MGM में PG डॉक्टर के सुसाइड अटेम्प्ट पर NMC सख्त, 24 घंटे में मांगी रिपोर्ट; WhatsApp चैट से ड्यूटी रिकॉर्ड तक जांच
इंदौर के MGM मेडिकल कॉलेज में PG डॉक्टर सिम्मी यादव से कथित रैगिंग और मानसिक उत्पीड़न की शिकायत NMC तक पहुंचने के बाद आयोग ने कॉलेज प्रबंधन से जवाब मांगा है। ड्यूटी, एंटी रैगिंग रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों की जांच के साथ डॉक्टर की अकादमिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

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इंदौर के MGM मेडिकल कॉलेज और MY अस्पताल से जुड़े PG डॉक्टर सिम्मी यादव के मामले में नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने कॉलेज प्रबंधन से जवाब तलब किया है। परिवार की शिकायत में रैगिंग, मानसिक उत्पीड़न, सार्वजनिक अपमान और कथित अत्यधिक ड्यूटी जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। NMC ने कॉलेज को 24 घंटे के भीतर पैरावाइज कमेंट और Action Taken Report (ATR) भेजने को कहा है।
आयोग ने मामले की तत्काल, निष्पक्ष और वस्तुनिष्ठ जांच करने के साथ-साथ संबंधित रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि अभी जांच के बाद ही होगी।
शिकायत में क्या आरोप लगाए गए?
NMC को शिकायत डॉ. सिम्मी के भाई कुणाल यादव की ओर से मिलने की बात सामने आई है। शिकायत में आरोप है कि सीनियर रेजिडेंट्स की ओर से उन्हें बार-बार कथित तौर पर प्रताड़ित किया गया, सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया और गैर-अकादमिक व कागजी काम का दबाव बनाया गया।
शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि डॉ. सिम्मी ने इंसुलिन की अधिक मात्रा लेकर आत्महत्या का प्रयास किया था। इलाज के बाद उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज किए जाने की बात भी शिकायत में कही गई है। मेडिकल रिकॉर्ड परिवार के पास होने का दावा किया गया है।
NMC ने कॉलेज से घटना की तारीख, समय, परिस्थितियां और उस समय डॉ. सिम्मी किस हालत में मिली थीं, इसकी जानकारी मांगी है। उनकी मौजूदा मेडिकल स्थिति का विवरण भी रिपोर्ट में देने को कहा गया है।
14 से 15 घंटे ड्यूटी के आरोप की होगी जांच
शिकायत में आधिकारिक रोस्टर से ज्यादा समय तक ड्यूटी कराने का आरोप भी लगाया गया है। परिवार का दावा है कि करीब 12 घंटे की निर्धारित ड्यूटी के बजाय उनसे कथित तौर पर 14 से 15 घंटे तक काम कराया गया।
अब NMC ने ड्यूटी रोस्टर, बायोमेट्रिक और अटेंडेंस रिकॉर्ड, हैंडओवर रजिस्टर और छुट्टी से जुड़े दस्तावेज मांगे हैं। आयोग यह भी देखना चाहता है कि कागजों में दर्ज ड्यूटी और वास्तविक ड्यूटी के समय में कोई अंतर था या नहीं।
सार्वजनिक अपमान और धमकी के आरोपों पर भी जवाब
शिकायत में छोटी गलतियों को लेकर सार्वजनिक रूप से अपमानित करने, मानसिक दबाव बनाने और धमकी देने के आरोप भी लगाए गए हैं। यह भी दावा किया गया है कि डॉ. सिम्मी को लगातार निशाना बनाया जाता था और उन्हें परिणाम भुगतने की चेतावनी दी जाती थी।
NMC ने कॉलेज से पूछा है कि क्या डॉ. सिम्मी ने पहले कभी रैगिंग, उत्पीड़न, ज्यादा काम या गैर-अकादमिक जिम्मेदारियों को लेकर मौखिक अथवा लिखित शिकायत की थी। अगर ऐसी कोई शिकायत मिली थी तो उसकी कॉपी और उस पर हुई कार्रवाई की जानकारी भी मांगी गई है।
