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मुंबई-गोवा हाईवे पर गडकरी का बड़ा बयान, बोले- 15 साल बाद भी 94% काम; उद्घाटन में नहीं जाऊंगा
मुंबई-गोवा हाईवे के चौड़ीकरण में देरी पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने नाराजगी जताई।लोकस्वामी ग्राफिक्स
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मुंबई-गोवा हाईवे पर गडकरी का बड़ा बयान, बोले- 15 साल बाद भी 94% काम; उद्घाटन में नहीं जाऊंगा

Digital News Desk3 min read10/09/26

मुंबई-गोवा हाईवे के चौड़ीकरण में लगातार देरी पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि परियोजना का काम तय समय से काफी पीछे है और पूरा होने के बाद वे इसके उद्घाटन में शामिल नहीं होंगे।

Lokswami AI

मुंबई से गोवा के बीच सफर को आसान बनाने के लिए शुरू की गई हाईवे चौड़ीकरण परियोजना अब अपनी लंबी देरी को लेकर एक बार फिर चर्चा में है। करीब डेढ़ दशक से चल रहे इस प्रोजेक्ट की प्रगति पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सार्वजनिक तौर पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि जिस काम को 2016 तक पूरा हो जाना चाहिए था, वह अब तक 94 प्रतिशत ही पूरा हो पाया है।

पणजी में बुधवार को छह लेन वाले एलिवेटेड रोड कॉरिडोर के उद्घाटन के दौरान गडकरी ने कहा कि मुंबई-गोवा हाईवे के चौड़ीकरण में हो रही देरी उन्हें शर्मिंदगी महसूस कराती है। उन्होंने यह भी साफ किया कि हाईवे का काम पूरा होने के बाद होने वाले उद्घाटन कार्यक्रम में वह शामिल नहीं होंगे।

2011 में शुरू हुआ प्रोजेक्ट, अब भी पूरा होने का इंतजार

मुंबई-गोवा हाईवे के चौड़ीकरण का काम 2011 में शुरू किया गया था। शुरुआती लक्ष्य के मुताबिक इसे 2016 तक पूरा किया जाना था, लेकिन परियोजना तय समयसीमा में पूरी नहीं हो सकी।

करीब 440 किलोमीटर लंबे हिस्से में काम काफी आगे बढ़ने के बावजूद अभी भी कुछ हिस्सों में निर्माण और सुधार का काम जारी है। हाईवे से जुड़े इलाकों में सड़क की स्थिति, जलभराव, मरम्मत और ट्रैफिक जाम जैसी समस्याएं भी सामने आती रही हैं।

टोल शुरू, लेकिन सड़क से जुड़ी दिक्कतें बरकरार

परियोजना के एक हिस्से में मई से खारपाड़ा टोल प्लाजा पर टोल वसूली शुरू की गई थी। इसके बावजूद हाईवे के कुछ हिस्सों में निर्माण और सुधार का काम जारी है।

सड़क पर कई जगह गड्ढों और पानी भरने की समस्या का भी उल्लेख सामने आया है। ऐसे में परियोजना का बड़ा हिस्सा पूरा होने के बावजूद यात्रियों के लिए पूरी तरह सुगम और व्यवस्थित सफर का लक्ष्य अभी बाकी दिखाई देता है।

ठेकेदारों पर कार्रवाई को लेकर भी गडकरी का सख्त रुख

गडकरी ने हाईवे की देरी के साथ निर्माण कार्य की गुणवत्ता और ठेकेदारों की जवाबदेही का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि वह ऐसे ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करने का रिकॉर्ड बनाना चाहते हैं।

इसी संदर्भ में उन्होंने राज्यसभा में 22 जुलाई को दी गई जानकारी का भी उल्लेख किया। सरकार के मुताबिक, पिछले तीन वर्षों में नेशनल हाईवे निर्माण में खराब गुणवत्ता वाले काम के लिए 103 ठेकेदारों और कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किया गया है। इन पर जुर्माना भी लगाया गया है।

जमीन अधिग्रहण से लेकर ठेकेदारों की परेशानी तक बनी वजह

मुंबई-गोवा हाईवे परियोजना में देरी के पीछे एक ही कारण नहीं रहा। जमीन अधिग्रहण, निर्माण शुरू करने से पहले जरूरी मंजूरियां और ठेकेदारों से जुड़ी समस्याओं ने परियोजना की रफ्तार प्रभावित की।

2024 में केंद्र सरकार ने संसद में भी परियोजना में देरी के कारणों की जानकारी दी थी। इसमें जमीन अधिग्रहण में आने वाली दिक्कतों के साथ कुछ ठेकेदारों की आर्थिक परेशानियों को भी वजह बताया गया था।

बंदरों के ओवरपास के ढहने से भी उठे सवाल

इस परियोजना से जुड़ी चुनौतियों में एक मामला वन्यजीवों की सुरक्षा से भी जुड़ा रहा है। हाईवे पर बंदरों की आवाजाही को सुरक्षित बनाने के लिए 2021 में बनाया गया एक ओवरपास ढह चुका है।

ओवरपास के ढहने की घटना ने निर्माण की गुणवत्ता और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए थे। ऐसे में गडकरी का ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई का रुख इस परियोजना के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मुंबई से गोवा तक कनेक्टिविटी के लिए अहम

मुंबई-गोवा हाईवे महाराष्ट्र के तटीय और कोंकण क्षेत्र को गोवा से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है। महाराष्ट्र में इसका हिस्सा करीब 460 किलोमीटर बताया गया है।

यह मार्ग केवल यात्रियों की आवाजाही के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि कोंकण और गोवा के पर्यटन तथा स्थानीय कारोबार के लिए भी अहम माना जाता है। ऐसे में लंबे समय से चल रहे चौड़ीकरण के काम के पूरी तरह पूरा होने का इंतजार अब भी बना हुआ है।

गडकरी के बयान के बाद सवाल यही है कि 94 प्रतिशत तक पहुंच चुकी इस परियोजना का बाकी काम कब पूरा होगा और सड़क से जुड़ी मौजूदा समस्याओं का स्थायी समाधान कब दिखाई देगा।

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