13 साल बाद झीरम घाटी कांड में आया फैसला, NIA कोर्ट ने 10 आरोपियों को ठहराया दोषी; 16 सितंबर को सजा पर फैसला
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में 13 साल बाद अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। जगदलपुर की विशेष NIA अदालत ने मामले में सुनवाई का सामना कर रहे सभी 10 जीवित आरोपियों को दोषी करार दिया। अदालत ने 27 हत्याओं और 15 हत्या के प्रयास से जुड़े आरोपों में दोष सिद्ध किया है। अब सजा की अवधि पर 16 सितंबर को सुनवाई होगी।

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13 साल से जिस फैसले का इंतजार था, वह आखिरकार आ गया। छत्तीसगढ़ के झीरम घाटी कांड में जगदलपुर की विशेष NIA अदालत ने मामले में ट्रायल का सामना कर रहे सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है।
25 मई 2013 को बस्तर की झीरम घाटी में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर हुए माओवादी हमले ने छत्तीसगढ़ की राजनीति को हिलाकर रख दिया था। इस हमले में कांग्रेस के कई बड़े नेताओं समेत 27 लोगों की जान गई थी और 38 लोग घायल हुए थे। NIA के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी 27 मौतों और 38 घायलों का उल्लेख है।
अब अदालत के फैसले के बाद अगली नजर 16 सितंबर पर है, जब दोषी ठहराए गए आरोपियों की सजा की मात्रा तय की जाएगी।
294 सुनवाइयों के बाद आया फैसला
झीरम घाटी मामला सिर्फ लंबा नहीं चला, बल्कि इसकी सुनवाई वर्षों तक कई चरणों में आगे बढ़ी। अंतिम बहस अगस्त में पूरी हुई थी। इसके बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा और पहले 31 अगस्त को निर्णय सुनाने की तारीख तय की थी।
31 अगस्त को फैसला आगे बढ़ाकर 5 सितंबर कर दिया गया। आखिरकार शनिवार को अदालत ने अपना निर्णय सुना दिया।
11 आरोपियों में से अब 10 के खिलाफ फैसला
इस मुकदमे में शुरुआत में 11 गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ सुनवाई चली। ट्रायल के दौरान एक आरोपी की मौत हो गई, जिसके बाद 10 आरोपी सुनवाई का हिस्सा रहे।
अदालत ने इन सभी 10 को दोषी माना है। वहीं NIA की जांच में नामजद कई अन्य आरोपी अब भी फरार बताए गए हैं। NIA के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक मामले में शुरुआती चार्जशीट 2014 में दाखिल हुई थी और 2015 में सप्लीमेंट्री चार्जशीट पेश की गई थी।
101 गवाहों की गवाही के बाद बंद हुई सुनवाई
इस मामले में अभियोजन पक्ष ने लंबी न्यायिक प्रक्रिया के दौरान 101 गवाह पेश किए। इतने वर्षों में जांच से लेकर गवाही और अंतिम बहस तक मामला कई चरणों से गुजरा।
अगस्त में अंतिम दलीलें पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब दोषसिद्धि के बाद मुकदमे का अगला महत्वपूर्ण चरण सजा पर बहस का है।
25 मई 2013 को क्या हुआ था?
2013 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा बस्तर से गुजर रही थी। 25 मई को यात्रा का काफिला झीरम घाटी के रास्ते से गुजर रहा था, तभी माओवादियों ने घात लगाकर हमला कर दिया।
NIA के रिकॉर्ड के मुताबिक हमले में 27 लोगों की मौत हुई और 38 लोग घायल हुए। हमले के दौरान हथियार और अन्य सामग्री भी लूटे जाने का उल्लेख जांच रिकॉर्ड में है।
कांग्रेस की पूरी शीर्ष पंक्ति पर हुआ था हमला
झीरम घाटी हमले में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, वरिष्ठ कांग्रेस नेता महेंद्र कर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल और पूर्व विधायक उदय मुदलियार समेत कई प्रमुख नेता मारे गए थे। सुरक्षा बलों के जवान और पार्टी कार्यकर्ता भी हमले में जान गंवाने वालों में शामिल थे।
महेंद्र कर्मा को बस्तर में नक्सल विरोधी अभियान के प्रमुख चेहरों में गिना जाता था। ऐसे में झीरम हमला केवल एक राजनीतिक काफिले पर हमला नहीं था, बल्कि उस समय छत्तीसगढ़ के राजनीतिक नेतृत्व पर हुए सबसे बड़े हमलों में शामिल रहा।
अब 16 सितंबर को तय होगी सजा
दोषी करार दिए जाने के बाद अब अदालत सजा के सवाल पर सुनवाई करेगी। रिपोर्टों के मुताबिक 16 सितंबर को सजा की मात्रा पर फैसला होना है।
हालांकि इस फैसले के साथ एक बड़ा सवाल अभी भी चर्चा में रहेगा। झीरम हमले की व्यापक साजिश और इसके पीछे मौजूद सभी लोगों तक जांच किस हद तक पहुंची, इसे लेकर वर्षों से राजनीतिक बहस होती रही है। NIA के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी आगे की जांच फरार आरोपियों को लेकर जारी रहने की बात दर्ज है।
13 साल बाद आए इस फैसले ने मुकदमे के एक अहम अध्याय को जरूर बंद किया है, लेकिन मामले से जुड़े बाकी सवालों और फरार आरोपियों को लेकर जांच की दिशा पर भी अब नजर रहेगी।



