NMC ने MGM से 24 घंटे में मांगी रिपोर्ट, रात के हॉस्टल विवाद ने फिर उठाया रैगिंग का मुद्दा
एमजीएम मेडिकल कॉलेज में फर्स्ट ईयर MBBS छात्रों की शिकायत के बाद NMC एंटी-रैगिंग सेल ने कॉलेज से जवाब तलब किया है। अब हॉस्टल की CCTV रिकॉर्डिंग और छात्रों के बयान से शिकायत की सच्चाई जांची जाएगी।

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इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज में रैगिंग को लेकर एक नई शिकायत सामने आने के बाद मामला अब NMC तक पहुंच गया है। फर्स्ट ईयर MBBS छात्रों की शिकायत पर नेशनल मेडिकल कमीशन के एंटी-रैगिंग सेल ने कॉलेज प्रबंधन को 24 घंटे में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। शिकायत में देर रात सीनियर छात्रों के हॉस्टल पहुंचने और जूनियर विद्यार्थियों को कमरों से बाहर बुलाने की कोशिश का आरोप लगाया गया है।
शिकायत के बाद अब कॉलेज को देना होगा जवाब
NMC की कार्रवाई के बाद कॉलेज प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। सोमवार को एंटी-रैगिंग कमेटी की बैठक बुलाई गई और संबंधित विद्यार्थियों के बयान लेने की प्रक्रिया शुरू की गई।
प्रबंधन के सामने अब दो अहम बिंदु हैं—उस रात हॉस्टल में वास्तव में कौन पहुंचा था और वहां मौजूद छात्रों से किस तरह की बातचीत या गतिविधि हुई थी। इन सवालों के जवाब CCTV रिकॉर्डिंग और विद्यार्थियों के बयानों से तलाशे जाएंगे।
रात 1 से 3 बजे के बीच का घटनाक्रम
छात्रों की शिकायत के मुताबिक घटना रात करीब 1 से 3 बजे के बीच की है। उनका आरोप है कि कुछ सीनियर छात्र फर्स्ट ईयर के हॉस्टल ब्लॉक-6 में पहुंचे और कमरों के दरवाजे लगातार खटखटाए।
जूनियर छात्रों ने डर के कारण दरवाजे नहीं खोले। शिकायत में यह भी कहा गया है कि सीनियर छात्रों ने उन्हें बाहर आने के लिए बुलाने की कोशिश की थी।
सुरक्षा व्यवस्था भी जांच के दायरे में
शिकायत में हॉस्टल के सुरक्षा कर्मचारी की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। छात्रों का कहना है कि उस समय सुरक्षाकर्मी मौजूद था, लेकिन सीनियर छात्रों को अंदर आने से रोकने का प्रभावी प्रयास नहीं किया गया।
अब कॉलेज प्रशासन यह भी देखेगा कि उस समय सुरक्षा व्यवस्था कैसी थी और ब्लॉक-6 तक सीनियर छात्र किस तरह पहुंचे।
CCTV बताएगा आरोपों में कितनी सच्चाई
घटना का सबसे अहम सबूत हॉस्टल में लगे CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग मानी जा रही है। कॉलेज प्रशासन ब्लॉक-6 की उस रात की फुटेज निकलवा रहा है।
रिकॉर्डिंग में यदि सीनियर छात्रों की मौजूदगी या जूनियर विद्यार्थियों को बाहर बुलाने की कोशिश दिखाई देती है तो उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। कॉलेज छात्रों के बयान भी रिकॉर्ड करेगा।
गणपति उत्सव की बैठक भी शिकायत में शामिल
फर्स्ट ईयर छात्रों ने केवल रात की घटना ही नहीं, बल्कि गणपति उत्सव के दौरान हुई एक बैठक का भी जिक्र किया है। शिकायत के मुताबिक विद्यार्थियों को बैठक में बुलाया गया था और वहां उनके मोबाइल फोन ले लिए गए थे।
छात्रों ने अपनी शिकायत में एंटी-रैगिंग नियमों और हाई कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए उचित कार्रवाई की मांग की है।
ब्लॉक-6 में सीनियर्स की एंट्री पहले से प्रतिबंधित
मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ब्लॉक-6 में फर्स्ट ईयर के विद्यार्थी रहते हैं और नियमों के अनुसार सीनियर छात्रों का वहां प्रवेश प्रतिबंधित है।
ऐसे में अगर जांच के दौरान शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो कॉलेज को यह भी तय करना होगा कि प्रतिबंधित क्षेत्र में सीनियर छात्रों की एंट्री कैसे हुई और सुरक्षा व्यवस्था ने उन्हें क्यों नहीं रोका।
कुछ दिन पहले भी सामने आया था रैगिंग का मामला
एमजीएम में यह शिकायत ऐसे समय आई है जब करीब 10 दिन पहले भी रैगिंग से जुड़ा एक मामला सामने आया था। एमटीएच अस्पताल के एक PG छात्र ने शिकायत की थी, जिसके बाद जांच कमेटी बनाई गई और HOD को हटाने की कार्रवाई की गई थी। बाद में ड्यूटी रोस्टर में भी बदलाव किया गया।
इसी वजह से ताजा शिकायत ने कॉलेज की एंटी-रैगिंग व्यवस्था पर फिर ध्यान खींचा है।
पहले भी शिकायतों पर हुई कार्रवाई
एमजीएम में रैगिंग के मामले इससे पहले भी सामने आ चुके हैं। सितंबर 2025 में 2024 बैच के 109 विद्यार्थियों के हॉस्टल में आने के बाद करीब 50 छात्रों के रैगिंग से परेशान होकर हॉस्टल छोड़ने की बात सामने आई थी। सोशल मीडिया पर ‘प्लीज हेल्प मी’ नाम से बनाए गए अकाउंट के जरिए भी शिकायत सामने आई थी।
नवंबर 2025 में 2025 बैच के MBBS छात्रों ने भी एंटी-रैगिंग हेल्पलाइन पर शिकायत की थी। आरोप था कि कुछ सीनियर छात्रों ने उन्हें निजी फ्लैट पर बुलाया और वहां मारपीट, गाली-गलौज तथा सिगरेट-शराब के लिए दबाव बनाया। कॉलेज की जांच के बाद चार सीनियर छात्रों को एक महीने के लिए निलंबित किया गया था।
अब 24 घंटे की रिपोर्ट पर नजर
एमजीएम डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने शिकायत मिलने की पुष्टि करते हुए कहा है कि मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की गई है।
अब कॉलेज को NMC एंटी-रैगिंग सेल के सामने अपनी रिपोर्ट रखनी है। इसमें छात्रों के बयान और CCTV जांच से सामने आने वाले तथ्य अहम होंगे। इसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों पर किस स्तर की कार्रवाई बनती है।
