
‘मेरी निजी जानकारी क्यों फैलाई?’ CJP प्रवक्ता सौरव दास पहुंचे दिल्ली हाई कोर्ट, अभिजीत अय्यर मित्रा समेत कई पर आरोप
CJP प्रवक्ता सौरव दास ने निजी जानकारी और आवासीय पता सार्वजनिक किए जाने का आरोप लगाते हुए दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। उन्होंने संबंधित ऑनलाइन सामग्री हटाने और उसके आगे प्रसार पर रोक लगाने की मांग की है।

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नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास ने अपनी निजी जानकारी सार्वजनिक किए जाने के आरोपों को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है। दास ने राजनीतिक विश्लेषक अभिजीत अय्यर मित्रा के साथ कुछ लॉ पोर्टल, मीडिया मंचों और डिजिटल प्लेटफॉर्म को भी अपनी याचिका में पक्षकार बनाया है। उनका आरोप है कि उनके घर का पता और निजी जीवन से जुड़ी जानकारी ऑनलाइन प्रसारित की गई, जिससे उनकी निजता के साथ-साथ सुरक्षा को लेकर भी चिंता पैदा हुई है।
निजी जानकारी सार्वजनिक करने का आरोप
सौरव दास के मुताबिक, इंटरनेट पर उनके आवासीय पते के अलावा उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि और माता-पिता से जुड़ी जानकारी भी सामने लाई गई। याचिका में दावा किया गया है कि यह जानकारी उनकी अनुमति के बिना जुटाई और अलग-अलग ऑनलाइन माध्यमों पर प्रसारित की गई। दास ने अदालत से ऐसी सामग्री की पहचान कर उसे सार्वजनिक मंचों से हटाने की मांग की है।
वीडियो और पोस्ट हटाने की मांग
याचिका में दिल्ली हाई कोर्ट से उन वीडियो, पोस्ट और दूसरी डिजिटल सामग्री को हटाने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है, जिनमें सौरव दास से संबंधित निजी विवरण मौजूद हैं। उन्होंने यह भी मांग की है कि संबंधित प्लेटफॉर्म ऐसी सामग्री को आगे शेयर या दोबारा प्रसारित होने से रोकने के लिए जरूरी कदम उठाएं। दास का कहना है कि निजी जानकारी के इस तरह सार्वजनिक होने से उनकी गरिमा और व्यक्तिगत सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
रिहायशी परिसर में पहुंचने का भी दावा
सौरव दास ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि कुछ लोग उनके दक्षिण दिल्ली स्थित रिहायशी परिसर तक भी पहुंचे। दास के मुताबिक, परिसर के अंदरूनी हिस्सों की कथित तौर पर रिकॉर्डिंग की गई और बाद में इससे जुड़ी सामग्री ऑनलाइन साझा की गई। उनका कहना है कि इस तरह किसी व्यक्ति के निजी स्थान में पहुंचकर उसकी रिकॉर्डिंग करना निजता के अधिकार से जुड़ा गंभीर सवाल खड़ा करता है।
ग्रेटर कैलाश में रह रहे हैं सौरव दास
याचिका के अनुसार, सौरव दास पिछले करीब एक साल से दक्षिण दिल्ली के ग्रेटर कैलाश इलाके में किराए के कमरे में रह रहे हैं। उन्होंने अदालत के सामने अपनी मौजूदा स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा है कि उनके आवास से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक होने के बाद उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर आशंका है।
धमकियों और विरोध का भी किया जिक्र
दास ने अदालत को बताया है कि पत्रकारिता से जुड़े काम, सार्वजनिक मुद्दों पर सक्रियता और राजनीतिक गतिविधियों के कारण उन्हें पहले भी विरोध और धमकियों का सामना करना पड़ा है। उनका कहना है कि ऐसे माहौल में घर का पता और परिवार से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक होना केवल निजता का मामला नहीं है, बल्कि इससे उनके और उनके परिवार की सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है।
अदालत से स्थायी रोक की मांग
सौरव दास ने हाई कोर्ट से संबंधित पक्षों को निजी जानकारी वाली सामग्री हटाने के साथ-साथ भविष्य में ऐसी सामग्री प्रकाशित या प्रसारित करने से रोकने के लिए भी निर्देश देने की मांग की है। उनकी याचिका में एक्स और गूगल जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी उल्लेख किया गया है। अब मामले में अदालत का रुख और संबंधित पक्षों की ओर से सामने आने वाला जवाब महत्वपूर्ण होगा।
आरोपों पर न्यायिक प्रक्रिया से स्थिति होगी साफ
फिलहाल सौरव दास की याचिका में लगाए गए आरोप अदालत के समक्ष विचाराधीन हैं। किसने कौन-सी जानकारी किस तरीके से हासिल की और उसे सार्वजनिक करने की प्रक्रिया क्या थी, इन सवालों पर आगे की न्यायिक कार्यवाही में स्थिति स्पष्ट होगी। दास ने फिलहाल अपनी मुख्य मांग निजी जानकारी हटाने, उसके प्रसार पर रोक लगाने और अपनी निजता व सुरक्षा की रक्षा से जुड़ी बताई है।