तीन डॉक्टरों से जुड़े आरोपों पर भी जवाब मांगा
आयोग ने डॉ. यशस्वी, डॉ. निकिता और डॉ. श्वेता से जुड़े आरोपों की अलग-अलग जांच करने को कहा है। रिपोर्ट में संबंधित डॉक्टरों का पक्ष और उनका जवाब शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके साथ यह भी पता लगाया जाएगा कि विभागाध्यक्ष डॉ. निलेश दलाल को कथित शिकायतों की जानकारी कब और किस माध्यम से मिली थी। शिकायत के बाद काउंसलिंग, मध्यस्थता, चेतावनी या निगरानी जैसी कोई कार्रवाई की गई थी या नहीं, इसका भी रिकॉर्ड मांगा गया है।
एंटी रैगिंग कमेटी के रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में
NMC ने MGM की एंटी रैगिंग कमेटी और एंटी रैगिंग स्क्वाड के गठन और कामकाज की जानकारी भी मांगी है। इसमें समिति की संरचना, निगरानी व्यवस्था, निरीक्षण और राउंड के रिकॉर्ड, पहले मिली शिकायतें और उन पर की गई कार्रवाई शामिल है।
आयोग ने PG छात्रों से वरिष्ठ रेजिडेंट्स और फैकल्टी की मौजूदगी से अलग गोपनीय बातचीत करने को भी कहा है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि विभाग में अन्य छात्रों ने भी उत्पीड़न, अपमान, धमकी या गैर-अकादमिक काम के दबाव जैसी कोई शिकायत की थी या नहीं।
NMC के मौजूदा नियमों में मेडिकल संस्थानों में रैगिंग पर रोक और शिकायतों पर कार्रवाई की व्यवस्था पहले से मौजूद है।
WhatsApp चैट और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड होंगे सुरक्षित
मामले में डिजिटल साक्ष्यों को भी महत्वपूर्ण माना गया है। NMC ने संबंधित WhatsApp ग्रुप, मैसेज, ईमेल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने को कहा है।
इसके साथ ड्यूटी रोस्टर, बायोमेट्रिक रिकॉर्ड, हैंडओवर रजिस्टर, अवकाश और अकादमिक रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं। किसी भी रिकॉर्ड को बदलने, हटाने या नष्ट नहीं करने को कहा गया है।
शिकायत के बाद पढ़ाई पर असर न पड़े
NMC ने कॉलेज को यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि शिकायत करने या जांच में शामिल होने के कारण डॉ. सिम्मी की PG ट्रेनिंग प्रभावित न हो। उनकी अटेंडेंस, फॉर्मेटिव असेसमेंट, थीसिस, परीक्षा पात्रता या अकादमिक प्रगति पर किसी तरह का प्रतिकूल असर नहीं पड़ना चाहिए।
आयोग ने आगे किसी कथित उत्पीड़न, धमकी या प्रतिशोध से सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी भी मांगी है। मानसिक स्वास्थ्य सहायता और काउंसलिंग की व्यवस्था का विवरण रिपोर्ट में शामिल करने को कहा गया है।
24 घंटे में ATR, अब कॉलेज की रिपोर्ट पर नजर
NMC ने कॉलेज प्रबंधन से सभी बिंदुओं पर दस्तावेजी साक्ष्यों के साथ पैरावाइज कमेंट और ATR 24 घंटे में उपलब्ध कराने को कहा है। जांच के दौरान शिकायतकर्ता या गवाही देने वाले छात्रों और रेजिडेंट्स की पहचान को कानून के दायरे में गोपनीय रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।
अब पूरे मामले में कॉलेज की रिपोर्ट अहम होगी। इसी रिपोर्ट और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर यह स्पष्ट होगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है, कॉलेज स्तर पर पहले क्या कार्रवाई हुई और आगे किस स्तर पर कदम उठाए जाते हैं।