AMU में VC के बेटे की प्रोफेसर नियुक्ति पर घमासान! शिक्षा मंत्रालय ने मांगा जवाब, नियमों पर उठे सवाल
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में वाइस-चांसलर नईमा खातून के बेटे अली फरान गुलरेज की असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। पूर्व छात्रों और शिक्षकों की शिकायतों के बाद शिक्षा मंत्रालय ने AMU से जवाब मांगा है। विवाद नियुक्ति प्रक्रिया, रिश्तेदार की भर्ती से जुड़े दिशानिर्देश और चयन समिति के गठन को लेकर है।

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उत्तर प्रदेश। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी यानी AMU में एक नियुक्ति ने अब विश्वविद्यालय प्रशासन से लेकर शिक्षा मंत्रालय तक सवाल खड़े कर दिए हैं। विवाद वाइस-चांसलर नईमा खातून के बेटे अली फरान गुलरेज की कानून विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति को लेकर है। नियुक्ति के बाद पूर्व छात्रों और कुछ शिक्षकों ने प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए शिकायतें की हैं। इसके बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने AMU से इस मामले में जवाब मांगा है।
क्या है पूरा विवाद?
अली फरान गुलरेज को डॉ. बीआर आंबेडकर चेयर के तहत असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्त किया गया है। यह पद आंबेडकर के विचारों, सामाजिक न्याय, समानता और वंचित वर्गों से जुड़े विषयों पर शिक्षण और शोध से संबंधित है। नियुक्ति पांच साल या चेयर की अवधि समाप्त होने तक के लिए बताई गई है।
नियुक्ति के लिए जनरल सिलेक्शन कमेटी की बैठक 24 जून को हुई थी और 16 जुलाई को नियुक्ति की जानकारी जारी की गई। इसके बाद सवाल उठा कि जब उम्मीदवार खुद विश्वविद्यालय की VC के बेटे हैं, तो क्या नियुक्ति प्रक्रिया में लागू नियमों के मुताबिक मंत्रालय को इसकी जानकारी दी गई थी?
रिश्तेदार की नियुक्ति को लेकर क्या कहते हैं नियम?
विवाद की जड़ 2018 में तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से बनाए गए दिशानिर्देशों से जुड़ी है। इन नियमों में संस्थान के प्रमुख के करीबी रिश्तेदार के किसी पद के लिए आवेदन करने की स्थिति में पारदर्शिता बरतने की व्यवस्था की गई है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि ऐसे मामले में संस्थान के प्रमुख को अपने रिश्ते की जानकारी पहले देनी होती है और चयन प्रक्रिया से अलग रहना होता है। साथ ही मंत्रालय को भी इसकी जानकारी देने और जरूरत पड़ने पर चयन समिति में अतिरिक्त विशेषज्ञ शामिल करने का प्रावधान बताया गया है।
AMU का क्या कहना है?
AMU प्रशासन ने इन आरोपों को लेकर अलग रुख अपनाया है। विश्वविद्यालय का कहना है कि यह नियुक्ति सामान्य UGC भर्ती प्रक्रिया के तहत नहीं, बल्कि डॉ. आंबेडकर फाउंडेशन और AMU के बीच हुए MoU के तहत होती है।
विश्वविद्यालय का दावा है कि VC नईमा खातून ने चयन प्रक्रिया से खुद को अलग कर लिया था। उनके मुताबिक भर्ती से संबंधित फाइलें उनके सामने नहीं रखी गईं और चयन समिति की बैठक के दिन भी वह छुट्टी पर थीं।
AMU का यह भी कहना है कि इस पद के लिए चयन समिति में विशेषज्ञों का नामांकन MoU के तहत हुआ था और शिक्षा मंत्रालय को अतिरिक्त विशेषज्ञ नियुक्त करने की जानकारी देना जरूरी नहीं था।
शिक्षा मंत्रालय ने क्यों मांगा जवाब?
शिक्षा मंत्रालय के एक सूत्र के मुताबिक, मंत्रालय को VC के बेटे की नियुक्ति को लेकर शिकायतें मिली हैं। इसके बाद विश्वविद्यालय से जवाब मांगा गया है।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि मंत्रालय को पहले से यह जानकारी नहीं दी गई कि VC का बेटा इस पद का उम्मीदवार है। उनका दावा है कि अगर ऐसा किया जाता तो 2018 के दिशानिर्देशों के तहत अतिरिक्त बाहरी विशेषज्ञों को चयन प्रक्रिया में शामिल किया जा सकता था।
अब मंत्रालय के सामने मुख्य सवाल यही है कि इस नियुक्ति पर कौन-से नियम लागू होते हैं और क्या निर्धारित प्रक्रिया का पूरी तरह पालन किया गया।
चयन समिति के गठन पर भी सवाल
मामला सिर्फ उम्मीदवार के रिश्ते तक सीमित नहीं है। कुछ शिक्षकों ने चयन समिति के गठन और बाहरी विशेषज्ञों के चयन पर भी सवाल उठाए हैं।
AMU का कहना है कि विश्वविद्यालय के नियमों के तहत प्रो-वाइस-चांसलर ने चयन समिति का गठन किया था और बाद में इसकी जानकारी एग्जीक्यूटिव काउंसिल को दी गई। विश्वविद्यालय के अनुसार समिति में दो बाहरी विशेषज्ञ भी शामिल थे।
वहीं, शिकायतकर्ताओं का सवाल है कि बाहरी विशेषज्ञों का चयन किस वैधानिक प्रक्रिया के तहत किया गया और क्या उस समय एग्जीक्यूटिव काउंसिल की मंजूरी जरूरी थी।
VC की नियुक्ति पर भी पहले उठ चुके हैं सवाल
नईमा खातून की AMU की वाइस-चांसलर के तौर पर नियुक्ति भी पहले कानूनी विवाद में रही है। उनकी नियुक्ति को लेकर याचिकाएं दायर की गई थीं और उनके पति प्रो. मोहम्मद गुलरेज की भूमिका पर सवाल उठाए गए थे।
हालांकि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मई 2025 में याचिकाएं खारिज कर दी थीं। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था।
अब मंत्रालय के जवाब पर टिकी नजर
फिलहाल AMU में VC के बेटे की नियुक्ति को लेकर विवाद का अगला चरण शिक्षा मंत्रालय की जांच और विश्वविद्यालय के जवाब पर निर्भर करेगा। एक तरफ शिकायतकर्ता नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमों के पालन पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं विश्वविद्यालय का कहना है कि VC ने प्रक्रिया से खुद को अलग रखा था और नियुक्ति संबंधित MoU के तहत हुई।
ऐसे में अब यह देखना अहम होगा कि शिक्षा मंत्रालय AMU के जवाब और नियुक्ति प्रक्रिया में लागू नियमों की समीक्षा के बाद क्या निष्कर्ष निकालता है।



