SIR पर EC में मतभेद की रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग की सफाई, 8 प्वाइंट्स में बताया- अलग राय प्रक्रिया का हिस्सा
SIR और चुनावी रोल से जुड़े फैसलों पर दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों की रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग ने अपना पक्ष रखा है। आयोग ने कहा कि आंतरिक सुझाव और अलग-अलग राय निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हैं और उसके अनुसार अंतिम फैसले कानून व निर्धारित प्रक्रिया के तहत लिए गए हैं।

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स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेद की रिपोर्ट सामने आने के बाद आयोग ने 8 प्वाइंट्स में अपनी स्थिति स्पष्ट की है। आयोग ने कहा है कि तीन सदस्यीय संवैधानिक संस्था में अलग-अलग राय, टिप्पणियां और सुझाव आना सामान्य संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा है। उसके मुताबिक अंतिम फैसले आयोग की सामूहिक प्रक्रिया और कानूनी प्रावधानों के तहत लिए गए हैं।
यह सफाई ऐसे समय आई है जब इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर औपचारिक आपत्तियां दर्ज कीं। रिपोर्ट में इन आपत्तियों को SIR, नए मतदाताओं के पंजीकरण, नाम हटाने और चुनावी डेटा के प्रबंधन जैसे मुद्दों से जोड़ा गया है।
आयोग ने कहा- ECI सामूहिक संवैधानिक संस्था
चुनाव आयोग ने अपने स्पष्टीकरण में कहा कि ECI संविधान के अनुच्छेद 324, संबंधित कानूनों और स्थापित संस्थागत प्रक्रियाओं के तहत काम करता है। आयोग ने अपने कामकाज में लिखित नोट्स, टिप्पणियों, तकनीकी सुझावों और आंतरिक जांच-पड़ताल को सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा बताया है।
आयोग के मुताबिक, ये व्यवस्थाएं चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता, कानूनी अनुपालन और प्रशासनिक स्तर पर जरूरी जांच सुनिश्चित करने के लिए इस्तेमाल की जाती हैं।
अलग राय को बताया सामान्य प्रक्रिया
ECI ने कहा कि किसी भी संस्था में अंतिम निर्णय से पहले अलग-अलग विचार सामने आना असामान्य नहीं है। आयोग के मुताबिक कमिश्नरों की ओर से दिए गए सुझाव चुनावी प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए होते हैं।
आयोग ने यह भी कहा कि केवल चुनाव आयुक्त ही नहीं, बल्कि आयोग का कोई भी अधिकारी चुनाव व्यवस्था से संबंधित सुझाव दे सकता है। यानी किसी आंतरिक नोट या टिप्पणी को अपने आप अंतिम निर्णय नहीं माना जा सकता।
आयोग का दावा- अंतिम फैसले सर्वसम्मति से
ECI ने कहा कि पिछले एक साल में लिए गए उसके फैसले पूरे आयोग की सहमति से लिए गए हैं। आयोग ने यह भी कहा कि कुछ चुनिंदा आंतरिक नोट्स या टिप्पणियों को अलग से सामने रखने पर तस्वीर का केवल एक हिस्सा दिखाई देता है।
आयोग के अनुसार, इसी अवधि में कई आदेश और निर्देश जारी किए गए तथा करीब 40 नई पहल शुरू की गईं। इनमें चुनावी रोल के रिवीजन और SIR से जुड़े काम भी शामिल हैं।
किन राज्यों में हुए चुनावों का हवाला दिया?
चुनाव आयोग ने अपनी सफाई में बिहार, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, असम और पश्चिम बंगाल में हाल में हुए चुनावों और उनसे जुड़ी चुनावी प्रक्रियाओं का भी उल्लेख किया।
आयोग ने कहा कि इन चुनावों के संचालन में बड़े पैमाने पर प्रशासनिक और ऑपरेशनल व्यवस्था के साथ आयोग की कई मंजूरियां और निर्देश शामिल थे। इन उदाहरणों के जरिए आयोग ने अपनी सामूहिक निर्णय प्रक्रिया और कामकाज का पक्ष रखा।
ECINet और डेटा सुरक्षा पर क्या कहा?
चुनाव आयोग ने अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म ECINet सहित अन्य तकनीकी प्रणालियों की सुरक्षा को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। आयोग के मुताबिक इन प्लेटफॉर्म पर डेटा से छेड़छाड़ और अनधिकृत बदलाव रोकने के लिए सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू हैं।
आयोग ने कहा कि IT सिक्योरिटी चेक, ऑडिट और साइबर सुरक्षा उपाय राष्ट्रीय स्तर के डेटाबेस पर लागू किए जाते हैं। Electoral Registration Officers और District Election Officers को भी कानून के तहत मतदाता पंजीकरण और नाम हटाने से जुड़े अधिकार प्राप्त हैं।
हालांकि, इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में चुनाव आयुक्तों की ओर से चुनावी रोल मैनेजमेंट सिस्टम और केंद्रीकृत IT व्यवस्था को लेकर अलग-अलग आपत्तियां दर्ज किए जाने का दावा किया गया है।
रिपोर्ट में 14 आपत्तियों का दावा
इंडियन एक्सप्रेस की 23 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों के दौरान कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज कीं। रिपोर्ट में कहा गया कि कुछ आपत्तियां इस बात को लेकर थीं कि फैसले या निर्देश उनकी जानकारी या मंजूरी के बिना जारी किए गए।
रिपोर्ट में Form 6 में बदलाव, मतदाता नाम जोड़ने-हटाने की प्रक्रिया और चुनावी रोल से जुड़े IT सिस्टम के संचालन पर भी सवालों का उल्लेख है।
तीन सदस्यीय आयोग में कौन-कौन?
फिलहाल चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी शामिल हैं। ECI की आधिकारिक डायरेक्टरी में तीनों के पद और नाम दर्ज हैं।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में जिन आंतरिक आपत्तियों का जिक्र है, वे इन्हीं तीन सदस्यों वाले आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़ी हैं।
अब विवाद का केंद्र क्या है?
एक तरफ आयोग कह रहा है कि अलग-अलग राय और आंतरिक टिप्पणियां किसी भी सामूहिक निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हैं और अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए। दूसरी ओर, रिपोर्ट में दो चुनाव आयुक्तों की ओर से दर्ज आपत्तियों और उनके उठाए गए प्रक्रियात्मक सवालों का विवरण दिया गया है।
इसलिए फिलहाल मुख्य सवाल यह है कि आंतरिक स्तर पर दर्ज की गई आपत्तियों का अंतिम निर्णयों पर क्या प्रभाव पड़ा और संबंधित रिकॉर्ड में फैसले किस प्रक्रिया के तहत दर्ज हुए। इन पहलुओं पर आयोग की सफाई और रिपोर्ट में सामने आए दस्तावेजों के बीच अंतर को समझना आगे की चर्चा का अहम हिस्सा रहेगा।


