ट्रैक कोर्ट के जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश आनंद प्रकाश वारियाल ने सोमवार को मामले में अलग-अलग आरोपों पर फैसला सुनाया। पुलिसकर्मियों को कार से कुचलने के प्रयास के मामले में कुलदीप साहू को 10 साल की सजा दी गई।
वहीं 13 अक्टूबर 2024 की रात हुए मां-बेटी हत्याकांड में कुलदीप साहू, रिंकू उर्फ फूल सिंह, चंद्रकांत चौधरी और आर्यन विश्वकर्मा पर हत्या का आरोप सिद्ध माना गया है। इन चारों की सजा की घोषणा 8 अक्टूबर को की जाएगी।
कोर्ट से बाहर निकला तो कैमरों पर दिया रिएक्शन
फैसले के बाद कुलदीप को सुरक्षा घेरे में बाहर लाया गया। इसी दौरान वहां मौजूद मीडिया और वीडियो बना रहे लोगों की ओर देखकर वह हंसता नजर आया।
उसके कथित “स्माइली वाला दिखाइएगा” कहने का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर वायरल हो रहा है। कोर्ट परिसर में मौजूद लोगों के बीच भी उसका यह व्यवहार चर्चा का विषय बना।
13 अक्टूबर की रात हुई थी मां-बेटी की हत्या
मामला 13 अक्टूबर 2024 की रात का है। सूरजपुर थाने में पदस्थ प्रधान आरक्षक तालिब शेख की पत्नी और नाबालिग बेटी की उनके किराए के मकान में चाकू से हत्या कर दी गई थी।
हत्या के बाद दोनों के शव पीढ़ा गांव के पास फेंके जाने का आरोप था। इसी रात पुराना बस स्टैंड चौपाटी में आरक्षक घनश्याम सोनवानी पर गर्म तेल फेंककर हमला किए जाने की घटना भी सामने आई थी।
इसके बाद प्रधान आरक्षक तालिब शेख समेत पुलिसकर्मियों पर कार चढ़ाने की कोशिश का मामला सामने आया, जिसमें कुलदीप साहू को दोषी ठहराया गया और 10 साल की सजा सुनाई गई।
पुलिस टीम पर हमले के दूसरे आरोप में राहत
घटना के बाद भागते समय लटोरी में बिश्रामपुर के तत्कालीन टीआई अलरिक लकड़ा पर फायरिंग का भी आरोप लगा था। इस मामले में कुलदीप साहू और सूरज साहू को पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के कारण दोषमुक्त कर दिया गया।
इसी फैसले में सूरज साहू और निलकेश्वर साहू को दोहरे हत्याकांड के आरोप से भी दोषमुक्त किया गया।
कुलदीप पर पहले से दर्ज थे कई मामले
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार कुलदीप साहू के खिलाफ दो दर्जन से अधिक मामले पहले से दर्ज थे और उसका नाम गुंडा-बदमाशों की सूची में शामिल था।
दोहरे हत्याकांड के बाद सूरजपुर में लोगों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की थी। घटना के बाद प्रशासन ने कुलदीप से जुड़े अवैध निर्माण पर भी कार्रवाई की थी।
गिरफ्तारी के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी हुआ था एक्शन
घटना के बाद फरार हुए कुलदीप साहू को बलरामपुर पुलिस ने गिरफ्तार किया था। मामले की गंभीरता के बीच तत्कालीन कलेक्टर और एसपी को भी हटाया गया था।
कुलदीप से संपर्क रखने के मामले में आरक्षक प्रदीप साहू को बर्खास्त किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी। राज्य शासन की अनुमति के बाद सहायक संचालक अभियोजन सुरेश शर्मा को इस केस में विशेष लोक अभियोजक नियुक्त किया गया था।
अप्रैल 2026 से शुरू हुई थी गवाही
मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में हुई। अप्रैल 2026 से गवाहों के बयान दर्ज किए जाने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। अब दोहरे हत्याकांड में दोषी ठहराए गए चार आरोपियों की सजा पर 8 अक्टूबर को अदालत का फैसला आएगा।