‘राहुल गांधी कोई VVIP नहीं’, दलील पर CJI सूर्यकांत बोले- हमारे लिए सब बराबर; जल्द सुनवाई पर क्या कहा?
राहुल गांधी से जुड़े आपराधिक मानहानि मामले में जल्द सुनवाई की मांग पर सुप्रीम कोर्ट में तीखी बहस हुई। शिकायतकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने कहा कि राहुल गांधी कोई VVIP नहीं हैं और उनकी याचिका पांच महीने से लिस्ट नहीं हुई। इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि कोर्ट के लिए सभी बराबर हैं और जल्द सुनवाई के लिए उचित आवेदन दाखिल किया जाए।

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सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को राहुल गांधी से जुड़े एक आपराधिक मानहानि मामले की सुनवाई जल्द कराने की मांग उठी। शिकायतकर्ता की ओर से दलील दी गई कि राहुल गांधी की अपील कई महीनों से सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हुई है।
इस दौरान ‘VVIP’ शब्द का जिक्र होते ही CJI सूर्यकांत ने अदालत का रुख साफ कर दिया। उन्होंने कहा कि कोर्ट के सामने सभी पक्ष समान हैं और जल्द सुनवाई के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा।
‘राहुल गांधी कोई VVIP नहीं हैं’
शिकायतकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने कहा कि राहुल गांधी कोई VVIP नहीं हैं। उन्होंने अदालत को बताया कि मामले से जुड़ी अपील करीब पांच महीने पहले भी लिस्ट हुई थी, लेकिन उस पर सुनवाई नहीं हो सकी।
भाटिया ने इसे संस्था के लिए भी अच्छा नहीं बताया।
इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि अदालत को प्रक्रिया का पालन करने दिया जाए। उन्होंने जल्द सुनवाई के लिए आवेदन दाखिल करने को कहा और स्पष्ट किया कि कोर्ट के लिए सभी बराबर हैं।
CJI ने भरोसा दिलाया कि उचित आवेदन आने पर अदालत मामले पर सुनवाई करेगी।
चीन सीमा पर बयान से जुड़ा है मामला
यह आपराधिक मानहानि मामला राहुल गांधी के दिसंबर 2022 के उस बयान से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने भारत-चीन सीमा विवाद को लेकर सरकार पर सवाल उठाए थे।
राहुल गांधी ने अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिकों और भारतीय जवानों के बीच कथित झड़प का जिक्र करते हुए भारतीय सैनिकों की स्थिति को लेकर टिप्पणी की थी। इसी बयान को आधार बनाकर उनके खिलाफ मानहानि की शिकायत दाखिल की गई।
शिकायतकर्ता बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन के पूर्व निदेशक उदय शंकर श्रीवास्तव हैं। उनके पक्ष से अधिवक्ता विवेक तिवारी ने शिकायत दायर की थी।
पहले सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर लगाई थी रोक
इस मामले में पहले जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने राहुल गांधी के खिलाफ कार्यवाही पर रोक लगाई थी।
सुनवाई के दौरान पीठ ने राहुल गांधी से यह भी सवाल किया था कि सीमा से जुड़े मुद्दे संसद में उठाने के बजाय सोशल मीडिया पर बयान क्यों दिए गए। अदालत ने यह जानना भी चाहा था कि उनके बयान किसी विश्वसनीय सूचना पर आधारित थे या नहीं।
समन के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे थे राहुल
मामले की शुरुआत लखनऊ की अदालत में शिकायत से हुई थी। एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट आलोक वर्मा ने राहुल गांधी को मानहानि मामले में पेश होने के लिए समन जारी किया था।
राहुल गांधी ने इस आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने समन को सही ठहराते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
अब जल्द सुनवाई के लिए आवेदन का रास्ता
इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ राहुल गांधी की अपील सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। बुधवार को अदालत के सामने इसी मामले की जल्द सुनवाई का मुद्दा उठा।
CJI सूर्यकांत की टिप्पणी के बाद फिलहाल रास्ता साफ है कि जल्द सुनवाई के लिए औपचारिक आवेदन दाखिल करना होगा। इसके बाद अदालत मामले को सुनवाई के लिए ले सकती है।
